भारत और यूरोपियन यूनियन की ‘महा-डील': 5 साल के लिए मिला MFN का दर्जा, जानें आम आदमी और कारोबारियों को क्या होगा फायदा?

MoneySutraHub Team

 India EU Trade Deal: भारत और यूरोपियन यूनियन ने एक-दूसरे को 5 साल के लिए MFN का दर्जा दिया है। इस 'मदर ऑफ ऑल डील' से भारतीय निर्यात बढ़ेगा और लग्जरी कारें सस्ती होंगी।

India EU Trade Deal: भारत और यूरोप की नई व्यापारिक दोस्ती


नई दिल्ली: भारत और यूरोपियन यूनियन (EU) के बीच व्यापारिक रिश्तों का एक नया और बड़ा दौर शुरू हो गया है। जनवरी 2026 में दोनों के बीच एक बेहद अहम फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) हुआ है, जिसे व्यापारिक दुनिया में ‘मदर ऑफ ऑल डील’ का नाम दिया जा रहा है। इस ऐतिहासिक समझौते के तहत, दोनों पक्षों ने एक-दूसरे को अगले 5 साल तक 'मोस्ट-फेवर्ड-नेशन' (MFN) का दर्जा देने का फैसला किया है।


इस डील का सीधा असर दोनों देशों के बाजारों, कारोबारियों और आम जनता पर देखने को मिलेगा।


डील से भारत और यूरोप को क्या मिलेगा?


इस समझौते से दोनों तरफ के लोगों के लिए कई बड़े दरवाजे खुल गए हैं। आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं:


भारत को फायदा: भारत से निर्यात होने वाले करीब 93 प्रतिशत सामानों को यूरोपियन यूनियन के 27 देशों में बिना किसी ड्यूटी (टैक्स) के एंट्री मिलेगी। इससे भारतीय व्यापारियों को बड़ा मुनाफा होगा।


यूरोप को फायदा: दूसरी तरफ, जो लोग भारत में महंगी गाड़ियों और वाइन के शौकीन हैं, उनके लिए अच्छी खबर है। यूरोप से आने वाली लग्जरी कारें और वाइन अब भारत में काफी सस्ती हो सकती हैं।


क्या होता है MFN का दर्जा?


जब दो देश एक-दूसरे को MFN का दर्जा देते हैं, तो इसका मतलब है कि वे व्यापार में एक-दूसरे को सबसे ज्यादा तवज्जो देंगे। जब तक यह दर्जा लागू है, भारत या यूरोपियन यूनियन अपने किसी भी अन्य व्यापारिक साथी को इससे बेहतर टैरिफ (टैक्स छूट) ऑफर नहीं कर सकते। अगर किसी एक देश को कोई नई व्यापारिक छूट दी जाती है, तो वह छूट अपने आप सभी MFN पार्टनर्स को भी देनी होगी। हालांकि, इस नियम में कुछ छूट भी हैं। जैसे- लोकल टैक्स, स्टैंडर्ड्स की पहचान और विवाद निपटाने के तरीके इसमें शामिल नहीं हैं। इसके अलावा बॉर्डर से सटे इलाकों में लोकल सर्विसेस को लेकर अलग से फायदे दिए जा सकते हैं।


चौथे साल में होगा बड़ा रिव्यू (समीक्षा)


यह डील सिर्फ सामान के लेन-देन तक सीमित नहीं है। इस समझौते की शर्तों के मुताबिक, डील लागू होने के 4 साल बाद एक जॉइंट कमेटी पूरे कामकाज का रिव्यू करेगी। इस रिव्यू में खास तौर पर भारतीय छात्रों और पेशेवरों पर फोकस किया जाएगा। कमेटी देखेगी कि यूरोप में भारतीय छात्रों की एंट्री, उनके वहां रहने, काम करने के अधिकारों और सर्विस देने वालों के अस्थायी मूवमेंट को लेकर क्या प्रगति हुई है।


क्या 5 साल बाद भी जारी रहेगा MFN?


4 साल बाद होने वाले रिव्यू के आधार पर ही यह तय होगा कि शुरुआती 5 साल बीत जाने के बाद MFN का दर्जा आगे बढ़ाया जाए या नहीं। अगर किसी वजह से दोनों में से किसी भी पक्ष को नुकसान हो रहा है, तो वे तय समय से पहले भी रिव्यू की मांग कर सकते हैं। अगर कमेटी यह फैसला करती है कि MFN को आगे नहीं बढ़ाना है, तो नया फायदा मिलना बंद हो जाएगा। लेकिन अच्छी बात यह है कि जो व्यापारिक फायदे पहले ही दिए जा चुके हैं, वे वैसे ही बरकरार रहेंगे और छीने नहीं जाएंगे।

कुल मिलाकर यह डील भारत के ग्लोबल ट्रेड को एक नई ऊंचाई पर ले जाने का काम करेगी।


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