NSE IPO पर खत्म हुआ 10 साल का सस्पेंस? SEBI की 1800 करोड़ वाली इस 'डील' ने हिलाया बाजार, जानें अब क्या होने वाला है!

Keyur Raval

National Stock Exchange IPO update: NSE IPO का इंतज़ार खत्म! SEBI की कमेटी ने को-लोकेशन मामले में 1800 करोड़ के सेटलमेंट की सिफारिश की है। जानें आईपीओ और सेटलमेंट से जुड़ी हर छोटी-बड़ी बात।


NSE IPO news
NSE IPO news



मुंबई, 22 अप्रैलः नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के आईपीओ का इंतजार कर रहे निवेशकों के लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी आई है। सेबी (SEBI) की हाई-पावर्ड एडवायजरी कमेटी ने लंबे समय से लंबित को-लोकेशन मामले को सुलझाने के लिए 1800 करोड़ रुपये के सेटलमेंट की सिफारिश की है। यह राशि NSE द्वारा प्रस्तावित 1387 करोड़ रुपये से अधिक है, लेकिन इससे आईपीओ के रास्ते की कानूनी अड़चनें खत्म होने की उम्मीद है। 1800 करोड़ में से 1200 करोड़ डिस्गॉर्जमेंट और 400 करोड़ ब्याज के रूप में होंगे। NSE ने पहले ही आईपीओ के लिए 20 बैंकों को नियुक्त कर दिया है और अपने 1.90 लाख निवेशकों से शेयर बिक्री पर राय मांगी है। अगर सेबी के पूर्णकालिक सदस्य इस सिफारिश को मंजूरी देते हैं, तो जल्द ही भारत का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज शेयर बाजार में लिस्ट होता नजर आएगा, जिससे बाजार की पारदर्शिता और निवेशकों का भरोसा और बढ़ेगा।


भारतीय शेयर बाजार के सबसे बड़े खिलाड़ी यानी नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के भविष्य को लेकर एक बहुत बड़ी और सकारात्मक खबर सामने आई है। अगर आप भी उन निवेशकों में से हैं जो पिछले 10 साल से NSE के आईपीओ (IPO) का रास्ता देख रहे हैं, तो यह खबर आपके चेहरे पर मुस्कान ला सकती है। दरअसल, लंबे समय से अटके 'को-लोकेशन' मामले (Co-location Case) में सेबी (SEBI) की एक विशेष कमेटी ने समझौते का रास्ता खोल दिया है।


खबरों के मुताबिक, सेबी की हाई-पावर्ड एडवायजरी कमेटी (HPAC) ने सिफारिश की है कि NSE इस कानूनी विवाद को खत्म करने के लिए 1800 करोड़ रुपये (लगभग 19.25 करोड़ डॉलर) का भुगतान करे। यह कदम NSE के बहुप्रतीक्षित आईपीओ के रास्ते की सबसे बड़ी बाधा को हटाने जैसा है।


क्या है 1800 करोड़ का पूरा गणित?


सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, सेबी की कमेटी ने जो 1800 करोड़ रुपये का प्रस्ताव रखा है, उसका एक खास ब्रेकअप (विभाजन) है। इस कुल राशि में से लगभग 1200 करोड़ रुपये 'डिस्गॉर्जमेंट' (Disgorgement) राशि हो सकती है। डिस्गॉर्जमेंट का आसान भाषा में मतलब होता है वह अवैध लाभ जो किसी गलत तरीके से कमाया गया हो और उसे वापस लौटाना पड़े।


इसके अलावा, इस राशि में 400 करोड़ रुपये का ब्याज शामिल है। बाकी बची हुई राशि समझौते की अन्य शर्तों और पेनल्टी के रूप में तय की जाएगी। यहाँ ध्यान देने वाली बात यह है कि NSE ने पिछले साल जून 2023 में खुद 1387.39 करोड़ रुपये के सेटलमेंट की पेशकश की थी। हालांकि, सेबी की कमेटी ने इससे लगभग 412 करोड़ रुपये अधिक की मांग की है। NSE ने पहले ही करीब 600 करोड़ रुपये एक एस्क्रो खाते में जमा कर दिए हैं, और बाकी की राशि फाइनल डिमांड लेटर आने पर जमा करनी होगी।


क्या है को-लोकेशन मामला, जिसने 10 साल तक IPO रोका?


