Share Market News: सेंसेक्स-निफ्टी में कब लौटेगी 'तूफानी तेजी'? मोतीलाल ओसवाल की रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा

Keyur Raval

Motilal Oswal Report: भारतीय शेयर बाजार में तूफानी तेजी कब आएगी? मोतीलाल ओसवाल की रिपोर्ट के अनुसार, निफ्टी-सेंसेक्स में बंपर उछाल के लिए मजबूत अर्निंग्स और विदेशी निवेश जरूरी है। 


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मुंबई, 9 मई: भारतीय शेयर बाजार में पैसा लगाने वाले करोड़ों निवेशकों के मन में आजकल एक ही सवाल है- "आखिर मार्केट में दोबारा वो तूफानी तेजी कब आएगी?" एक तरफ जहां दुनिया भर के शेयर बाजार अपने ऐतिहासिक उच्चतम स्तर (All-Time High) को छू रहे हैं, वहीं हमारा अपना सेंसेक्स और निफ्टी 50 एक दायरे में फंसा हुआ नजर आ रहा है।


अगर आप भी बाजार की इस सुस्त चाल से परेशान हैं, तो देश की जानी-मानी ब्रोकरेज फर्म 'मोतीलाल ओसवाल' (Motilal Oswal) की एक ताजा रिपोर्ट आपके कई सवालों के जवाब दे सकती है। इस रिपोर्ट में विस्तार से बताया गया है कि भारतीय बाजार दुनिया से पीछे क्यों चल रहा है और वो कौन से कारण हैं जो आने वाले समय में मार्केट में एक भयंकर तेजी ला सकते हैं। आइए, इसे बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं।


दुनिया के बाजार भाग रहे हैं, पर हम क्यों रुके हैं?


अप्रैल के महीने में शेयर बाजार के आंकड़ों ने सबको चौंका दिया। दुनिया के कई देशों के शेयर बाजारों में गजब की रिकवरी देखने को मिली। कुछ देशों के बाजार तो अपने ऑल-टाइम हाई पर पहुंच गए। मध्यपूर्व (Middle East) में चल रहे तनाव और लड़ाई से पहले मार्केट जिस लेवल पर था, अप्रैल में वहां के बाजारों में 30 से लेकर 150 फीसदी तक की बंपर तेजी दर्ज की गई।


लेकिन, जब हम भारतीय शेयर बाजार की तरफ देखते हैं, तो तस्वीर थोड़ी अलग नजर आती है। भारतीय मार्केट ज्यादातर समय लड़ाई के पहले वाले अपने स्तर से नीचे ही संघर्ष करता रहा। यह बात शेयर बाजार के जानकारों को काफी हैरान कर रही है। ऐसा इसलिए, क्योंकि आम तौर पर जब दुनिया भर के उभरते बाजारों (Emerging Markets) में तेजी आती है, तो भारत का प्रदर्शन हमेशा सबसे आगे और शानदार रहता है। इस बार कहानी थोड़ी उल्टी पड़ गई है।


निफ्टी 50 अपने रिकॉर्ड हाई से 8 फीसदी नीचे


आपको याद होगा कि अमेरिका और ईरान के बीच जब तनाव शुरू हुआ था, तो मार्च के महीने में भारतीय शेयर बाजार में एक बड़ी गिरावट देखने को मिली थी। हालांकि, अप्रैल आते-आते मार्केट ने खुद को संभालने की कोशिश की और एक अच्छी रिकवरी दिखाई। लेकिन क्या यह रिकवरी काफी है? जवाब है- नहीं।


ताजा आंकड़ों के मुताबिक, निफ्टी 50 अभी भी सितंबर 2024 में बनाए गए अपने रिकॉर्ड हाई से करीब 8 फीसदी नीचे ट्रेड कर रहा है। बाजार की इस सुस्ती के पीछे कोई एक कारण नहीं है। बीते डेढ़ साल का इतिहास देखें तो रूस और यूक्रेन के बीच चल रही लंबी लड़ाई, भारतीय कंपनियों की कमाई (Earnings) में सुस्ती और अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ जैसी कई बड़ी घटनाओं ने भारतीय शेयर बाजार पर बहुत ही निगेटिव असर डाला है। यही वजह है कि पिछले कुछ समय से भारतीय शेयर बाजार और दुनिया के बाकी बाजारों की चाल में एक बहुत बड़ा अंतर साफ दिखाई दे रहा है।


बाजार में तेजी के लिए कंपनियों की कमाई बढ़ना है सबसे जरूरी


अब सवाल उठता है कि यह सुस्ती टूटेगी कैसे? मोतीलाल ओसवाल सर्विसेज की रिपोर्ट इस पर सीधा जवाब देती है। रिपोर्ट के अनुसार, अगर भारतीय शेयर बाजार में एक बड़ी और लंबी तेजी लानी है, तो भारतीय कंपनियों की 'अर्निंग्स ग्रोथ' (Earnings Growth) यानी उनकी कमाई का बढ़ना बहुत ज्यादा जरूरी है।


