iPhone Export from India: भारत अब दुनिया के लिए आईफोन बनाने का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है। वित्त वर्ष 2026 में भारत से ₹2 लाख करोड़ के iPhone एक्सपोर्ट हुए, जो देश के कुल स्मार्टफोन निर्यात का 75% हिस्सा है। जानिए कैसे 'मेक इन इंडिया' और PLI स्कीम ने भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बना दिया और कैसे टाटा-फॉक्सकॉन जैसी कंपनियों ने इसमें बड़ी भूमिका निभाई।
![]() |
| iPhone Export from India |
बेंगलुरु, 30 अप्रैलः कुछ साल पहले तक जिस देश के बारे में यह सोचा भी नहीं जा सकता था कि वहां दुनिया का सबसे प्रीमियम स्मार्टफोन बनेगा और पूरी दुनिया में बिकेगा, आज उसी भारत ने इतिहास रच दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'मेक इन इंडिया' (Make in India) पहल और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के लिए शुरू की गई ‘प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव' (PLI) योजना का असर अब आंकड़ों में साफ नजर आ रहा है। वित्त वर्ष 2026 (FY26) भारत के विनिर्माण इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हुआ है, क्योंकि इस दौरान भारत से होने वाला iPhone एक्सपोर्ट 2 लाख करोड़ रुपये के जादुई आंकड़े को पार कर गया है।
आईफोन का दबदबा: 75% निर्यात पर कब्जा
भारत सरकार और ऐपल के मैन्युफैक्चरिंग पार्टनर्स द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में भारत का कुल स्मार्टफोन निर्यात लगभग 2.6 लाख करोड़ रुपये रहा। सबसे चौंकाने वाली और गर्व करने वाली बात यह है कि इस कुल निर्यात में अकेले आईफोन का योगदान 75 फीसदी से भी अधिक रहा। इसका सीधा मतलब यह है कि दुनिया भर में जो स्मार्टफोन 'मेड इन इंडिया' ठप्पे के साथ भेजे जा रहे हैं, उनमें से हर चार में से तीन फोन ऐपल के आईफोन हैं।
कैसे बना भारत नंबर 1 निर्यातक?
ऐपल इंक का आईफोन अब भारत की निर्यात श्रेणियों में सबसे बड़ा ब्रांडेड निर्यातक बनकर उभरा है। इसे 'हार्मनाइज्ड सिस्टम' (HS) कोड ढांचे के तहत वर्गीकृत किया गया है, जो वैश्विक व्यापार में इस्तेमाल होने वाले 5,000 से अधिक उत्पाद समूहों को कवर करता है। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 के पहले 11 महीनों में ही आईफोन ने उन सभी पारंपरिक निर्यात वस्तुओं को पीछे छोड़ दिया है, जो दशकों से भारत की ताकत रही हैं।
अन्य श्रेणियों को छोड़ा पीछे
अगर हम तुलना करें, तो आईफोन का निर्यात अन्य प्रमुख सेक्टर से कहीं आगे निकल गया है:
- आईफोन (iPhone): लगभग 2 लाख करोड़ रुपये (नंबर 1)।
- डीजल वाहन (Diesel Vehicles): 14.53 अरब डॉलर (दूसरे स्थान पर)।
- हीरा (Diamonds): 11.23 अरब डॉलर (तीसरे स्थान पर)।
- दवाएं (Medicines): 9.98 अरब डॉलर (चौथे स्थान पर)।
- पेट्रोल (Petrol): 8.5 अरब डॉलर (पांचवें स्थान पर)।
ये आंकड़े बताते हैं कि भारत अब सिर्फ कच्चा माल या परंपरागत चीजें ही नहीं, बल्कि दुनिया की सबसे उन्नत तकनीक भी निर्यात कर रहा है।
PLI योजना: सफलता की असली कहानी
यह कामयाबी रातों-रात नहीं मिली है। यह भारत सरकार की PLI योजना के अंतिम वर्ष का परिणाम है। इस योजना ने विदेशी कंपनियों को भारत में कारखाने लगाने और उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। वित्त वर्ष 2021-22 में ऐपल ने केवल 9,351.6 करोड़ रुपये के आईफोन एक्सपोर्ट किए थे। लेकिन मात्र 5 सालों के भीतर यह आंकड़ा बढ़कर 2 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया है।
साल-दर-साल विकास का ग्राफ कुछ ऐसा रहा:
- वित्त वर्ष 2021-22: 9,351.6 करोड़ रुपये
- वित्त वर्ष 2022-23: 44,269.5 करोड़ रुपये
- वित्त वर्ष 2023-24: 85,013.5 करोड़ रुपये
- वित्त वर्ष 2024-25: 1.5 लाख करोड़ रुपये (अनुमानित)
- वित्त वर्ष 2025-26: 2 लाख करोड़ रुपये (रिकॉर्ड स्तर)
टाटा और फॉक्सकॉन: भारत के विनिर्माण के दो मजबूत स्तंभ
इस पूरी सफलता में दो कंपनियों की भूमिका सबसे अहम रही है—टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स (Tata Electronics) और फॉक्सकॉन (Foxconn)। वित्त वर्ष 2026 तक ये दोनों कंपनियां आईफोन निर्यात में लगभग बराबर का योगदान दे रही थीं। टाटा ने भारतीय कंपनी के रूप में ऐपल के पारिस्थितिकी तंत्र में शामिल होकर यह साबित कर दिया कि भारतीय कंपनियां भी वैश्विक मानकों पर खरी उतर सकती हैं।
इन कंपनियों ने न केवल निर्यात बढ़ाया, बल्कि बड़े पैमाने पर रोजगार भी पैदा किए। वर्तमान में, ऐपल के आपूर्ति तंत्र में लगभग 2.5 लाख लोग सीधे तौर पर काम कर रहे हैं। सबसे खास बात यह है कि इन कारखानों में काम करने वाले कुल कार्यबल में 70 फीसदी से अधिक महिलाएं हैं, जो महिला सशक्तिकरण की एक नई मिसाल है।
सप्लाई चेन से चीनी कंपनियों की छुट्टी
भारत में ऐपल की एक और खास रणनीति यह रही है कि उसने अपनी सप्लाई चेन से चीनी कंपनियों को काफी हद तक बाहर रखा है। ऐपल ने भारत में अपना इकोसिस्टम 40 से अधिक घरेलू कंपनियों और जापान की टीडीके कॉरपोरेशन (TDK Corp) जैसे गैर-चीनी आपूर्तिकर्ताओं के साथ मिलकर बनाया है। भू-राजनीतिक तनावों के बीच ऐपल का भारत पर भरोसा करना देश की अर्थव्यवस्था के लिए 'संजीवनी' जैसा साबित हुआ है।
भविष्य की राह
वित्त वर्ष 2026 के ये आंकड़े केवल एक संख्या नहीं हैं, बल्कि यह भारत के 'ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब' बनने का प्रमाण हैं। वैश्विक व्यापार में चुनौतियों और शुल्क संबंधी समस्याओं के बावजूद 33 फीसदी की वार्षिक वृद्धि यह दर्शाती है कि दुनिया को अब 'मेड इन इंडिया' उत्पादों पर भरोसा है। यदि यही रफ़्तार जारी रही, तो आने वाले समय में भारत इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में दुनिया का निर्विवाद नेता बनकर उभरेगा।
