कच्चे तेल में लगेगी आग! अमेरिका-ईरान तनाव से 110 डॉलर तक पहुंच सकता है क्रूड ऑयल, जानें भारत पर क्या होगा असर

MoneySutraHub Team

 Crude oil price: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव से कच्चे तेल के दाम 110 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकते हैं। वहीं समझौते की स्थिति में यह 60 डॉलर पर आ सकता है।

Crude oil price, US Iran conflict
 

नई दिल्ली: इन दिनों कच्चे तेल (Crude Oil) को लेकर भारी हलचल मची हुई है। अगर अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा तनाव और बढ़ता है, तो ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें उछलकर 110 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती हैं। यह मौजूदा कीमतों से करीब 57 प्रतिशत ज्यादा होगा।


मार्केट एनालिस्ट्स का कहना है कि हालात बिगड़ने पर तेल बाजार में भयंकर तेजी आ सकती है। लेकिन, इसका एक दूसरा पहलू भी है। अगर दोनों देशों के बीच कोई समझौता हो जाता है और दुनिया भर में तेल की सप्लाई बिना रुके चलती रहती है, तो कच्चे तेल के दाम गिरकर 60 डॉलर प्रति बैरल तक भी आ सकते हैं।


क्यों बढ़ रहे हैं कच्चे तेल के दाम?


हाल ही में अमेरिका ने पश्चिम एशिया (West Asia) में अपनी सैन्य तैयारियां तेज कर दी हैं। इसका सीधा असर बाजार पर दिखा है और कच्चे तेल के दामों में 10 प्रतिशत तक का उछाल आ चुका है। लोगों और कंपनियों के बीच डर है कि इस लड़ाई-झगड़े की वजह से तेल की सप्लाई रुक सकती है।


हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) का बड़ा खतरा


विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर यह तनाव हॉर्मुज जलडमरूमध्य तक पहुंचता है, तो कच्चे तेल की कीमत में 20 से 40 डॉलर प्रति बैरल का 'रिस्क प्रीमियम' जुड़ जाएगा।


  • इस रास्ते से हर दिन करीब 20 मिलियन बैरल कच्चा तेल और पेट्रोलियम प्रोडक्ट गुजरते हैं।
  • दुनिया की कुल गैस सप्लाई का 20 प्रतिशत हिस्सा भी यहीं से होकर जाता है।
  • अगर यहां सप्लाई रुकती है, तो कीमतें आसानी से 95 से 110 डॉलर के पार जा सकती हैं।


हालांकि, लंबे समय तक सप्लाई रोकना ईरान के लिए भी आसान नहीं होगा, जब तक कि वह इस समुद्री रास्ते को पूरी तरह से ब्लॉक न कर दे।


बाजार में अभी क्या है स्थिति?


बाजार में इस वक्त काफी डर का माहौल है। जानकारों को लगता है कि तनाव बढ़ने पर दाम 90 डॉलर तक तो पहुंच ही जाएंगे। लेकिन अगर अगले कुछ हफ्तों में अमेरिका, ईरान पर हमला नहीं करता है, तो कीमतें वापस 60 डॉलर के निचले स्तर पर आ सकती हैं। आपको बता दें कि शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड 70 डॉलर के आसपास ट्रेड कर रहा था, जो इससे पहले 72 डॉलर तक पहुंच गया था।


ईरान का तेल और वैश्विक राहत की उम्मीद


ईरान अभी हर दिन 3.3 मिलियन बैरल तेल का उत्पादन करता है। तनाव से इस पर असर पड़ा तो बाजार में पैनिक फैलेगा। हालांकि, दुनिया के बाकी देशों के पास एक्स्ट्रा क्षमता है, जिससे वे इस कमी को पूरा कर सकते हैं।


अगर भविष्य में अमेरिका, ईरान में एक स्थिर सरकार बनाने में कामयाब होता है और वहां से प्रतिबंध हटते हैं, तो ईरान खुले बाजार में ज्यादा तेल बेच पाएगा। ईरान के पास अभी भी रोजाना 0.3 से 0.4 मिलियन बैरल एक्स्ट्रा तेल पैदा करने की ताकत है। इससे ग्लोबल सप्लाई बढ़ेगी और दाम नीचे आएंगे।


भारत के तेल आयात पर क्या असर पड़ा?


शिपिंग ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, भारत के कच्चे तेल के आयात में थोड़ी कमी आई है:


  • फरवरी के शुरुआती 18 दिनों में भारत ने रोजाना औसतन 4.85 मिलियन बैरल तेल खरीदा।
  • वहीं जनवरी में यह आंकड़ा 5.25 मिलियन बैरल था। यानी आयात में करीब 8 प्रतिशत की गिरावट आई है।
  • यह गिरावट मुख्य रूप से रूस से आने वाले तेल में कमी के कारण हुई है।


आंकड़े बताते हैं कि दिसंबर 2025 के डेटा प्रोजेक्शन के अनुसार, रूस से रोजाना 1.28 मिलियन बैरल तेल आ रहा था। जनवरी में यह घटकर 1.22 मिलियन बैरल और फरवरी की शुरुआत में यह 10 प्रतिशत और गिरकर 1.09 मिलियन बैरल प्रतिदिन हो गया है।


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कच्चे तेल का बाजार इस समय पूरी तरह से अमेरिका और ईरान के भू-राजनीतिक (Geopolitical) हालात पर टिका है। युद्ध के हालात बने तो महंगाई का झटका लगना तय है, लेकिन कूटनीतिक शांति बनी रही तो आम आदमी को पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बड़ी राहत मिल सकती है।

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