मिडिल ईस्ट संकट पर गौतम अदाणी का सबसे बड़ा बयान: "अब हथियारों से नहीं, एनर्जी और डिजिटल सिक्योरिटी से तय होगी देशों की असली ताकत"

Keyur Raval

CII Annual Business Summit 2026: CII समिट 2026 में गौतम अदाणी ने मिडिल ईस्ट संकट पर बड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अब एनर्जी और डिजिटल सिक्योरिटी ही किसी भी देश की असली ताकत है।


CII Annual Business Summit 2026
Gautam Adani



नई दिल्ली, 11 मई: आयोजित CII Annual Business Summit 2026 में अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी ने दुनिया के बदलते आर्थिक और रणनीतिक हालात पर एक बेहद अहम बयान दिया है। मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष और बुनियादी ढांचे पर हो रहे हमलों का जिक्र करते हुए अदाणी ने कहा कि दुनिया अब बदल चुकी है। पिछले 30 सालों से जो 'फ्लैट वर्ल्ड' (खुली दुनिया) का सपना हमें दिखाया जा रहा था, वह टूट चुका है। आज दुनिया 'फ्रैक्चर्ड' यानी बंट चुकी है। अब डेटा, सेमीकंडक्टर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस केवल तकनीक नहीं रहे, बल्कि ये राष्ट्रीय सुरक्षा का सबसे अहम हिस्सा बन गए हैं। अदाणी ने साफ कर दिया है कि आने वाले समय में वही देश सबसे ताकतवर होगा, जिसके पास अपनी खुद की एनर्जी सिक्योरिटी और मजबूत डिजिटल सिक्योरिटी होगी। भारत के 100 साल के विजन के लिए भी यह सबसे बड़ी जरूरत है।



दुनिया इस वक्त कई तरह के उतार-चढ़ाव और संघर्षों से गुजर रही है। एक तरफ ग्लोबल इकॉनमी को मंदी और महंगाई का डर सता रहा है, तो दूसरी तरफ जियोपॉलिटिकल टेंशन (भौगोलिक-राजनीतिक तनाव) ने पूरी दुनिया के व्यापारिक समीकरणों को उलझा कर रख दिया है। इसी बीच देश की राजधानी नई दिल्ली में आयोजित हुए CII Annual Business Summit 2026 (भारतीय उद्योग परिसंघ के वार्षिक शिखर सम्मेलन) में भारत के दिग्गज कारोबारी और अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी (Gautam Adani) ने एक ऐसा बयान दिया है, जिसने पूरी दुनिया के उद्योग जगत और नीति निर्माताओं का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।


गौतम अदाणी ने इस समिट के स्पेशल प्लेनरी सेशन को संबोधित करते हुए एक बहुत ही साफ और कड़ा संदेश दिया। उनका यह संदेश सिर्फ भारत के लिए नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक तरह का ‘रियलिटी चेक' है। उन्होंने मिडिल ईस्ट (खाड़ी देशों) में चल रहे मौजूदा संकट का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे भविष्य की दुनिया अब पूरी तरह से बदल चुकी है। आइए विस्तार से समझते हैं कि गौतम अदाणी ने देश की अर्थव्यवस्था, सुरक्षा और भविष्य को लेकर क्या-क्या अहम बातें कहीं।


टूट गया 'फ्लैट वर्ल्ड' का भ्रम: अब 'बंटी हुई' है दुनिया


गौतम अदाणी ने अपने भाषण की शुरुआत एक बहुत ही गहरी बात से की। उन्होंने याद दिलाया कि पिछले 30 सालों से दुनिया भर के अर्थशास्त्रियों और बड़े-बड़े नेताओं ने हमें एक ही बात सिखाई थी ‘दुनिया फ्लैट हो चुकी है'। इसका मतलब यह था कि दुनिया भर के देशों के बीच अब कोई सीमाएं नहीं बची हैं, व्यापार खुला है, और सब एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।


हमें यह विश्वास दिलाया गया था कि दुनिया भर में सप्लाई चेन हमेशा खुली और चालू रहेंगी। एनर्जी (ऊर्जा) की सप्लाई बिना किसी रुकावट के पूरी दुनिया में होती रहेगी। टेक्नोलॉजी की कोई सीमा नहीं होगी, वह हर देश में आसानी से पहुंचेगी। पैसा (पूंजी) बिना किसी रोक-टोक के दुनिया के किसी भी कोने में निवेश किया जा सकेगा। क्लाउड स्टोरेज और इंटरनेट की कोई राष्ट्रीयता (Nationality) नहीं होगी।


लेकिन, गौतम अदाणी ने बहुत ही बेबाकी से कहा कि "अब यह साफ हो गया है कि ये सारी धारणाएं पूरी तरह से गलत थीं।" उन्होंने कहा कि आज जो नई दुनिया हमारे सामने उभर कर आ रही है, वह 'फ्लैट' नहीं बल्कि 'फ्रैक्चर्ड' (Fractured) यानी कई हिस्सों में बंटी हुई है। आज हर देश सबसे पहले अपनी सुरक्षा और अपने फायदों के बारे में सोच रहा है।


मिडिल ईस्ट का संकट और इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले


अदाणी ने मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष और वहां के इंफ्रास्ट्रक्चर (बुनियादी ढांचे) पर हुए टार्गेटेड हमलों का खास तौर पर जिक्र किया। मिडिल ईस्ट पूरी दुनिया को तेल और गैस की सप्लाई करने वाला सबसे बड़ा केंद्र है। वहां जब भी कोई मिसाइल गिरती है या किसी पाइपलाइन पर हमला होता है, तो उसका सीधा असर दुनिया के हर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।


