India GDP Growth: पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) के तनाव का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा है। UN ने 2026 के लिए भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान 6.6% से घटाकर 6.4% कर दिया है। कच्चे तेल के महंगे आयात से महंगाई बढ़ने का खतरा है। हालांकि, भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बना रहेगा। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
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| Middle East Crisis, Indian Economy 2026 |
नई दिल्ली, 21 मई: पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में चल रहे युद्ध और तनाव का असर अब दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं पर दिखने लगा है। भारत भी इस झटके से अछूता नहीं है। संयुक्त राष्ट्र (UN) ने 2026 के लिए भारत की आर्थिक विकास दर (GDP Growth) का अनुमान घटा दिया है।
UN के आर्थिक और सामाजिक मामलों के विभाग (UN DESA) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 में भारत की GDP ग्रोथ 6.4 प्रतिशत रहने की उम्मीद है, जो पहले 6.6 प्रतिशत आंकी गई थी। हालांकि, अच्छी खबर यह है कि इस गिरावट के बावजूद भारत दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेजी से आगे बढ़ने वाला देश बना रहेगा।
आंकड़ों में समझें भारत की ग्रोथ का पूरा गणित
UN DESA की रिपोर्ट के अनुसार भारत के विकास दर के आंकड़े कुछ इस तरह रहेंगे:
- 2025 का अनुमान: 7.5 प्रतिशत
- 2026 का नया अनुमान: 6.4 प्रतिशत (पहले यह 6.6 प्रतिशत था)
- 2027 का अनुमान: 6.6 प्रतिशत
अनुमान क्यों घटाया गया? ऊर्जा आयात है बड़ी वजह
आखिर भारत की ग्रोथ का अनुमान क्यों कम किया गया? इसका सीधा सा जवाब है- कच्चा तेल और महंगाई। UN DESA के वरिष्ठ अर्थशास्त्री इंगो पिटरले ने बताया कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को गहरा झटका दिया है।
भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल (एनर्जी) विदेशों से खरीदता है। युद्ध के कारण ऊर्जा आयात की लागत बढ़ रही है। इसके अलावा, खाड़ी देशों में काम करने वाले भारतीयों द्वारा भेजे जाने वाले पैसे (रेमिटेंस) पर भी इस संकट का असर पड़ सकता है। इन सब वजहों से महंगाई बढ़ती है और रिजर्व बैंक (RBI) जैसी संस्थाओं के लिए नीतियां बनाना मुश्किल हो जाता है।
दुनिया भर की अर्थव्यवस्था पर भी ब्रेक
केवल भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया इस संकट की मार झेल रही है। रिपोर्ट में 2026 के लिए वैश्विक (Global) GDP ग्रोथ का अनुमान भी 0.2 प्रतिशत घटाकर अब 2.5 प्रतिशत कर दिया गया है।
UN DESA के निदेशक शांतनु मुखर्जी ने एक अहम बात कही। उन्होंने बताया कि जो देश निर्यात (Exports) पर निर्भर हैं, उन्हें यह ध्यान रखना होगा कि जब आयात (Import) महंगा होता है, तो उसका सीधा असर निर्यात पर भी पड़ता है।
फिर भी सबसे तेज दौड़ेगी भारतीय अर्थव्यवस्था
तमाम वैश्विक चुनौतियों और अनुमान घटने के बाद भी घबराने की जरूरत नहीं है। इंगो पिटरले ने साफ किया कि भारत की अर्थव्यवस्था की नींव बहुत मजबूत है। इसके तीन मुख्य कारण हैं:
- देश के भीतर ग्राहकों की मजबूत मांग (Consumer Demand)।
- सरकार द्वारा बुनियादी ढांचे पर किया जा रहा भारी निवेश (Public Investment)।
- सर्विस सेक्टर और निर्यात का शानदार प्रदर्शन।
कुल मिलाकर, भले ही बाहर चल रहे युद्धों के कारण कच्चे तेल की कीमतें भारत की रफ्तार को थोड़ा धीमा कर रही हों, लेकिन देश की घरेलू ताकत इतनी मजबूत है कि भारत 2026 में भी दुनिया के बड़े देशों को आर्थिक तरक्की के मामले में पीछे छोड़ता रहेगा।