बहुत से लोग यह समझना चाहते हैं कि आखिर यह 'को-लोकेशन' विवाद था क्या? सरल शब्दों में कहें तो, को-लोकेशन एक ऐसी सुविधा होती है जहाँ स्टॉक ब्रोकर्स के सर्वर एक्सचेंज के सर्वर के बहुत पास रखे जाते हैं। आरोप यह था कि NSE ने कुछ खास ब्रोकर्स को मार्केट डेटा तक दूसरों के मुकाबले बहुत जल्दी और प्राथमिकता के आधार पर पहुंच (Access) दी।


जब डेटा मिलीसेकंड पहले मिलता है, तो उन ब्रोकर्स को ट्रेडिंग में अनुचित फायदा होता है। इसी शिकायत के बाद सेबी ने जांच शुरू की और NSE के गवर्नेंस पर सवाल खड़े हुए। इसी कानूनी पचड़े और रेगुलेटरी खामियों की वजह से सेबी ने NSE को लिस्टिंग की अनुमति नहीं दी थी। लेकिन अब जब सेटलमेंट की बात आगे बढ़ी है, तो माना जा रहा है कि 10 साल का यह लंबा वनवास जल्द खत्म होगा।


IPO को लेकर कितनी तैयारी है?


NSE ने अपनी तरफ से कमर पूरी तरह कस ली है। हाल ही में आई रिपोर्ट्स के मुताबिक, NSE ने अपने आईपीओ को मैनेज करने के लिए 20 बड़े इन्वेस्टमेंट बैंकों को नियुक्त किया है। भारत के कॉर्पोरेट इतिहास में किसी आईपीओ के लिए इतने बड़े स्तर पर बैंकों की नियुक्ति पहली बार देखी गई है।




NSE फिलहाल भारत की सबसे बड़ी अनलिस्टेड कंपनी है। इसके पास लगभग 1.90 लाख शेयरधारक (Investors) हैं। एक्सचेंज ने अपने मौजूदा निवेशकों से भी संपर्क किया है कि क्या वे आईपीओ के जरिए अपने शेयर बेचना चाहते हैं। इसके लिए निवेशकों को 27 अप्रैल 2024 तक का समय दिया गया था। जैसे ही सेबी से सेटलमेंट की अंतिम मंजूरी मिलती है, वैसे ही NSE अपना ड्राफ्ट पेपर (DRHP) सेबी के पास जमा कर सकता है।


निवेशकों के लिए क्यों है यह बड़ी खबर?


NSE दुनिया का सबसे बड़ा डेरिवेटिव्स एक्सचेंज है। इसकी लिस्टिंग न केवल भारतीय शेयर बाजार के लिए एक ऐतिहासिक पल होगा, बल्कि इससे बाजार में लिक्विडिटी और पारदर्शिता भी बढ़ेगी। NSE के शेयरों की ग्रे मार्केट (Grey Market) में हमेशा भारी मांग रहती है। एक बार लिस्ट होने के बाद, यह कंपनी मार्केट कैप के मामले में देश की दिग्गज कंपनियों की लिस्ट में शामिल हो जाएगी।


आगे क्या होगा?


अब गेंद सेबी के पाले में है। कमेटी की सिफारिश के बाद, सेबी के दो पूर्णकालिक सदस्य (Whole-time Members) इस प्रस्ताव की समीक्षा करेंगे और इसे अपनी अंतिम मंजूरी देंगे। इसके बाद NSE को एक आधिकारिक 'डिमांड लेटर' भेजा जाएगा। जैसे ही भुगतान की प्रक्रिया पूरी होगी, सेबी एक फाइनल सेटलमेंट ऑर्डर जारी करेगा। इसके साथ ही NSE के आईपीओ पर लगा 'रेड सिग्नल' ग्रीन में बदल जाएगा।



Money Sutra

Welcome to Money Sutra Hub, your number one source for all things related to Finance, Stock Market,…
To Top