सोने को लेकर भारतीयों की सोच में बड़ा बदलाव, तिजोरी नहीं अब यहां जा रहा है पैसा!

Keyur Raval

Gold Investment India: भारत में सोने की खरीदारी में बड़ा बदलाव आया है। अब 40% लोग गहनों के बजाय निवेश के लिए सोना खरीद रहे हैं। जानिए इस नई रिपोर्ट के चौंकाने वाले आंकड़े।


Gold Investment India
Gold Market Trend



नई दिल्ली, 28 अप्रैलः भारतीयों के लिए सोना हमेशा से सबसे पसंदीदा धातु रही है। लेकिन अब देश में सोना खरीदने के तरीके में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। केयरएज की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 तक भारत में कुल सोने की खरीद में 40% हिस्सेदारी केवल निवेश के लिए होगी। पहले लोग सिर्फ गहने बनवाने के लिए सोना खरीदते थे, लेकिन अब वे गोल्ड ईटीएफ, डिजिटल गोल्ड और सोने के सिक्कों में पैसा लगा रहे हैं। लगातार बढ़ती कीमतें, दुनिया भर में चल रहे युद्ध और केंद्रीय बैंकों की खरीदारी ने सोने को एक सुरक्षित निवेश (Safe-haven) बना दिया है। इस लेख में विस्तार से जानिए कि क्यों भारतीय मिडिल क्लास अब गहनों के बजाय सोने में निवेश करना पसंद कर रहा है और भविष्य में सोने की कीमतें किस तरफ जाएंगी।


भारत में सोने का नाम आते ही शादियां, त्योहार और गहनों से भरी तिजोरियां याद आने लगती हैं। भारतीय मिडिल क्लास के लिए सोना हमेशा से एक सपना और जरूरत दोनों रहा है। पिछले कुछ सालों में आपने भी ध्यान दिया होगा कि सोने के दाम रॉकेट की तरह आसमान छू रहे हैं। आज के समय में आम आदमी के लिए भारी गहने खरीदना लगभग पहुंच से बाहर हो गया है। लेकिन क्या इसका मतलब यह है कि लोगों ने सोना खरीदना बंद कर दिया है? बिल्कुल नहीं!


हाल ही में आई एक बड़ी रिपोर्ट ने एक ऐसा खुलासा किया है जो हर किसी को हैरान कर रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, लोगों ने सोना खरीदना नहीं छोड़ा है, बल्कि उनके सोना खरीदने का तरीका पूरी तरह बदल गया है। अब लोग गले का हार या हाथों की चूड़ियां बनवाने के बजाय सोने को एक 'कमाई का जरिया' मान रहे हैं। आइए इस रिपोर्ट के आधार पर समझते हैं कि भारत में सोने का बाजार किस नई दिशा में जा रहा है और क्यों 40% लोग अब इस नए तरीके से सोना खरीद रहे हैं।


भारत और सोने का पुराना रिश्ता


दुनिया भर में भारत सोने के सबसे बड़े खरीदारों में से एक है। हमारे देश में बच्चे के जन्म से लेकर शादी-ब्याह तक, हर शुभ काम में सोने की मौजूदगी जरूरी मानी जाती है। दशकों से हमारे माता-पिता और दादा-दादी सोने को मुसीबत के समय का साथी मानते आए हैं।


पहले के समय में सोना खरीदने का मतलब सिर्फ और सिर्फ 'गहने' खरीदना होता था। लोग सुनार के पास जाते थे और अपनी जमा-पूंजी से जेवर बनवाते थे। लेकिन गहनों के साथ एक बड़ी समस्या यह होती है कि उसमें 'मेकिंग चार्ज' (बनवाई) का पैसा कट जाता है। जब आप उस गहने को बेचने जाते हैं, तो आपको पूरी कीमत नहीं मिलती। अब आज की पीढ़ी और समझदार मिडिल क्लास इस बात को समझ चुका है। यही कारण है कि अब बाजार का रुख बदल रहा है।


