अमेरिका में दिखा भारतीय आम का जलवा! एक आम के लिए 466 रुपये देने को तैयार अमेरिकी, 20 मिनट में खाली हो रहा पूरा स्टोर

VANDANADEVI PANDEY

 Indian Mangoes in US: अमेरिका में भारतीय आम की भारी डिमांड है। लोग 10-12 आमों के बॉक्स के लिए 5600 रुपये तक दे रहे हैं। जानें क्यों एक आम की कीमत 466 रुपये तक पहुंच गई है।


Indian Mangoes in US
Indian Mangoes in US


नई दिल्ली, 8 मई: फलों का राजा आम इन दिनों अमेरिका में जमकर सुर्खियां बटोर रहा है। गर्मियों का मौसम आते ही अमेरिका में रहने वाले भारतीयों और वहां के स्थानीय नागरिकों के बीच भारतीय आमों को लेकर एक गजब की दीवानगी देखने को मिल रही है। आलम यह है कि लोग आमों की खेप लेकर आने वाली उड़ानों (Flights) को ऑनलाइन ट्रैक कर रहे हैं। इस साल अमेरिका में भारतीय आम की कीमत काफी बढ़ गई है। एक आम के लिए लोग लगभग 466 रुपये चुकाने को तैयार हैं। 10 से 12 आमों का एक छोटा बॉक्स 5600 रुपये में बिक रहा है। महाराष्ट्र का हापुस (अल्फोंसो), गुजरात का केसर और उत्तर भारत के लंगड़ा आम की मांग सबसे ज्यादा है। दशकों तक अमेरिका में बैन रहने के बाद, साल 2007 में भारतीय आमों ने अमेरिकी बाजार में कदम रखा था, और आज यह वहां सबसे ज्यादा पसंद किया जाने वाला फल बन चुका है।


गर्मियों का मौसम हो और आम की बात न हो, ऐसा तो हो ही नहीं सकता। भारत में तो गर्मियां आते ही बाजारों में आम की खुशबू महकने लगती है। ठेलों से लेकर बड़ी-बड़ी दुकानों तक, हर जगह लोगों की भीड़ इस ‘फलों के राजा' को खरीदने के लिए टूट पड़ती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारतीय आमों का जादू सिर्फ हमारे देश तक ही सीमित नहीं है? जी हां, इस वक्त अमेरिका में भी भारतीय आमों ने अपना जबरदस्त जलवा बिखेर रखा है।


अमेरिका में भारतीय आमों को लेकर ऐसी दीवानगी छाई हुई है, जिसके बारे में जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे। लोग ताजे आम खरीदने के लिए सिर्फ दुकानों पर ही नहीं जा रहे, बल्कि आमों की डिलीवरी करने वाली फ्लाइट्स को भी रडार पर ट्रैक कर रहे हैं। आइए आपको इस पूरी खबर की विस्तार से जानकारी देते हैं।


कीमत जानकर उड़ जाएंगे आपके होश


भारत में जो आम हम और आप बड़ी आसानी से खरीद लेते हैं, अमेरिका में उसकी कीमत आसमान छू रही है। हाल ही में सामने आई एक रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल में आमों की पहली खेप अमेरिका पहुंचने से पहले ही सारे प्री-ऑर्डर (Pre-orders) बिक चुके थे।


अगर हम कीमत की बात करें, तो अमेरिका में लोग 10 से 12 आमों के एक छोटे बॉक्स के लिए 5600 रुपये तक खर्च करने को खुशी-खुशी तैयार हैं। जरा हिसाब लगाइए, इसका मतलब है कि वहां एक आम की कीमत लगभग 466 रुपये पड़ रही है। इतनी भारी कीमत होने के बावजूद लोगों में इसे खरीदने की होड़ मची हुई है।


पिछले साल से 33 प्रतिशत तक महंगे हुए आम


अगर हम पिछले साल यानी 2023 की बात करें, तो यही 10-12 आमों का बॉक्स अमेरिका में लगभग 3700 से 4200 रुपये में मिल जाता था। लेकिन इस साल कीमतों में 33 प्रतिशत तक का भारी उछाल आया है।


इस महंगाई के पीछे के मुख्य कारण ये हैं:


ईरान का युद्ध: ईरान और इजरायल के बीच चल रहे तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है।


शिपमेंट का महंगा होना: ईंधन महंगा होने के कारण कार्गो और शिपमेंट का किराया काफी ज्यादा बढ़ गया है।


सीमित सप्लाई: भारत से निर्यात की जाने वाली आमों की मात्रा मांग के मुकाबले काफी कम है।


स्टोर में आते ही 20 मिनट में खाली हो जाती हैं पेटियां


अमेरिका में भारतीय आमों का क्रेज किस कदर सिर चढ़कर बोल रहा है, इसका अंदाजा सोशल मीडिया पर वायरल हो रही एक पोस्ट से लगाया जा सकता है। इस पोस्ट में दावा किया गया है कि अमेरिका के एक स्टोर में शाम 4:56 बजे भारतीय आमों की पेटियां पहुंची थीं। लेकिन सिर्फ 20 मिनट के भीतर, यानी शाम 5:16 बजे तक सारा स्टॉक खत्म हो गया! सारी पेटियां खाली हो गईं।