शेयर बाजार में कंपनियों के प्रदर्शन को ‘अर्निंग्स प्रति शेयर' (EPS) से मापा जाता है। अगर हम आज दुनिया के दूसरे देशों को देखें, तो वहां ईपीएस (EPS) की ग्रोथ 20 से 40 फीसदी के बीच चल रही है। वहीं, भारत में यह ग्रोथ अभी सिर्फ 18 फीसदी पर अटकी हुई है।


भविष्य के अनुमान की बात करें तो अगले एक साल में भारत की फॉरवर्ड अर्निंग्स ग्रोथ 18 फीसदी रहने का अनुमान लगाया गया है। इसके मुकाबले दूसरे देशों के आंकड़े डराने वाले हैं:


अमेरिका: 23 फीसदी की ग्रोथ का अनुमान।


चीन: 29 फीसदी की ग्रोथ का अनुमान।


उभरते देश (MSCI EM Index): 51 फीसदी की बंपर ग्रोथ का अनुमान।


यही वो गैप है, जिसे भारत को जल्द से जल्द भरना होगा। जब तक हमारी कंपनियों का मुनाफा तेजी से नहीं बढ़ेगा, तब तक शेयर बाजार में कोई जादुई तेजी आना मुश्किल है।


विदेशी निवेशक (FIIs) क्यों बेच रहे हैं भारतीय शेयर?


किसी भी देश के शेयर बाजार को नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए विदेशी निवेशकों (FIIs) का पैसा बहुत मायने रखता है। लेकिन फिलहाल विदेशी फंड्स भारत से अपना पैसा निकाल कर बेच रहे हैं (बिकवाली कर रहे हैं)। आखिर क्यों?


इसका सबसे बड़ा कारण है- 'ज्यादा वैल्यूएशन'। आसान शब्दों में कहें तो विदेशी निवेशकों को लग रहा है कि भारतीय शेयर अभी बहुत महंगे मिल रहे हैं। मोतीलाल ओसवाल की रिपोर्ट बताती है कि अभी भारतीय बाजार का वैल्यूएशन 19.5 गुना (PE Ratio) है। अगर इसकी तुलना हम दुनिया के बाकी उभरते बाजारों से करें, तो यह काफी ज्यादा है।


विदेशी निवेशकों का सीधा गणित होता है- जहां शेयर सस्ते मिलें और कंपनियों की कमाई तेजी से बढ़ रही हो, वहां पैसा लगाओ। चूंकि भारत में फिलहाल शेयर महंगे हैं और कमाई उस रफ्तार से नहीं बढ़ रही है, इसलिए विदेशी निवेशक पैसा निकालने में लगे हैं। बाजार में बड़ी तेजी तभी आएगी जब कंपनियों की अर्निंग्स में लगातार उछाल आएगा, जिससे शेयर सस्ते और आकर्षक लगने लगेंगे।


भारत में AI कंपनियों का ना होना पड़ रहा है भारी


रिपोर्ट में एक बहुत ही दिलचस्प और आधुनिक कारण का भी जिक्र किया गया है। पिछले कुछ महीनों में अमेरिका और दुनिया के अन्य बाजारों में जो तूफानी तेजी आई है, उसके पीछे 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' (AI) बनाने वाली कंपनियों का सबसे बड़ा हाथ है।


ग्लोबल मार्केट में AI से जुड़ी कंपनियों के शेयरों ने छप्पर फाड़ रिटर्न दिया है। लेकिन, दुर्भाग्य से भारत इस मामले में लगातार पिछड़ रहा है। हमारे शेयर बाजार में ऐसी कोई भी बड़ी AI कंपनी मौजूद नहीं है जो ग्लोबल स्तर पर टक्कर ले सके। AI कंपनियों की इस गैर-मौजूदगी का सीधा नुकसान हमारे शेयर बाजार की ग्रोथ को हो रहा है, क्योंकि दुनिया भर का पैसा अभी AI थीम पर दांव लगा रहा है।


लोकल निवेशकों (DIIs) ने बचाई है बाजार की लाज


इस पूरी तस्वीर में एक बहुत अच्छी बात भी है। वो ये कि हमारे अपने घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) यानी म्यूचुअल फंड और लोकल निवेशकों ने बाजार को गिरने से बचा रखा है। घरेलू निवेशक भारतीय बाजार में लगातार और जमकर पैसा निवेश कर रहे हैं। अगर लोकल निवेशकों का यह सपोर्ट न होता, तो विदेशी बिकवाली के कारण हमारा बाजार बहुत ज्यादा टूट चुका होता।


मोतीलाल ओसवाल की रिपोर्ट का साफ और सीधा संदेश यही है कि घरेलू निवेशकों ने बाजार को गिरने से तो बचा लिया है, लेकिन इसे ऊपर ले जाने के लिए विदेशी फंडों (FIIs) की वापसी बेहद जरूरी है। विदेशी निवेशक अपना पैसा तभी वापस लाएंगे जब भारतीय कंपनियों के मुनाफे (Earnings Growth) में शानदार बढ़ोतरी होगी और मार्केट का वैल्यूएशन थोड़ा सस्ता होगा। जिस दिन कंपनियों के तिमाही नतीजे जबरदस्त आने शुरू हो जाएंगे, उसी दिन से सेंसेक्स और निफ्टी में फिर से वो 'तूफानी तेजी' लौट आएगी, जिसका हम सबको बेसब्री से इंतजार है।


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