रिपोर्ट का सबसे बड़ा खुलासा


देश की जानी-मानी घरेलू रेटिंग एजेंसी CareEdge (केयरएज) ने अपनी एक ताजा रिपोर्ट में सोने के बाजार को लेकर चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए हैं। रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि वित्त वर्ष 2026-27 तक भारत में कुल सोने की खपत में ‘निवेश’ (Investment) की हिस्सेदारी बढ़कर 35 से 40% तक पहुंच जाएगी।


इसका सीधा सा मतलब यह है कि अगर देश में 100 लोग सोना खरीद रहे हैं, तो उनमें से 40 लोग ऐसे होंगे जो गहने नहीं, बल्कि निवेश के लिए सोना खरीदेंगे। केयरएज कंपनी के डायरेक्टर अखिल गोयल ने इस ट्रेंड को समझाते हुए कहा है कि देश में सोना खरीदने के तरीकों में यह एक "बहुत बड़ा बदलाव" है।


आंकड़ों की जुबानी, सोने की कहानी


इस पूरी रिपोर्ट को अगर हम आसान आंकड़ों में समझें, तो तस्वीर कुछ इस तरह नजर आती है:


गहनों की हिस्सेदारी गिरी: साल 2025 में कुल सोने की खरीद में गहनों (Jewelry) की हिस्सेदारी गिरकर 60% के नीचे आ गई है।


लंबे समय का औसत: पिछले कई सालों का रिकॉर्ड देखें, तो भारत में गहनों की हिस्सेदारी हमेशा 70% के आसपास रहती थी। यानी इसमें 10% की बड़ी गिरावट आई है।


दुनिया का हाल: पूरी दुनिया में सोने की कुल खपत में गहनों की हिस्सेदारी औसतन 50% रहती है। भारत अब धीरे-धीरे इसी ग्लोबल ट्रेंड की तरफ बढ़ रहा है।


गहनों का बाजार भी बढ़ा: ऐसा नहीं है कि गहनों का बाजार डूब गया है। 2025 में गहनों की मांग में भी 10% की बढ़ोतरी देखी गई है और इसका कुल बाजार बढ़कर 4.8 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।


लोग गहने छोड़कर निवेश क्यों कर रहे हैं?  


अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर लोग गहने बनवाने के बजाय सोने में सीधे निवेश क्यों कर रहे हैं? इसके पीछे कई बड़े कारण हैं, जिन्हें 10वीं क्लास का बच्चा भी आसानी से समझ सकता है:


मेकिंग चार्ज की बचत: जैसा कि हमने पहले बताया, गहने बनवाने पर 10% से लेकर 20% तक मेकिंग चार्ज लगता है। निवेश के लिए सोने के सिक्के, बिस्कुट या ईटीएफ खरीदने पर यह फालतू खर्च बच जाता है।


गोल्ड ईटीएफ (Gold ETF) का चलन: आजकल लोग शेयर बाजार की तरह सोने में भी पैसा लगा सकते हैं। इसे गोल्ड ईटीएफ कहते हैं। इसमें आपको सोना घर की तिजोरी में नहीं रखना पड़ता, बल्कि वह आपके डीमैट खाते में डिजिटल रूप में सुरक्षित रहता है। चोरी का डर खत्म और शुद्धता की 100% गारंटी।


भू-राजनीतिक अनिश्चितता (Geopolitical Tensions): आज दुनिया भर में हालात ठीक नहीं हैं। कहीं रूस और यूक्रेन का युद्ध चल रहा है, तो कहीं मध्य पूर्व (Middle East) में तनाव है। जब भी दुनिया में ऐसा कोई संकट आता है, शेयर बाजार गिरते हैं और लोग घबरा जाते हैं। ऐसे समय में केवल 'सोना' ही एक ऐसा सुरक्षित निवेश (Safe-haven) होता है, जिसके दाम हमेशा बढ़ते हैं।


केंद्रीय बैंकों की खरीदारी: दुनिया भर के देशों के रिजर्व बैंक (जैसे भारत का RBI) भी पिछले कुछ सालों से छप्पर फाड़कर सोना खरीद रहे हैं। जब बड़े बैंक सोना खरीदते हैं, तो बाजार में सोने की कीमत और मजबूत हो जाती है।


आम जनता और बाजार पर क्या असर हो रहा है?


