नीदरलैंड में पीएम मोदी का बड़ा दांव: सेमीकंडक्टर, ग्रीन एनर्जी और डिफेंस समेत 17 ऐतिहासिक समझौतों पर मुहर

Keyur Raval

PM Modi Netherlands visit 2026: पीएम मोदी की नीदरलैंड यात्रा 2026 में सेमीकंडक्टर, ग्रीन एनर्जी और रक्षा सहित 17 अहम समझौते हुए। टाटा और ASML की डील से भारत बनेगा टेक हब। पढ़ें पूरी खबर।


PM Modi Netherlands visit 2026
PM Modi Netherlands visit 2026


नई दिल्ली, 18 मई: भारत और नीदरलैंड के रिश्ते अब एक नई ऊंचाई पर पहुंच गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दो दिवसीय नीदरलैंड यात्रा दोनों देशों के लिए बेहद शानदार साबित हुई है। इस दौरे पर दोनों देशों ने अपनी दोस्ती को 'रणनीतिक साझेदारी' में बदलते हुए कुल 17 अहम समझौतों पर साइन किए हैं।


इन समझौतों में सेमीकंडक्टर, ग्रीन एनर्जी, रक्षा, कृषि और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे भविष्य के सबसे जरूरी सेक्टर शामिल हैं। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि पीएम मोदी के इस दौरे से भारत को क्या-क्या बड़े फायदे होने वाले हैं।


सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में भारत की बड़ी छलांग


इस यात्रा की सबसे बड़ी हाइलाइट सेमीकंडक्टर डील रही। गुजरात के धोलेरा में बनने वाले भारत के पहले हाई-टेक सेमीकंडक्टर फैब के लिए टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और डच कंपनी ASML के बीच एक बड़ा समझौता हुआ है।


ASML दुनिया भर में चिप बनाने वाली मशीनों (लिथोग्राफी उपकरण) की सबसे बड़ी सप्लायर है। पीएम मोदी और नीदरलैंड के पीएम रॉब जेटेन ने इस साझेदारी का जोरदार स्वागत किया। इसके अलावा, भारत के 6 प्रमुख संस्थानों (जैसे IISc और IITs) और नीदरलैंड की बड़ी यूनिवर्सिटीज के बीच भी 'ब्रेन ब्रिज' एग्रीमेंट हुआ है। इससे भारतीय युवाओं को चिप डिजाइनिंग की वर्ल्ड-क्लास ट्रेनिंग मिलेगी।


व्यापार और निवेश: 2026 के नए आंकड़े


साल 2026 के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, नीदरलैंड यूरोप में भारत के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में से एक है। दोनों देशों के बीच कुल व्यापार 27.8 अरब डॉलर का हो चुका है। 55.6 अरब डॉलर के विदेशी निवेश (FDI) के साथ नीदरलैंड भारत में पैसा लगाने वाला चौथा सबसे बड़ा देश बन गया है। डच कंपनियों के लिए भारत एक बहुत बड़ा बाजार है, वहीं भारतीय कंपनियों के लिए नीदरलैंड का रॉटरडैम बंदरगाह पूरे यूरोप में एंट्री करने का सबसे शानदार रास्ता है।


ग्रीन एनर्जी और पानी पर भी फोकस


पर्यावरण और साफ ऊर्जा को लेकर भी दोनों देश साथ आए हैं। दोनों नेताओं ने ग्रीन हाइड्रोजन के विकास के लिए एक खास रोडमैप लॉन्च किया है। पानी की समस्या से निपटने के लिए गुजरात के कल्पसर प्रोजेक्ट में नीदरलैंड अपनी खास तकनीक से भारत की मदद करेगा। साथ ही, बेंगलुरु में डेयरी ट्रेनिंग और त्रिपुरा में फूलों की खेती (Floriculture) के लिए 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' बनाए जाएंगे।


ग्लोबल मुद्दे और डिफेंस डील


पीएम मोदी और पीएम जेटेन ने दुनिया भर में चल रहे तनाव, जैसे रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया के हालात पर भी गहरी चर्चा की। दोनों ने 'हिंद-प्रशांत क्षेत्र' (Indo-Pacific) को पूरी तरह से स्वतंत्र और शांतिपूर्ण रखने पर जोर दिया। रक्षा के क्षेत्र में भी दोनों देशों की सेनाओं और कंपनियों के बीच तकनीक साझा करने का फैसला लिया गया है।


चोल काल की धरोहर लौटी


इस दौरे पर एक भावुक और सांस्कृतिक पल भी आया, जब नीदरलैंड की लीडेन यूनिवर्सिटी ने भारत से चुराई गई 'चोल काल' की तांबे की प्लेटें भारतीय अधिकारियों को वापस सौंप दीं।


विवादित सवाल पर भारत का करारा जवाब


दौरे के अंत में जब नीदरलैंड के कुछ पत्रकारों ने अल्पसंख्यक अधिकारों और प्रेस की आजादी को लेकर डच पीएम के कथित बयानों पर सवाल पूछा, तो भारतीय विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने बड़ी ही शालीनता से जवाब दिया। उन्होंने साफ कहा कि ऐसे सवाल पूछने वाले व्यक्ति को विषय की गहरी समझ ही नहीं है।


नीदरलैंड में 16 टॉप डच सीईओ के साथ शानदार मीटिंग करने के बाद, पीएम मोदी अपने अगले पड़ाव स्वीडन के गोथनबर्ग पहुंच गए हैं, जहां वे यूरोपीय उद्योग जगत के दिग्गजों को संबोधित करेंगे।

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