शेयर बाजार में हाहाकार! मई में FPI ने निकाले ₹27,000 करोड़, जानें 2026 में क्यों लगातार शेयर बेच रहे हैं विदेशी निवेशक?

Keyur Raval

 FPI selling in India: मई में FPI ने भारतीय शेयर बाजार से 27,000 करोड़ रुपये निकाले हैं। 2026 में विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और गिरते रुपये का क्या है कारण? पढ़ें पूरी रिपोर्ट।


FPI selling in India
FPI selling in India


नई दिल्ली, 17 मई: भारतीय शेयर बाजार (Indian Stock Market) में विदेशी निवेशकों की बिकवाली रुकने का नाम नहीं ले रही है। ग्लोबल टेंशन और अनिश्चितता के बीच मई महीने में अब तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने बाजार से 27,048 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए हैं। साल 2026 का यह ट्रेंड आम निवेशकों के साथ-साथ पूरी भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय बन गया है।


NSDL के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 2026 में अब तक FPI भारतीय बाजार से कुल 2.2 लाख करोड़ रुपये की भारी-भरकम निकासी कर चुके हैं। अगर इसकी तुलना पिछले साल से करें, तो 2025 में उन्होंने पूरे साल में 1.66 लाख करोड़ रुपये निकाले थे। यानी इस साल विदेशी निवेशकों के शेयर बेचने की रफ्तार कहीं ज्यादा तेज है।


महीने दर महीने कैसा रहा विदेशी निवेश का हाल?


इस साल विदेशी निवेशक सिर्फ फरवरी के महीने में ही खरीदार (Buyer) बने थे, बाकी हर महीने उन्होंने जमकर अपना पैसा निकाला है:


जनवरी: 35,962 करोड़ रुपये निकाले।


फरवरी: 22,615 करोड़ रुपये का निवेश किया (यह पिछले 17 महीनों का सबसे बड़ा निवेश था)।


मार्च: माहौल फिर बदला और रिकॉर्ड 1.17 लाख करोड़ रुपये की निकासी हुई।


अप्रैल: बिकवाली जारी रही, 60,847 करोड़ रुपये बाहर गए।


मई: अब तक 27,048 करोड़ रुपये की सेलिंग हो चुकी है।


आखिर क्यों बाजार से पैसा निकाल रहे हैं विदेशी निवेशक?


मॉर्निंगस्टार इनवेस्टमेंट रिसर्च इंडिया के एक्सपर्ट हिमांशु श्रीवास्तव के अनुसार, विदेशी निवेशकों के डरने और पैसा निकालने के पीछे कई बड़े कारण हैं:


ग्लोबल टेंशन: दुनिया भर में आर्थिक मंदी का डर और कई देशों के बीच चल रहा भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tension)।


अमेरिका में ज्यादा मुनाफा: अमेरिकी डॉलर का मजबूत होना और वहां की बॉन्ड यील्ड का काफी ऊंचे स्तर पर रहना। इस वजह से विदेशी निवेशक भारत जैसे उभरते बाजारों से पैसा निकालकर अमेरिका में सुरक्षित निवेश कर रहे हैं।


महंगाई और अनिश्चितता: वैश्विक महंगाई और अमेरिका समेत बड़े केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों में कटौती को लेकर कोई साफ तस्वीर न होना।


भारतीय रुपये पर मंडरा रहा है बड़ा खतरा


जियोजीत इनवेस्टमेंट्स के चीफ इनवेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वी के विजयकुमार का कहना है कि FPI की लगातार बिकवाली और देश के चालू खाते का घाटा (CAD) बढ़ने से भारतीय रुपये की कमर टूट रही है।


साल की शुरुआत में रुपया डॉलर के मुकाबले 90 के लेवल पर था, जो 15 मई तक बुरी तरह गिरकर 96.14 प्रति डॉलर पर आ गया है।

ब्रेंट क्रूड ऑयल (कच्चा तेल) की कीमतें भी 109.26 डॉलर प्रति बैरल के खतरनाक स्तर पर पहुंच गई हैं।


अगर विदेशी निवेशकों की यह बिकवाली ऐसे ही जारी रहती है और कच्चे तेल के दाम कम नहीं होते हैं, तो आने वाले दिनों में भारतीय रुपये में और भी ज्यादा कमजोरी देखने को मिल सकती है। जब तक ग्लोबल मार्केट में हालात स्थिर नहीं होते, शेयर बाजार में उठापटक जारी रहने की पूरी उम्मीद है।


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डिस्क्लेमर: यहां पर दिए गए विचार और इन्वेस्टमेंट सलाह इन्वेस्टमेंट प्रोफेशनल्स के अपने विचार और सलाह हैं। MoneysutraHub.in यूज़र्स को सलाह देता है कि कोई भी इन्वेस्टमेंट का फैसला लेने से पहले किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह लें।

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