Crude Oil Price: क्रूड ऑयल की कीमतें 100 डॉलर के पार होने से भारत में महंगाई 6% के ऊपर जा सकती है। जानिए 8 अप्रैल को RBI मॉनेटरी पॉलिसी में क्या बड़े फैसले ले सकता है।
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नई दिल्ली, 4 अप्रैलः क्या आपको भी लग रहा था कि अब महंगाई से राहत मिल रही है? अगर हां, तो यह खबर आपको परेशान कर सकती है। इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड ऑयल (कच्चा तेल) का भाव 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। जानी-मानी ब्रोकरेज फर्म HSBC ने चेतावनी दी है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह 100 डॉलर के ऊपर बनी रहीं, तो देश में महंगाई एक बार फिर से आम आदमी को रुलाने वाली है।
6% की लिमिट पार कर सकती है महंगाई
HSBC के अर्थशास्त्रियों के मुताबिक, अगर कच्चे तेल का औसत भाव 100 डॉलर से नीचे रहता, तो देश की रिटेल महंगाई दर 6% से कम रहती। लेकिन मुश्किल यह है कि मार्च महीने में ब्रेंट क्रूड का औसत भाव 100 डॉलर रहा है। ऐसे में महंगाई दर रिजर्व बैंक (RBI) की तय लिमिट (6%) को पार कर सकती है। इसका सीधा असर आम आदमी के घर के बजट पर पड़ेगा।
8 अप्रैल को RBI ले सकता है बड़ा फैसला
महंगाई बढ़ने के डर के बीच अब सबकी नजरें RBI पर टिक गई हैं। 6 अप्रैल को RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की अहम बैठक शुरू होने वाली है। इस बैठक के नतीजे 8 अप्रैल को सामने आएंगे। विदेशी ब्रोकरेज फर्म की रिपोर्ट का इशारा है कि महंगाई को काबू में रखने और रुपये को गिरने से बचाने के लिए RBI 8 अप्रैल को रेपो रेट (Interest Rate) बढ़ा सकता है। अगर ऐसा हुआ, तो आपकी होम लोन और कार लोन की EMI बढ़ जाएगी।
क्यों बढ़ रहे हैं कच्चे तेल के दाम?
28 फरवरी से मध्यपूर्व (Middle East) में लड़ाई शुरू हुई थी, जिसके बाद से तनाव का माहौल है। सप्लाई चेन बिगड़ने से कच्चे तेल के दाम लगातार उछाल मार रहे हैं। 2 अप्रैल को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने संबोधन में आक्रामक रुख दिखाते हुए ईरान पर हमले तेज करने की बात कही थी। इससे तेल की कीमतों में फिलहाल किसी भी तरह की गिरावट की उम्मीद नहीं दिख रही है।
उद्योगों और देश की इकोनॉमी पर क्या होगा असर?
कच्चा तेल महंगा होने का सीधा मतलब है ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट का बढ़ना। जब माल ढुलाई महंगी होगी, तो बाजार में मिलने वाली लगभग हर चीज के दाम बढ़ जाएंगे। कई उद्योगों पर इसका साफ असर दिखना शुरू हो गया है। कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि महंगे क्रूड ऑयल की वजह से भारत की शानदार GDP ग्रोथ में भी कमी आ सकती है।
HSBC की क्या है सलाह?
इन हालातों को देखते हुए HSBC के एक्सपर्ट्स ने सरकार और RBI को अभी फिस्कल और मॉनेटरी मोर्चे पर 'न्यूट्रल' रुख अपनाने की सलाह दी है। उनका कहना है कि अभी मार्केट में सप्लाई सामान्य नहीं है। ऐसे में अगर डिमांड बढ़ी, तो महंगाई बेकाबू होने का खतरा और ज्यादा बढ़ जाएगा।
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