आम जनता अब फाइनेंशियली काफी साक्षर हो रही है। सोशल मीडिया और इंटरनेट के कारण लोगों को पता चल गया है कि असली कमाई कहां है। लोग अब दिखावे के लिए सोना खरीदने के बजाय, भविष्य को सुरक्षित करने के लिए सोना खरीद रहे हैं।


बाजार के लिहाज से देखें तो ज्वेलरी शोरूम चलाने वालों को भी अब अपनी रणनीति बदलनी पड़ रही है। अब बड़ी-बड़ी ज्वेलरी कंपनियां भी अपने ग्राहकों को सोने के सिक्के और डिजिटल गोल्ड बेचने पर जोर दे रही हैं। यह बाजार के परिपक्व (Mature) होने का संकेत है।


विशेषज्ञों की राय और गहरा विश्लेषण


बाजार विशेषज्ञों और केयरएज (CareEdge) की रिपोर्ट के अनुसार, सोने की कीमतें अब एक ऐसे दौर में पहुंच गई हैं जहां वे नीचे नहीं गिरेंगी, बल्कि ऊंचे स्तर पर ही टिकी रहेंगी।


जब महंगाई बढ़ती है, तो रुपये या डॉलर की कीमत कम हो जाती है, लेकिन सोने की कीमत बढ़ती है। विशेषज्ञ इसे 'महंगाई के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार' (Hedge against inflation) मानते हैं। वैश्विक आर्थिक हालात अभी भी स्थिर नहीं हैं। अमेरिका में ब्याज दरों में होने वाले बदलाव और दुनिया के बड़े देशों की अर्थव्यवस्था में सुस्ती के कारण निवेशक लगातार सोने की तरफ भाग रहे हैं। यही कारण है कि भारत में सोने में निवेश की मांग अपने रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है।


भविष्य की संभावनाएं


आने वाले समय में भारतीय गोल्ड मार्केट में कुछ बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं:


निवेश के नए विकल्प: आने वाले 2 से 3 सालों में लोग फिजिकल गोल्ड (सोने की ईंटें) के बजाय पूरी तरह से डिजिटल गोल्ड, गोल्ड ईटीएफ और सोवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) की तरफ शिफ्ट हो सकते हैं।


ज्वेलरी मार्केट में बदलाव: गहनों का बाजार केवल शादियों और बड़े त्योहारों तक ही सीमित रह सकता है। आम दिनों में लोग गहनों की दुकानों पर सोने के सिक्के खरीदने ज्यादा जाएंगे।


कीमतों में तेजी: अगर दुनिया भर के केंद्रीय बैंक इसी रफ्तार से सोना खरीदते रहे, तो आने वाले सालों में सोने का भाव नए रिकॉर्ड बना सकता है।


सोना अब सिर्फ तिजोरी की शोभा बढ़ाने वाली पीली धातु नहीं रह गया है। केयरएज की रिपोर्ट से यह बिल्कुल साफ हो जाता है कि भारतीय मिडिल क्लास की सोच बदल चुकी है। 2026-27 तक 40% निवेश का आंकड़ा यह साबित करता है कि लोगों के लिए सोना अब भविष्य को सुरक्षित करने का सबसे भरोसेमंद हथियार बन गया है।


चाहे दुनिया में युद्ध चल रहा हो, महंगाई बढ़ रही हो या शेयर बाजार क्रैश हो रहा हो, सोने ने हमेशा अपने निवेशकों का साथ दिया है। भारत जो कभी सिर्फ गहनों का दीवाना था, अब वह एक समझदार निवेशक बन रहा है। और यह बदलाव न केवल आम आदमी की जेब के लिए अच्छा है, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था के लिए भी एक मजबूत संकेत है।


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