Gold-Silver ETF: 16 फरवरी को शेयर बाजार में गोल्ड और सिल्वर एक्सचेंज ट्रेडेड फंडों (ETFs) में भारी उथल-पुथल मची है। चांदी के ETFs में 3% तक की गिरावट दर्ज की गई, जबकि सोने के फंड्स भी लाल निशान में रहे। इस गिरावट के पीछे शुक्रवार की तेजी के बाद हुई जोरदार मुनाफावसूली है। वहीं, बाजार नियामक SEBI ने ETFs में हो रहे उतार-चढ़ाव को काबू करने के लिए 'प्राइस बैंड' की समीक्षा का प्रस्ताव दिया है। सेबी मौजूदा 20% की सीमा को तार्किक बनाना चाहता है। एक्सपर्ट्स इसे अभी भी निवेश का मौका मान रहे हैं। पूरी रिपोर्ट पढ़ें।
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| SEBI New Proposal for ETFs-सोने-चांदी में हाहाकार! |
Gold-Silver ETF: अगर आप सोने और चांदी में निवेश (Investment in Gold-Silver) करते हैं, खासकर एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETFs) के जरिए, तो आज की खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। 16 फरवरी का दिन कमोडिटी बाजार के निवेशकों के लिए काफी उतार-चढ़ाव भरा साबित हो रहा है। हफ्ते के पहले कारोबारी दिन ही गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ में जोरदार गिरावट देखने को मिली है।
बाजार में मची इस हलचल के बीच मार्केट रेगुलेटर सेबी (SEBI) ने भी एक बड़ा कदम उठाने के संकेत दिए हैं। सेबी ने गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ में हो रही भारी वोलैटिलिटी (अस्थिरता) को देखते हुए नियमों में बदलाव का प्रस्ताव रखा है। आइए, विस्तार से समझते हैं कि आखिर बाजार में आज हुआ क्या है और सेबी की नई तैयारी क्या है।
क्यों धड़ाम हुए सिल्वर और गोल्ड ETFs?
शुक्रवार को बाजार में एक शानदार तेजी देखी गई थी। महंगाई के आंकड़ों (CPI Data) के बाद सोने-चांदी में उछाल आया था। लेकिन सोमवार, 16 फरवरी को जैसे ही बाजार खुला, निवेशकों का मूड बदल गया। बाजार में 'प्रॉफिट बुकिंग' यानी मुनाफावसूली का दौर शुरू हो गया। जिन निवेशकों ने शुक्रवार को पैसा कमाया था, उन्होंने आज अपना मुनाफा घर ले जाना बेहतर समझा, जिसके चलते कीमतों पर भारी दबाव आ गया।
सिल्वर ETFs का हाल
चांदी से जुड़े ईटीएफ आज सबसे ज्यादा पिटे हैं। दोपहर 12:45 बजे तक के आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति कुछ ऐसी थी:
एडेलवाइस सिल्वर ETF : इसमें लगभग 3% की भारी गिरावट दर्ज की गई।
अन्य प्रमुख फंड्स: सिर्फ एडेलवाइस ही नहीं, बल्कि बंधन सिल्वर ETF, कोटक सिल्वर ETF, और आदित्य बिड़ला सन लाइफ सिल्वर ETF में भी 2% से ज्यादा की गिरावट रही।
दिग्गज नाम भी फिसले: निवेशकों के पसंदीदा माने जाने वाले आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल, एसबीआई सिल्वर ETF, मिराए एसेट और निपॉन इंडिया सिल्वर भी अछूते नहीं रहे और इनमें भी 2% से अधिक की कमजोरी देखी गई।
गोल्ड ETFs की स्थिति
सोने की चमक भी आज थोड़ी फीकी पड़ी है।
चॉइस गोल्ड ETF: यह फंड करीब 2% गिरकर कारोबार कर रहा था।
हल्की गिरावट: एंजेल वन, मोतीलाल ओसवाल और कोटक गोल्ड ETF में भी सुस्ती देखी गई। हालांकि, कुछ गोल्ड ईटीएफ ने सीमित बढ़त के साथ खुद को संभालने की कोशिश भी की।
MCX पर क्या चल रहा है भाव?
सिर्फ ईटीएफ ही नहीं, वायदा बाजार (Futures Market) में भी गिरावट का दौर जारी है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी की कीमतें औंधे मुंह गिरी हैं।
चांदी : दोपहर 12:50 बजे तक चांदी का वायदा भाव करीब 2% टूटकर 2,40,034 रुपये प्रति किलोग्राम पर ट्रेड कर रहा था। इंट्राडे में तो हालत और भी खराब थी, जब भाव 4% तक लुढ़ककर 2,35,208 रुपये के निचले स्तर पर पहुंच गया था।
सोना : पीली धातु में भी कमजोरी रही और इसका वायदा भाव 0.5% की गिरावट के साथ ट्रेड करता नजर आया।
गिरावट के पीछे की असली वजह क्या है?
