पश्चिम एशिया की आग से भारत में बढ़ेगी टेंशन! पेट्रोल-डीजल के दाम बिगाड़ेंगे बजट, शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए क्या है ‘टाटा' की चेतावनी?

Keyur Raval

Middle East Crisis impact on India: पश्चिम एशिया के तनाव से कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। टाटा म्यूचुअल फंड की रिपोर्ट के मुताबिक, इससे भारत में महंगाई, GDP और शेयर बाजार पर बुरा असर पड़ सकता है। जानें इस संकट के बीच निवेशकों को अपने पैसे कहां लगाने चाहिए। 


Middle East Crisis impact on India
Inflation risk in India



नई दिल्ली, 14 मई: दुनिया के एक कोने में जब भी गोलियां चलती हैं या मिसाइलें दागी जाती हैं, तो उसकी तपिश मीलों दूर बैठे आम आदमी की जेब तक पहुंच ही जाती है। पश्चिम एशिया (Middle East) में इन दिनों हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। वहां मंडरा रहे युद्ध के बादलों का सीधा असर अब भारतीय अर्थव्यवस्था और आम आदमी की रसोई पर पड़ने का खतरा मंडराने लगा है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के आसपास शिपिंग पर लगे प्रतिबंधों और सप्लाई चेन में आई भारी रुकावट के चलते कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में आग लग गई है।


दिग्गज निवेश संस्था ‘टाटा म्यूचुअल फंड' (Tata Mutual Fund)ने अपनी ताजा रिपोर्ट में एक बड़ी चेतावनी दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, अगर पश्चिम एशिया का यह तनाव जल्दी खत्म नहीं हुआ, तो भारत में जीडीपी (GDP) की रफ्तार धीमी पड़ सकती है, महंगाई बेकाबू हो सकती है और शेयर बाजार में निवेशकों का मुनाफा घट सकता है। तो चलिए आसान भाषा में समझते हैं कि सात समंदर पार चल रहे इस विवाद से आपकी जेब और आपके निवेश पोर्टफोलियो पर क्या असर पड़ने वाला है और आपको अब क्या रणनीति अपनानी चाहिए।


चुनाव खत्म, अब लगेगा पेट्रोल-डीजल का झटका?


कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर दुनिया के कई देशों में ईंधन के दामों पर दिखने लगा है। लेकिन भारत में आम जनता को फिलहाल इस झटके से बचाकर रखा गया था। इसका एक बड़ा कारण राज्यों के विधानसभा चुनाव भी रहे हैं। तेल कंपनियों ने घाटा सहकर भी दाम नहीं बढ़ाए, लेकिन अब जब चुनाव खत्म हो चुके हैं, तो इस बात की पूरी आशंका है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में धीरे-धीरे बढ़ोतरी की जाएगी।


टाटा म्यूचुअल फंड की रिपोर्ट साफ तौर पर कहती है कि भारत अपनी जरूरत का बहुत बड़ा हिस्सा आयात करता है, जिसमें कच्चा तेल और सोना सबसे ऊपर हैं। अगर लंबे समय तक कच्चे तेल की कीमतों में 50 प्रतिशत तक की तेजी बनी रहती है, तो भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए यह एक बड़ा सिरदर्द साबित होगा। जब भी पेट्रोल-डीजल महंगा होता है, तो ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट यानी माल ढुलाई महंगी हो जाती है। इसका सीधा असर रोजमर्रा की चीजों जैसे- फल, सब्जी, दूध, राशन से लेकर हर उस चीज पर पड़ता है जो ट्रकों में भरकर हमारे शहरों तक पहुंचती है।


महंगाई, GDP और रुपये पर होगा सीधा प्रहार  


अर्थशास्त्र के नियम बहुत सीधे होते हैं। टाटा एमएफ के अनुमान के मुताबिक, अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत में 10 डॉलर प्रति बैरल का इजाफा होता है, तो:


महंगाई दर (CPI): हमारे देश की उपभोक्ता महंगाई दर में लगभग 45 बेसिस पॉइंट (0.45%) की सीधी बढ़ोतरी हो जाती है।


चालू खाता घाटा (CAD): देश का चालू खाता घाटा भी 30 से 40 बेसिस पॉइंट तक बढ़ जाता है, क्योंकि हमें तेल खरीदने के लिए ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ते हैं।


अगर हालात बिगड़ते हैं और कच्चे तेल का भाव 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जाकर टिका रहता है, तो चालू वित्त वर्ष में भारत की महंगाई दर 5 प्रतिशत के करीब पहुंच सकती है। इतना ही नहीं, देश की GDP ग्रोथ रेट में भी 1 प्रतिशत तक की गिरावट देखने को मिल सकती है।


इसके अलावा, खाड़ी देशों में काम करने वाले भारतीयों की तरफ से भेजे जाने वाले पैसे (Remittance) और भारत के निर्यात पर भी बुरा असर पड़ सकता है। भारतीय रुपये की हालत पहले ही खराब है और यह डॉलर के मुकाबले 95 के चिंताजनक स्तर को पार कर चुका है। रुपया कमजोर होने का मतलब है कि हमारा विदेशी मुद्रा भंडार तेजी से खाली होगा और विदेशों से आने वाला हर सामान महंगा हो जाएगा।


