IPO Market Crash: शेयर बाजार में गिरावट के कारण IPO का क्रेज खत्म हो रहा है। 66% कंपनियों के शेयर इश्यू प्राइस से नीचे आ गए हैं। जानें क्यों डूब रहा है निवेशकों का पैसा।
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| IPO Market Crash |
नई दिल्ली, 5 अप्रैलः क्या आपको भी लगता था कि IPO (Initial Public Offering) में पैसा लगाना रातों-रात अमीर बनने का शॉर्टकट है? अगर हां, तो अब थोड़ा सावधान हो जाइए। शेयर बाजार (Share Market) में इन दिनों जो उठापटक चल रही है, उसने IPO बाजार की कमर तोड़ दी है। एक वक्त था जब IPO आते ही निवेशकों की लाइन लग जाती थी, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। फटाफट मुनाफे की चाहत में लोगों की मूल रकम भी डूब रही है।
आंकड़े दे रहे हैं गवाही: निवेशकों को भारी नुकसान
मौजूदा हालात इतने खराब हैं कि हर 3 में से करीब 2 कंपनियों के शेयर अपने इश्यू प्राइस (Issue Price) से काफी नीचे ट्रेड कर रहे हैं। आइए कुछ चौंकाने वाले आंकड़ों पर नजर डालते हैं:
पिछले 1 साल में शेयर बाजार में लिस्ट होने वाली लगभग 66 फीसदी कंपनियों के शेयर अपने IPO प्राइस से नीचे आ चुके हैं। करीब 15 कंपनियों के शेयरों में तो 50% तक की भारी गिरावट देखी गई है। ग्लोटिस (Glotis), वीएसएम टीएमटी (VSM TMT) और मंगल इलेक्ट्रिकल (Mangal Electrical) जैसी कंपनियों में निवेशकों का 70% तक पैसा साफ हो गया है।
आखिर क्यों फीका पड़ा IPO का क्रेज?
IPO मार्केट में इस भयंकर मंदी के पीछे कई बड़े कारण हैं, जिन्हें समझना एक निवेशक के लिए बहुत जरूरी है:
शेयर बाजार का दबाव: पिछले 12 से 18 महीनों में शेयर बाजार में काफी उतार-चढ़ाव आया है। खासकर मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों की बुरी पिटाई हुई है। चूंकि ज्यादातर IPO इसी कैटेगरी में आते हैं, इसलिए इसका सबसे ज्यादा असर इन्हीं पर पड़ा है।
महंगी वैल्यूएशन (Overvaluation): जब बाजार तेजी में होता है, तो कंपनियां बहुत महंगे भाव पर अपने शेयर बेचती हैं। निवेशक भी बिना सोचे समझे पैसा लगा देते हैं। लेकिन गिरावट के दौर में यही महंगी वैल्यूएशन निवेशकों को भारी पड़ रही है।
ग्लोबल टेंशन और डर: मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव, कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतें, बढ़ती महंगाई और कमजोर होता रुपया बाजार पर दबाव बना रहे हैं। इससे निवेशकों की रिस्क लेने की क्षमता घट गई है।
ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) का भी बुरा हाल
आजकल आ रहे नए IPO को लेकर बाजार में कोई खास उत्साह नहीं दिख रहा है। लिस्टिंग से पहले ही ग्रे मार्केट में कई कंपनियों के शेयर निगेटिव या बहुत मामूली प्रीमियम पर ट्रेड कर रहे हैं। यह इस बात का सीधा संकेत है कि लिस्टिंग के दिन ही निवेशकों को नुकसान झेलना पड़ सकता है।
पहले जो निवेशक आंख बंद करके शॉर्ट-टर्म मुनाफे के लिए IPO में पैसा लगाते थे, वे अब फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं। अगर आप भी किसी नए IPO में दांव लगाने की सोच रहे हैं, तो कंपनी के फंडामेंटल और उसकी वैल्यूएशन को बारीकी से जरूर चेक करें। बाजार का मौजूदा दौर तुक्केबाजी का नहीं, बल्कि समझदारी से निवेश करने का है।
(डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सूचना और शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। शेयर बाजार में निवेश बाजार के जोखिमों के अधीन है। किसी भी आईपीओ या स्टॉक में निवेश करने से पहले अपने पंजीकृत वित्तीय सलाहकार (Financial Advisor) से परामर्श जरूर लें।)