बाजार के जानकारों का मानना है कि इस गिरावट के पीछे सिर्फ घरेलू कारण नहीं हैं, बल्कि ग्लोबल ट्रिगर्स का भी बड़ा हाथ है।
ग्लोबल मार्केट में छुट्टी: अमेरिका और चीन, जो दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं हैं, वहां के बाजार स्थानीय छुट्टियों के कारण बंद रहे। जब बड़े बाजार बंद होते हैं, तो ट्रेडिंग वॉल्यूम (कारोबार की मात्रा) कम हो जाता है। कम वॉल्यूम में थोड़ी सी बिकवाली भी कीमतों को नीचे गिरा देती है।
मुनाफावसूली (Profit Booking): शुक्रवार को कीमतें काफी बढ़ गई थीं। ऐसे में सोमवार को निवेशकों ने ऊंचे भाव पर माल बेचकर मुनाफा कमाना सही समझा।
ट्रिगर की कमी: रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, केसीएम (KCM) के चीफ एनालिस्ट टिम वाटरर का कहना है कि बाजार को ऊपर ले जाने के लिए फिलहाल कोई नया और बड़ा कारण (Trigger) नहीं दिख रहा है। इसी वजह से सोने ने अपनी शुक्रवार की बढ़त गंवा दी।
SEBI का बड़ा एक्शन: बदलेंगे नियम?
इस सारी उठापटक के बीच सबसे बड़ी खबर मार्केट रेगुलेटर सेबी (SEBI) की तरफ से आ रही है। सेबी की नजर अब ईटीएफ में होने वाले इस तेज उतार-चढ़ाव पर है। नियामक को लगता है कि मौजूदा नियम निवेशकों को जोखिम से बचाने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।
क्या है सेबी का प्रस्ताव?
सेबी ने गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ के लिए 'बेस प्राइस' (Base Price) तय करने और 'प्राइस बैंड' (Price Band) के ढांचे की समीक्षा का प्रस्ताव दिया है।
अभी क्या है नियम: फिलहाल ज्यादातर ईटीएफ पर ±20% का प्राइस बैंड लागू होता है। इसका मतलब है कि एक दिन में कीमतें 20% तक ऊपर या नीचे जा सकती हैं। वहीं, ओवरनाइट फंड्स (TREPs) के लिए यह सीमा ±5% है।
क्या बदलाव हो सकता है: सेबी का मानना है कि 20% का बैंड बहुत ज्यादा है और इसे तर्कसंगत (Rationalize) बनाने की जरूरत है। सेबी चाहता है कि बदलती बाजार परिस्थितियों के हिसाब से इन सीमाओं को संतुलित किया जाए ताकि अत्यधिक वोलैटिलिटी पर काबू पाया जा सके।
क्यों पड़ी जरूरत: सेबी के मुताबिक, मौजूदा सिस्टम में कुछ ऑपरेशनल कमियां हैं। अगर कीमतें बहुत तेजी से ऊपर-नीचे होती हैं, तो छोटे निवेशकों का नुकसान हो सकता है। सेबी इसे वोलैटिलिटी के साथ बेहतर तालमेल में लाना चाहता है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगस्त 2025 में मनीकंट्रोल ने अपनी एक रिपोर्ट में भी जिक्र किया था कि सेबी इस तरह के प्रस्तावों पर गंभीरता से विचार कर रहा है। अब यह चर्चा फिर से तेज हो गई है।
निवेशक अब क्या करें? एक्सपर्ट्स की राय
गिरावट देखकर घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि बाजार के दिग्गज एक्सपर्ट्स अभी भी बुलिश में हैं।
लॉन्ग टर्म के लिए अच्छा है सोना: जियोजित इनवेस्टमेंट्स के कमोडिटी रिसर्च हेड हरीश वी का कहना है कि भले ही अभी उतार-चढ़ाव है, लेकिन 2026 की शुरुआत के लिहाज से गोल्ड का लॉन्ग-टर्म स्ट्रक्चर मजबूत है। डॉलर की चाल और फेड की ब्याज दरें बाजार को प्रभावित कर रही हैं, लेकिन केंद्रीय बैंकों की खरीदारी सोने को सहारा देगी।
खरीदारी का मौका: पीएल कैपिटल (PL Capital) के संदीप रायचुरा का मानना है कि ग्लोबल अनिश्चितताओं और महंगाई के बीच सोना आज भी 'सुरक्षित निवेश' (Safe Haven) है। उनका साफ कहना है कि हालिया गिरावट को एक अवसर के रूप में देखना चाहिए और 'Buy on Dips' (गिरावट पर खरीदारी) की रणनीति अपनानी चाहिए।
आज की गिरावट अल्पकालिक है और मुख्य रूप से तकनीकी कारणों और ग्लोबल छुट्टियों की वजह से है। हालांकि, सेबी का नया प्रस्ताव ईटीएफ बाजार के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है। अगर प्राइस बैंड के नियम सख्त होते हैं, तो भविष्य में हम गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ में इतनी ज्यादा इंट्राडे वोलैटिलिटी शायद न देखें, जो सुरक्षित निवेश पसंद करने वालों के लिए अच्छी खबर हो सकती है। फिलहाल, निवेशकों के लिए सलाह यही है कि वे घबराहट में बिकवाली न करें और बाजार के लॉन्ग-टर्म आउटलुक पर भरोसा रखें।
डिस्क्लेमर: यहां पर दिए गए विचार और इन्वेस्टमेंट सलाह इन्वेस्टमेंट प्रोफेशनल्स के अपने विचार और सलाह हैं। MoneysutraHub.in यूज़र्स को सलाह देता है कि कोई भी इन्वेस्टमेंट का फैसला लेने से पहले किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह लें।

