Share Market Next Week: 18 मई से बाजार की दिशा तय करेंगे ये 5 बड़े फैक्टर, US-ईरान तनाव और कच्चा तेल बढ़ाएगा टेंशन!

Keyur Raval

 Share Market Next Week: 18 मई से शेयर बाजार की चाल US-ईरान तनाव, 109.2 डॉलर पर पहुंचे कच्चे तेल और गिरते रुपये पर निर्भर करेगी। जानिए 2026 में विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली और Q4 नतीजों का बाजार पर क्या असर होगा।


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अहमदाबाद, 17 मई: पिछले हफ्ते शेयर बाजार में निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। 15 मई को खत्म हुए कारोबारी हफ्ते में सेंसेक्स 2,090.20 अंक (2.7%) और निफ्टी 532.65 अंक (2.2%) टूट गया। शुक्रवार, 15 मई को सेंसेक्स 160.73 अंक गिरकर 75,237.99 पर और निफ्टी 46.10 अंक फिसलकर 23,643.50 पर बंद हुआ था।


दो दिन की अच्छी तेजी के बाद बाजार में अचानक आई इस गिरावट के पीछे कई कारण थे। प्रॉफिट बुकिंग, डॉलर के मुकाबले कमजोर पड़ता रुपया, कच्चे तेल की आग और महंगाई बढ़ने का डर निवेशकों पर हावी रहा। इसके अलावा एशियाई बाजारों के खराब संकेतों ने भी माहौल बिगाड़ा।


अब 18 मई से शुरू हो रहे नए हफ्ते में शेयर बाजार किस ओर करवट लेगा? आइए जानते हैं वो 5 अहम फैक्टर जो इस हफ्ते बाजार की चाल तय करेंगे:


1. पश्चिम एशिया का तनाव (US-ईरान संघर्ष)


दुनिया भर के निवेशकों की नजर इस वक्त अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे विवाद पर टिकी है। एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर के मुताबिक, समुद्री मार्ग 'होर्मुज स्ट्रेट' से जुड़ी किसी भी घटना का सीधा असर ग्लोबल मार्केट पर पड़ेगा। यह रास्ता दुनिया की ऊर्जा सप्लाई के लिए बहुत अहम है। अगर दोनों देशों के बीच तनाव कम होता है, तो बाजार में शानदार रिकवरी देखने को मिल सकती है। लेकिन अगर विवाद बढ़ा, तो शेयर और कमोडिटी मार्केट बुरी तरह क्रैश हो सकते हैं।


2. कच्चे तेल में उबाल


ब्रेंट कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें बाजार के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बनी हुई हैं। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स उछलकर 109.2 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है। पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने से महंगाई का डर और गहरा गया है। अगर क्रूड में तेजी जारी रही, तो बाजार दबाव में ही रहेगा।


3. रुपये की ऐतिहासिक कमजोरी


भारतीय रुपया पिछले हफ्ते अमेरिकी डॉलर के सामने 96 के लेवल से भी नीचे गिर गया था। 15 मई को यह 96.14 प्रति डॉलर के निचले स्तर तक गया, हालांकि बाद में थोड़ी रिकवरी के साथ 95.81 पर बंद हुआ। जियोजीत इनवेस्टमेंट्स के चीफ इनवेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वी के विजयकुमार का कहना है कि विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और बढ़ते करंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) के कारण रुपया पिट रहा है। अगर यह कमजोरी बरकरार रही, तो बाजार संभल नहीं पाएगा।


4. 2026 में FPI की रिकॉर्ड बिकवाली


विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) लगातार भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं। NSDL के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, मई महीने में अब तक FPI 27,048 करोड़ रुपये के शेयर बेच चुके हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि साल 2026 में अब तक विदेशी निवेशकों ने कुल 2.2 लाख करोड़ रुपये की भारी निकासी की है। अमेरिका में बॉन्ड यील्ड ज्यादा होने और मजबूत डॉलर की वजह से विदेशी निवेशक भारत जैसे उभरते बाजारों से पैसा निकालकर अमेरिका में लगा रहे हैं।


5. कंपनियों के Q4 नतीजे और ग्लोबल डेटा


इस हफ्ते भारतीय बाजार पर कंपनियों के तिमाही नतीजों (Q4 Results) का सीधा असर दिखेगा। इंडियन ऑयल (IOCL), बीपीसीएल (BPCL), गेल और एनटीपीसी जैसी 644 बड़ी कंपनियां अपना रिपोर्ट कार्ड पेश करने वाली हैं। इसके अलावा चीन, अमेरिका और भारत के आर्थिक आंकड़ों के साथ-साथ अमेरिकी फेडरल रिजर्व (FOMC) की बैठक के मिनट्स भी बाजार की दिशा तय करने में अहम रोल निभाएंगे।


कुल मिलाकर यह हफ्ता बाजार के लिए काफी नाजुक रहने वाला है। निवेशकों को भू-राजनीतिक तनाव और विदेशी निवेशकों के रुख पर कड़ी नजर रखनी होगी। ऐसे माहौल में संभलकर और लंबी अवधि का नजरिया रखकर ही निवेश करना बेहतर रहेगा।


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