RBI की चाल और सरकार के कड़े कदम


जब महंगाई बढ़ती है, तो देश का केंद्रीय बैंक यानी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) सतर्क हो जाता है। ऐसे माहौल में RBI ब्याज दरों (Repo Rate) में कटौती करने से बचेगा। यानी अगर आप इस उम्मीद में बैठे थे कि आपके होम लोन या कार लोन की EMI कम होने वाली है, तो आपको अभी और इंतजार करना पड़ सकता है।


वहीं, बाहरी दबाव और डॉलर की निकासी को रोकने के लिए सरकार भी कुछ कड़े कदम उठा सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, सोने के आयात शुल्क (Import Duty on Gold) में बढ़ोतरी की जा सकती है ताकि लोग बाहर से सोना कम खरीदें और देश का डॉलर बाहर न जाए।


शेयर बाजार (Equity Market) के निवेशकों के लिए खतरे की घंटी


भारतीय शेयर बाजार ने पिछले कुछ समय में शानदार रिटर्न दिया है। आज के समय में निफ्टी-50 (Nifty 50) का 12 महीने का फॉरवर्ड पी/ई (P/E Ratio) लगभग 19 गुना पर है, जो कि एक सामान्य वैल्यूएशन है। लेकिन समस्या यह है कि अगर पश्चिम एशिया का संकट लंबा खिंचता है, तो कंपनियों के मुनाफे पर भारी चोट पड़ेगी।


कच्चा तेल महंगा होने और सप्लाई चेन टूटने से कंपनियों की लागत बढ़ जाएगी। जब सामान बनाने की लागत बढ़ेगी, तो उनका प्रॉफिट मार्जिन सिकुड़ जाएगा। टाटा म्यूचुअल फंड ने अनुमान जताया है कि वित्तीय वर्ष 2027 (FY27) में कंपनियों की कमाई (Earnings Growth) का जो अनुमान पहले 17 प्रतिशत लगाया जा रहा था, वह अब गिरकर 12 से 15 प्रतिशत के बीच रह सकता है। अगर कंपनियों की कमाई घटेगी, तो शेयर बाजार में तेजी की रफ्तार भी धीमी पड़ जाएगी।


इस उथल-पुथल में कहां लगाएं पैसा?  


अगर आप शेयर बाजार के निवेशक हैं, तो घबराने की जरूरत नहीं है, बल्कि स्मार्ट तरीके से निवेश करने का समय आ गया है। रिपोर्ट के मुताबिक कुछ ऐसे सेक्टर हैं, जो इस संकट के दौर में भी आपको अच्छा रिटर्न दे सकते हैं 


पावर और एनर्जी (Power & Energy): ऊर्जा सुरक्षा पर सरकार का पूरा फोकस है, इसलिए यह सेक्टर सेफ है।


हेल्थकेयर (Healthcare): दवाइयों और स्वास्थ्य सेवाओं की मांग हर हाल में बनी रहती है।


एफएमसीजी (FMCG): रोजमर्रा की चीजों की मांग कभी खत्म नहीं होती, इसलिए ये कंपनियां सुरक्षित दांव हैं।


मेटल्स एंड माइनिंग (Metals & Mining): मैन्युफैक्चरिंग पर बढ़ते जोर के कारण इस सेक्टर में निवेश फायदेमंद साबित हो सकता है।


डेट मार्केट (Debt Market) के लिए सही रणनीति


जो निवेशक शेयर बाजार के जोखिम से बचना चाहते हैं और फिक्स्ड इनकम (Fixed Income) में पैसा लगाना चाहते हैं, उनके लिए भी टाटा म्यूचुअल फंड ने सलाह दी है:


छोटी अवधि के निवेशक (1 साल तक): मौजूदा अनिश्चितता को देखते हुए 1 साल तक का नजरिया रखने वाले निवेशकों को मनी मार्केट (Money Market), अल्ट्रा-शॉर्ट टर्म फंड्स (Ultra-Short Funds) और ट्रेजरी (Treasury) जैसी रणनीतियों पर फोकस करना चाहिए।


लंबी अवधि के निवेशक (1 साल से ज्यादा): अगर आप 1 साल से ज्यादा समय तक अपना पैसा ब्लॉक कर सकते हैं और थोड़ा उतार-चढ़ाव बर्दाश्त कर सकते हैं, तो आपके लिए कॉरपोरेट बॉन्ड फंड (Corporate Bond Funds) सबसे शानदार विकल्प हैं। इनमें आपको हाई यील्ड (अच्छा रिटर्न) और बेहतर कैरी अवसर मिल रहे हैं।


पश्चिम एशिया का संकट भारत के लिए एक बड़ी आर्थिक चुनौती बनकर उभर रहा है। कच्चे तेल की आग का सीधा असर हमारी अर्थव्यवस्था की रफ्तार पर पड़ना तय है। ऐसे में एक आम नागरिक और निवेशक के तौर पर हमें सतर्क रहने की जरूरत है। बाजार के उतार-चढ़ाव से घबराकर अपना पैसा निकालने के बजाय, अच्छे सेक्टर्स और सही म्यूचुअल फंड्स में अपना निवेश बनाए रखना ही समझदारी होगी।


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