वहां रहने वाले लोग मजाक में कहते हैं कि आजकल अमेरिका में अच्छा और ताजा भारतीय आम मिल जाना किसी खजाना मिलने से कम नहीं है। विदेशी और वहां बसे भारतीय लोग (NRI) दुकानों के बाहर घंटों पहले से इंतजार करते देखे जा रहे हैं। कई लोगों ने तो एडवांस बुकिंग करवा रखी है ताकि उन्हें खाली हाथ न लौटना पड़े।


किन भारतीय आमों की है सबसे ज्यादा डिमांड?


अमेरिका में भारतीय आमों को उनके अनोखे स्वाद, जबरदस्त मिठास और खुशबू के लिए जाना जाता है। वहां के लोग मानते हैं कि दुनिया के किसी भी दूसरे देश का आम भारतीय आमों का मुकाबला नहीं कर सकता। वहां मुख्य रूप से इन आमों की धूम है:


महाराष्ट्र का हापुस (Alphonso): अपनी प्रीमियम क्वालिटी, गाढ़े गूदे और बेहतरीन खुशबू के लिए यह सबसे ज्यादा डिमांड में रहता है।


गुजरात का केसर: इस आम का स्वाद बहुत ही रिच और रसदार होता है, जिसे लोग डेजर्ट की तरह खाना पसंद करते हैं।


उत्तर भारत का चौसा और लंगड़ा: अपने देसी स्वाद और ज्यादा रस के कारण ये आम भी वहां खूब बिक रहे हैं।


दक्षिण भारत का बंगनपल्ली: आकार में बड़ा और स्वाद में मीठा होने के कारण अमेरिकी इसे भी काफी पसंद कर रहे हैं।


दशकों तक लगा था बैन, जानें कैसे मिली एंट्री


आपको जानकर हैरानी होगी कि भारत भले ही दुनिया का आधा आम पैदा करता हो, लेकिन दशकों तक अमेरिका में भारतीय आमों की एंट्री पर पूरी तरह से बैन लगा हुआ था।


क्या था बैन का कारण?


दरअसल, अमेरिका की कृषि नीतियां बहुत सख्त हैं। पहले भारत 'हॉट-वॉटर ट्रीटमेंट' (यानी गर्म पानी से आम के कीड़े मारना) का इस्तेमाल करता था। लेकिन इससे आम जल्दी खराब हो जाते थे। इसके अलावा, अमेरिका में दक्षिण अमेरिकी देशों (जैसे मेक्सिको) की लॉबी का भारी दबाव था, जो नहीं चाहते थे कि भारतीय आम वहां के बाजार पर कब्जा करें।


कैसे खत्म हुआ प्रतिबंध?


इस समस्या का समाधान 'गामा रेडिएशन' (Gamma Radiation) तकनीक से निकला। इस तकनीक में बिना आम को नुकसान पहुंचाए किरणों के जरिए उसे पूरी तरह से कीटाणु मुक्त कर दिया जाता है।


साल 2006 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश और भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के बीच एक ऐतिहासिक समझौता हुआ।


इसी समझौते के तहत साल 2007 में भारतीय आमों से प्रतिबंध हटा और वह आधिकारिक तौर पर अमेरिकी बाजार में शान से पहुंचे।


भारत का आम दुनिया में क्यों है खास?


अगर हम आंकड़ों पर नजर डालें, तो भारत हर साल लगभग 2 करोड़ मीट्रिक टन आम का उत्पादन करता है। दिलचस्प बात यह है कि पूरी दुनिया में जितना भी आम पैदा होता है, उसका लगभग आधा (50 प्रतिशत) हिस्सा अकेले भारत उगाता है।


लेकिन, भारत के लोग खुद आम के इतने बड़े दीवाने हैं कि इस 2 करोड़ मीट्रिक टन पैदावार का ज्यादातर हिस्सा देश के भीतर ही खा लिया जाता है। बहुत ही कम मात्रा में आम विदेशों में निर्यात (Export) किए जाते हैं। यही वजह है कि अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोप जैसे देशों में भारतीय आम आसानी से नहीं मिलते। और जब मिलते हैं, तो सीमित सप्लाई के कारण इनकी कीमत 466 रुपये प्रति पीस तक पहुंच जाती है।


भारतीय आम सिर्फ एक फल नहीं है; विदेशों में बसे लाखों भारतीयों के लिए यह उनके बचपन, उनके घर और उनके देश की मीठी यादों से जुड़ा एक जज्बात है। वहीं, विदेशी नागरिकों के लिए यह एक ऐसा विदेशी स्वाद (Exotic Taste) है, जिसकी आदत उन्हें लग चुकी है। अमेरिका में 466 रुपये का एक आम बिकना और 20 मिनट में स्टोर्स का खाली हो जाना इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि 'फलों का राजा' असल में दुनिया पर राज कर रहा है।


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