Silver Price: 29 जनवरी के हाई से 41% लुढ़की चांदी, अब क्या करें निवेशक- खरीदें, बेचें या होल्ड करें?

MoneySutraHub Team

चांदी की कीमतों में भारी गिरावट! 29 जनवरी के रिकॉर्ड हाई से सिल्वर 41% टूट चुका है। जानिए एक्सपर्ट्स की राय- अभी निवेश करें, बेचें या इंतजार करें? पढ़ें पूरी रिपोर्ट।



Silver Price: चांदी के निवेशकों के लिए पिछले कुछ हफ़्ते किसी बुरे सपने से कम नहीं रहे हैं। जो चांदी जनवरी के महीने में सातवें आसमान पर थी और हर हफ्ते नए रिकॉर्ड बना रही थी, उसकी चमक अब अचानक फीकी पड़ गई है। देश और विदेश दोनों ही बाजारों में चांदी की कीमतों में भारी गिरावट देखने को मिल रही है।


29 जनवरी 2024 के बाद से चांदी में जो गिरावट का दौर शुरू हुआ, वह थमने का नाम नहीं ले रहा। सिल्वर और सिल्वर ETF (Exchange Traded Funds) में पैसा लगाने वाले निवेशक अब परेशान हैं। आइए समझते हैं कि आखिर चांदी इतनी क्यों टूटी और अब निवेशकों को क्या करना चाहिए।


ऑल-टाइम हाई से 41% क्रैश हुई चांदी


आंकड़ों पर नजर डालें तो गिरावट काफी डराने वाली है। 29 जनवरी को MCX (मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज) पर चांदी का भाव 4,20,048 रुपये प्रति किलोग्राम के ऑल-टाइम हाई पर पहुंच गया था। उस समय इंटरनेशनल मार्केट में भी यह 121 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड कर रहा था। निवेशकों को लग रहा था कि तेजी अभी और चलेगी।


लेकिन 6 फरवरी आते-आते तस्वीर पूरी तरह बदल गई। MCX पर सिल्वर फ्यूचर्स लुढ़ककर 2,49,499 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गया। इसका सीधा मतलब है कि अपने पीक (शिखर) से चांदी करीब 41% टूट चुकी है। मात्र एक हफ्ते के अंदर किसी एसेट में 41% की गिरावट निवेशकों का हौसला तोड़ने के लिए काफी है।


2 फरवरी को और बुरा था हाल


गिरावट का सबसे बुरा दौर 2 फरवरी को देखा गया था, जब MCX पर सिल्वर फ्यूचर्स गिरकर 2,26,803 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया था। हालांकि, उसके बाद थोड़ी रिकवरी जरूर आई है, लेकिन यह फिजिकल सिल्वर और ETF निवेशकों के नुकसान की भरपाई के लिए नाकाफी है। फिलहाल इंटरनेशनल मार्केट में भी भाव 70 डॉलर प्रति औंस के आसपास संघर्ष कर रहा है।


क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स: क्यों आ रही है गिरावट?


UBS के स्ट्रैटेजिस्ट के मुताबिक, चांदी में इस गिरावट की बड़ी वजह दुनिया में 'रिस्क' (जोखिम) में आई कमी है। उनका कहना है कि चांदी के फंडामेंटल्स (बुनियादी ढांचे) में कोई खराबी नहीं आई है, लेकिन शॉर्ट टर्म में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।


UBS की रिपोर्ट में कहा गया है कि जब तक इनवेस्टमेंट डिमांड (निवेश की मांग) नहीं बढ़ती, तब तक चांदी के लिए 85 डॉलर प्रति औंस के ऊपर टिके रहना मुश्किल होगा। हालांकि, लंबी अवधि के लिए संकेत अच्छे हैं क्योंकि:


ब्याज दरों में कटौती का दौर शुरू हो सकता है।

ग्लोबल इकोनॉमी में रिकवरी की उम्मीद है।

अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम हो रही है।

सप्लाई और डिमांड में बड़ा अंतर


भविष्य के लिए एक अच्छी खबर यह है कि चांदी की डिमांड उसकी सप्लाई से ज्यादा रहने वाली है। अनुमान है कि इस साल चांदी की सप्लाई, डिमांड के मुकाबले करीब 30 करोड़ औंस कम रहेगी। वहीं, निवेश की मांग 40 करोड़ औंस पार कर सकती है।


अगले साल तक 134 डॉलर जाने का अनुमान


OCBC के एमडी (इनवेस्टमेंट स्ट्रैटेजी) वासु मेनन ने निवेशकों को घबराने की जगह धैर्य रखने की सलाह दी है। उनका कहना है कि चांदी एक 'हाइब्रिड एसेट' है, जिसका इस्तेमाल ज्वैलरी के साथ-साथ इंडस्ट्री में भी होता है। उन्होंने लंबी अवधि के लिए एक बड़ा टारगेट दिया है। उनके मुताबिक, अगले साल यानी मार्च 2026 तक चांदी 134 डॉलर प्रति औंस तक जा सकती है।


निवेशकों के लिए काम की सलाह: अब क्या करें?


इतनी भारी उथल-पुथल के बीच निवेशकों के मन में सवाल है कि वे क्या फैसला लें। एक्सपर्ट्स ने इसके लिए कुछ सुझाव दिए हैं:


पुराने निवेशक (Hold): अगर आपको पैसों की तुरंत जरूरत नहीं है, तो पैनिक में आकर न बेचें। कम से कम एक साल का इंतजार करें। लंबी अवधि में रिकवरी की पूरी उम्मीद है।

एग्जिट करना है तो (Sell): जो निवेशक ज्यादा रिस्क नहीं ले सकते या जिन्हें पैसे चाहिए, वे एक साथ सब कुछ बेचने के बजाय, बीच-बीच में आने वाली छोटी तेजी (Bounce back) पर थोड़ा-थोड़ा करके बेच सकते हैं।


नए निवेशक (Buy): जिन्होंने अभी तक निवेश नहीं किया है, उनके लिए यह मौका हो सकता है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर भाव 60-65 डॉलर के आसपास आता है, तो यह खरीदारी का अच्छा लेवल होगा। एमकेएस पैंप की रिसर्च हेड निकी शिल्स के अनुसार भी चांदी 60 डॉलर तक फिसल सकती है, जो एक अट्रैक्टिव एंट्री पॉइंट होगा।


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चांदी में फिलहाल भारी गिरावट है और शॉर्ट टर्म में दबाव बना रह सकता है। लेकिन फंडामेंटल्स मजबूत हैं, इसलिए लंबी अवधि के नजरिए से संयम बनाए रखना ही समझदारी होगी।

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