Kharif fertilizer stock 2026: क्या देश में खाद की कमी है? सरकार ने जारी किया फर्टिलाइजर का नया डेटा, पैनिक बाइंग से बचें किसान
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नई दिल्ली, 12 मई: भारत एक कृषि प्रधान देश है और यहां के किसानों के लिए हर फसल का सीजन किसी त्योहार से कम नहीं होता। लेकिन जब बात खरीफ सीजन की आती है, तो खाद (Fertilizer) की उपलब्धता सबसे बड़ा मुद्दा बन जाती है। हाल ही में पश्चिम एशिया (West Asia) में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते भारी तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर अस्थिरता का माहौल है। इस ग्लोबल क्राइसिस का असर दुनिया भर के व्यापार पर पड़ा है।
इसी बीच देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागरिकों और खासकर किसानों से एक बहुत ही अहम अपील की है। पीएम मोदी ने आयातित (Imported) वस्तुओं पर देश की निर्भरता कम करने का आग्रह किया है। किसानों से विशेष रूप से कहा गया है कि वे अपने खेतों में रासायनिक खाद का उपयोग 50% तक कम कर दें और प्राकृतिक खेती (Natural Farming) की तरफ अपने कदम बढ़ाएं। इस अपील के बाद से ही बाजार में हलचल तेज हो गई है। ऐसे में यह जानना बहुत जरूरी है कि आगामी खरीफ सीजन के लिए हमारे पास खाद का कितना स्टॉक है। आइए इस पूरे गणित को विस्तार से समझते हैं।
शेयर बाजार पर दिखा पीएम की अपील का सीधा असर
प्रधानमंत्री मोदी की अपील का असर सिर्फ खेती-किसानी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका सीधा इम्पैक्ट शेयर बाजार पर भी देखने को मिला है। रासायनिक खाद का इस्तेमाल 50% कम करने की सलाह के बाद देश की प्रमुख फर्टिलाइजर कंपनियों के शेयरों में 3% तक की गिरावट दर्ज की गई।
शेयर बाजार में आई इस गिरावट और वैश्विक अस्थिरता के कारण अचानक से अफवाहों का बाजार गर्म हो गया। कई जगहों पर यह बातें फैलने लगीं कि शायद देश में खाद की कमी होने वाली है। लेकिन, केंद्र सरकार ने इन सभी अटकलों पर विराम लगाते हुए खरीफ बुवाई के सीजन से पहले खाद की उपलब्धता का आधिकारिक और पक्का डेटा जारी कर दिया है।
सरकार का सख्त संदेश: पैनिक बाइंग (Panic Buying) न करें किसान
किसानों की चिंताओं को दूर करते हुए केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि आगामी खरीफ सीजन के लिए देश में खाद का पर्याप्त से ज्यादा भंडार मौजूद है। इसलिए किसानों को बिल्कुल भी घबराने या पैनिक बाइंग (जरूरत से ज्यादा खरीदारी करके घर में रखने) की जरूरत नहीं है।
अक्सर देखा जाता है कि कमी की अफवाह सुनकर किसान अपनी जरूरत से ज्यादा खाद खरीद लेते हैं, जिससे बाजार में सच में कृत्रिम (Artificial) कमी पैदा हो जाती है। उर्वरक विभाग की अतिरिक्त सचिव अपर्णा एस. शर्मा ने एक खास अंतर-मंत्रालयी ब्रीफिंग में देश के खाद भंडार का पूरा कच्चा-चिट्ठा पेश किया है। उनके मुताबिक, स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है।
जरूरत से ज्यादा स्टॉक है मौजूद: 51% कोटा पहले से तैयार
सरकार के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, खरीफ फसल चक्र 2026 के लिए खाद की सुरक्षा पूरी तरह से मजबूत है। कृषि विभाग ने एक अनुमान लगाया है कि खरीफ 2026 के लिए पूरे देश में लगभग 390.54 लाख टन खाद की आवश्यकता होगी।
अगर हम पिछले वर्षों के सामान्य ट्रेंड को देखें, तो बुवाई के इस समय तक मांग का करीब 33% स्टॉक ही गोदामों में रहता है। लेकिन आपको जानकर हैरानी और खुशी होगी कि इस बार हालात बिल्कुल अलग हैं। फिलहाल हमारे पास 51% से अधिक स्टॉक पहले से ही उपलब्ध है। इसके अलावा, हालिया वैश्विक संकट को देखते हुए देश की सुरक्षा को और पुख्ता करने के लिए 97 लाख मीट्रिक टन खाद स्टॉक में और जोड़ा गया है। इसका मतलब है कि किसी भी किसान को खाद के लिए लाइन में नहीं लगना पड़ेगा।
विदेशी बाजार से भी सुरक्षित किया गया है बंपर भंडार
घरेलू स्तर पर खाद का उत्पादन तो पूरे जोरों पर चल ही रहा है, लेकिन सरकार कोई भी रिस्क नहीं लेना चाहती। 15 से 20 दिनों के भीतर खेती का पीक सीजन (Peak Season) शुरू होने वाला है। इस समय खाद की मांग सबसे ज्यादा होती है।
इस दौरान कोई भी दिक्कत न आए, इसके लिए सरकार ने विदेशों से बड़े पैमाने पर आयात (Import) के सौदे भी पक्के कर लिए हैं। विदेशी बाजार से जो बफर स्टॉक आ रहा है, उसका डेटा कुछ इस प्रकार है:
- NPK कॉम्प्लेक्स: 7 लाख टन
- DAP (डि-अमोनियम फास्फेट): 12 लाख टन
- ट्रिपल सुपर फास्फेट: 4 लाख टन
- अमोनियम सल्फेट: 3 लाख टन
यह भारी-भरकम आयातित स्टॉक इस बात की गारंटी है कि पीक सीजन में खाद की सप्लाई चेन बिल्कुल भी नहीं टूटेगी।
किसानों के लिए क्या हैं खाद की ताजा कीमतें (MRP)?