इन हमलों ने एक बात बिल्कुल शीशे की तरह साफ कर दी है। अदाणी के शब्दों में कहें तो, "एनर्जी सिक्योरिटी (ऊर्जा सुरक्षा) और डिजिटल सिक्योरिटी (डिजिटल सुरक्षा) अब अलग-अलग विषय नहीं रह गए हैं। अब यही दोनों मिलकर किसी भी देश की ताकत की दो सबसे अहम नींव बन चुके हैं।"


इसका सीधा सा मतलब यह है कि अगर किसी देश के पास मजबूत सेना है, लेकिन उसकी एनर्जी सप्लाई किसी दूसरे देश पर निर्भर है, या उसका डेटा किसी विदेशी सर्वर पर है, तो वह देश कभी भी सुरक्षित नहीं हो सकता।


सप्लाई चेन और नेशनल सिक्योरिटी का नया रिश्ता


आज के दौर में हम जो भी सामान इस्तेमाल करते हैं, चाहे वह मोबाइल फोन हो, दवाइयां हों या गाड़ियां, वे कई देशों से होकर हमारे पास पहुंचते हैं। इसे सप्लाई चेन कहते हैं। गौतम अदाणी ने समिट में बताया कि अब सप्लाई चेन सिर्फ व्यापार का हिस्सा नहीं रही। अब सप्लाई चेन को 'नेशनल सिक्योरिटी' (राष्ट्रीय सुरक्षा) को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है।


कोरोना महामारी और उसके बाद हुए कई वैश्विक युद्धों ने देशों को सिखा दिया है कि अगर वे जरूरत के सामान के लिए किसी एक देश (जैसे चीन) पर निर्भर रहेंगे, तो संकट के समय उन्हें भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। इसलिए अब हर देश कोशिश कर रहा है कि वह अपनी सप्लाई चेन को सुरक्षित करे और अपने मित्र देशों के साथ ही व्यापार को बढ़ावा दे।


सेमीकंडक्टर और डेटा: अब सिर्फ तकनीक नहीं, बल्कि ‘ब्रह्मास्त्र' हैं


CII Summit 2026 में गौतम अदाणी ने टेक्नोलॉजी को लेकर जो नजरिया पेश किया, वह बेहद दिलचस्प है। उन्होंने कहा कि, "सेमीकंडक्टर अब केवल एक टेक्नोलॉजी नहीं है, बल्कि यह एक स्ट्रैटजिक पावर (रणनीतिक ताकत) बन चुका है।"


आज सुई से लेकर हवाई जहाज तक, हर चीज में सेमीकंडक्टर चिप लगती है। जिस देश का सेमीकंडक्टर निर्माण पर कब्जा होगा, आने वाले समय में वही देश दुनिया पर राज करेगा।


इसके साथ ही अदाणी ने डेटा' (Data) को लेकर एक बड़ी बात कही। उन्होंने कहा कि डेटा अब नेशनल रिसोर्स है: आज डेटा को किसी भी देश के प्राकृतिक संसाधन (जैसे कोयला, पानी, तेल) की तरह देखा जा रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सुरक्षा: AI का विकास अब खुली दुनिया में नहीं हो रहा है। इसे सुरक्षित डेटा सेंटर्स की ऊंची दीवारों के पीछे, बेहद कड़ी सुरक्षा के बीच विकसित किया जा रहा है, ताकि कोई दूसरा देश इसका गलत फायदा न उठा सके।


भारत@100 विजन: 2047 के लिए हमारी तैयारी


गौतम अदाणी का यह संबोधन सिर्फ समस्याओं को गिनवाने के लिए नहीं था, बल्कि यह भारत के भविष्य की दिशा तय करने वाला था। समिट में भारत@100 (India@100) विजन पर भी खास चर्चा हुई। साल 2047 में जब भारत अपनी आजादी के 100 साल पूरे करेगा, तब हमारा देश कैसा होगा? यह इस बात पर निर्भर करेगा कि आज हम अपनी एनर्जी और डिजिटल सुरक्षा को लेकर कितने गंभीर हैं।


भारत आज तेजी से सोलर पावर, ग्रीन हाइड्रोजन और रिन्यूएबल एनर्जी (अक्षय ऊर्जा) की तरफ बढ़ रहा है, ताकि हम कच्चे तेल के लिए मिडिल ईस्ट या किसी अन्य देश पर निर्भर न रहें। वहीं दूसरी तरफ, देश में डेटा लोकलाइजेशन (डेटा को देश के भीतर ही सुरक्षित रखना) और सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाने पर जोर दिया जा रहा है।


CII Annual Business Summit 2026 में गौतम अदाणी के इस भाषण ने यह पूरी तरह साफ कर दिया है कि दुनिया के नियम बदल चुके हैं। ग्लोबलाइजेशन (वैश्वीकरण) का वह दौर अब खत्म हो रहा है जहां सब कुछ सबके लिए खुला था। आज हम एक ‘प्रोटेक्टिव' (संरक्षणात्मक) दुनिया में जी रहे हैं।


मिडिल ईस्ट का संकट हमें यह चेतावनी दे रहा है कि युद्ध अब सिर्फ मैदानों में नहीं लड़े जाएंगे, बल्कि साइबर स्पेस और एनर्जी ग्रिड पर भी लड़े जाएंगे। ऐसे में भारत के लिए गौतम अदाणी का यह संदेश एक स्पष्ट रोडमैप है अगर भारत को दुनिया की सबसे बड़ी महाशक्ति बनना है, तो हमें अपनी ऊर्जा (Energy) और अपने डेटा (Digital Security) को हर हाल में सुरक्षित करना होगा। यही दो चीजें आने वाले कल में भारत की सबसे बड़ी ढाल और सबसे बड़ा हथियार बनेंगी।


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