बाजार में उड़ रही महंगाई की अफवाहों के बीच सरकार ने खाद के रेट को लेकर भी स्थिति पूरी तरह से स्पष्ट कर दी है। प्रमुख उर्वरकों की अधिकतम खुदरा कीमत (MRP) में एक रुपये का भी बदलाव नहीं किया गया है। वर्तमान में खाद की कीमतें इस प्रकार हैं:
नीम कोटेड यूरिया (Neem Coated Urea): 242 रुपये प्रति बैग (एक बैग 45 किलो का होता है)।
DAP (डि-अमोनियम फास्फेट): 1350 रुपये प्रति बैग (एक बैग 50 किलो का होता है)।
अन्य कॉम्प्लेक्स खाद: इनकी कीमतें बाजार के अनुसार तय होती हैं। लेकिन किसानों पर महंगाई का सीधा असर न पड़े, इसके लिए सरकार इन पर भारी सब्सिडी का प्रबंधन कर रही है, ताकि रेट स्थिर रहें।
कालाबाजारी और जमाखोरी पर सरकार का कड़ा पहरा
कई बार ऐसा होता है कि पर्याप्त स्टॉक होने के बावजूद कुछ लालची डीलर खाद की जमाखोरी (Hoarding) करने लगते हैं, ताकि उसे ब्लैक में महंगे दामों पर बेच सकें। इस समस्या से निपटने के लिए अतिरिक्त सचिव ने बताया कि सभी राज्यों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे खाद की जमाखोरी और इसके व्यावसायिक (कमर्शियल) उपयोग को हर हाल में रोकें।
हालात की निगरानी के लिए सचिवों का एक विशेष अधिकार प्राप्त समूह बनाया गया है, जो हर हफ्ते स्थिति की बारीकी से समीक्षा कर रहा है। शुरुआती दौर में कुछ इलाकों में किसानों के बीच पैनिक बाइंग देखी गई थी। इसे रोकने के लिए सरकार ने स्पष्ट रूप से बता दिया है कि देश भर के सभी यूरिया प्लांट अपनी पूरी क्षमता (Full Capacity) के साथ दिन-रात काम कर रहे हैं और उत्पादन का शेड्यूल बिल्कुल सामान्य है।
सब्सिडी का भारी बोझ और पीएम मोदी की लॉन्ग-टर्म रणनीति
आपको बता दें कि किसानों को सस्ती खाद उपलब्ध कराने के लिए सरकार अपनी जेब से एक बहुत बड़ी रकम खर्च करती है। बजट 2026-27 के आंकड़ों पर नजर डालें तो केंद्र सरकार ने 170805 करोड़ रुपये की भारी-भरकम उर्वरक सब्सिडी का अनुमान लगाया है।
हालांकि, जानकारों का मानना है कि वैश्विक बाजार में यूरिया और अन्य रसायनों की कीमतें दोगुनी होने के कारण यह सब्सिडी बिल और भी ज्यादा बढ़ सकता है। यही कारण है कि प्रधानमंत्री मोदी ने किसानों से प्राकृतिक खेती अपनाने की अपील की है।
इस अपील का मुख्य उद्देश्य देश के विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves) पर पड़ने वाले भारी दबाव को कम करना है। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव के चलते हमारा आयात बिल (Import Bill) बहुत तेजी से बढ़ गया है। ऐसे में अगर देश के किसान रासायनिक खाद का संतुलित और 50% कम उपयोग करते हैं, तो इससे न सिर्फ हमारी मिट्टी की उपजाऊ क्षमता बचेगी, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को भी एक बहुत बड़ी मजबूती मिलेगी।
कुल मिलाकर लब्बोलुआब यह है कि खरीफ सीजन 2026 के लिए देश के पास खाद का बंपर स्टॉक मौजूद है। सरकार ने अपनी तरफ से सारी तैयारियां पूरी कर ली हैं। अब जिम्मेदारी किसानों की है कि वे किसी भी तरह की अफवाह पर ध्यान न दें और पैनिक बाइंग से बचें। साथ ही, पीएम मोदी की अपील पर अमल करते हुए धीरे-धीरे प्राकृतिक खेती की ओर कदम बढ़ाएं, क्योंकि यही भविष्य की खेती है जो किसान और देश, दोनों को समृद्ध बनाएगी।

