क्रिप्टो मार्केट में हाहाकार: Bitcoin $68000 के नीचे धड़ाम, डोनाल्ड ट्रंप की एक ‘धमकी’ और डूब गए अरबों डॉलर! जानें अब आगे क्या होगा

MoneySutraHub Team

 Why Bitcoin is falling: बिटकॉइन $68000 के नीचे आ गिरा है। डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को धमकी और ग्लोबल टेंशन से क्रिप्टो मार्केट क्रैश हो गया। जानें क्यों आई बिकवाली की आंधी और क्या हैं एक्सपर्ट्स की राय।


Bitcoin price crash

नई दिल्ली, 22 मार्चः क्रिप्टोकरेंसी की दुनिया में पिछले कुछ दिनों से भूचाल आया हुआ है। जो निवेशक हफ्ते की शुरुआत में मुनाफा देखकर जश्न मना रहे थे, वो अब अपने पोर्टफोलियो को लाल रंग (नुकसान) में देखकर परेशान हैं। दुनिया की सबसे बड़ी और लोकप्रिय क्रिप्टोकरेंसी, बिटकॉइन (Bitcoin) की चमक अचानक फीकी पड़ गई है।


ऊपर की तरफ तेजी से भाग रहा मार्केट कैप के हिसाब से सबसे बड़ा क्रिप्टो कॉइन 'बिटकॉइन' अचानक बुरी तरह फिसल गया है। करीब छह हफ्ते के अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंचने के कुछ ही दिनों बाद यह ताश के पत्तों की तरह बिखर गया और $68000 के अहम लेवल के भी नीचे आ गया।


आखिर ऐसा क्या हुआ कि आसमान छूता बिटकॉइन औंधे मुंह गिर पड़ा? मार्केट में इतनी भारी बिकवाली (Sell-off) क्यों आई? और सबसे बड़ा सवाल यह है कि आगे अब मार्केट का रुख क्या रहने वाला है? आइए, इस पूरी खबर को विस्तार से और आसान भाषा में समझते हैं।


हफ्ते की शुरुआत में छू लिया था $76000 का लेवल


मार्केट के जानकारों और निवेशकों को उम्मीद थी कि बिटकॉइन इस बार नए रिकॉर्ड बनाएगा। इस हफ्ते की शुरुआत में ऐसा लग भी रहा था। बिटकॉइन ने शानदार तेजी दिखाते हुए करीब $76000 का लेवल छू लिया था। यह पिछले छह हफ्तों का सबसे हाई लेवल (High Level) था। मार्केट में चारों तरफ पॉजिटिव माहौल था। लेकिन, यह खुशी ज्यादा दिन नहीं टिक सकी।




$76000 का आंकड़ा छूने के बाद अगले तीन दिनों तक मार्केट में लगातार गिरावट का सिलसिला शुरू हो गया। शुक्रवार आते-आते यह $70000 के करीब आ गया और वीकेंड के प्रेशर में यह $68000 का मजबूत सपोर्ट भी तोड़कर नीचे चला गया। इस भारी गिरावट ने निवेशकों के मन में डर पैदा कर दिया है।


डोनाल्ड ट्रंप का वो बयान, जिसने मचा दिया कोहराम


बिटकॉइन के इस क्रैश के पीछे कोई तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि ग्लोबल राजनीति (Geopolitics) का सबसे बड़ा हाथ है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति और मौजूदा राजनीतिक दिग्गज डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के एक बयान ने पूरी दुनिया के फाइनेंशियल और क्रिप्टो मार्केट को हिला कर रख दिया है।

दरअसल, डोनाल्ड ट्रंप ने खुलेआम धमकी दी है कि वह ईरान के पावर प्लांट्स (ऊर्जा संयंत्रों) को तबाह कर देंगे। इस एक बयान ने पश्चिमी एशिया (Middle East) में पहले से चल रहे तनाव को और भड़का दिया। जियो-पॉलिटिकल टेंशन (Geopolitical Tension) बढ़ने के कारण दुनिया भर के निवेशकों का सेंटीमेंट (Sentiment) रातों-रात कमजोर हो गया।


जैसे ही ट्रंप का यह बयान मीडिया में आया, कुछ ही घंटों के भीतर क्रिप्टो मार्केट में पैनिक सेलिंग (डर के मारे बेचना) शुरू हो गई। देखते ही देखते दुनिया का सबसे बड़ा क्रिप्टो बिटकॉइन $68000 के नीचे आ गिरा। हैरान करने वाली बात यह है कि ट्रंप ने इस बयान से ठीक एक दिन पहले यह संकेत दिया था कि वह पश्चिमी एशिया में युद्ध को खत्म करने और शांति बहाल करने पर विचार कर रहे हैं। शांति की बात से लेकर सीधे पावर प्लांट्स उड़ाने की धमकी तक—ट्रंप के इस अचानक बदले हुए रुख ने निवेशकों को डरा दिया।


सिर्फ 60 मिनट में 24 करोड़ डॉलर स्वाहा!


जब मार्केट में अचानक पैनिक आता है, तो लेवरेज लेकर ट्रेडिंग करने वालों का सबसे बड़ा नुकसान होता है। ट्रंप के बयान के बाद मार्केट इतनी तेजी से गिरा कि लोगों को संभलने का मौका ही नहीं मिला।




डेटा के मुताबिक, सिर्फ 60 मिनट (1 घंटे) के भीतर ही क्रिप्टो मार्केट में 24 करोड़ डॉलर से ज्यादा की लेवरेज्ड पोजिशन (Leveraged Positions) लिक्विडेट (समाप्त) हो गईं। अगर 24 घंटे के आंकड़ों पर नजर डालें, तो कुल लिक्विडेशन 100 करोड़ डॉलर के पार चला गया। इसमें से सबसे ज्यादा नुकसान उन लोगों को हुआ जिन्होंने मार्केट ऊपर जाने (Bullish) का दांव लगाया था। करीब 98 करोड़ डॉलर के लॉन्ग पोजिशन वालों को गिरती कीमतों के चलते अपना दांव बीच में ही घाटे के साथ बंद करना पड़ा।


तेल की कीमतें और महंगाई का नया डर


बिटकॉइन में आई इस बिकवाली की आंधी के पीछे सिर्फ एक बयान नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक पूरा आर्थिक चक्र (Economic Cycle) काम कर रहा है। ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच चल रहे तनाव ने दुनिया भर में आर्थिक अनिश्चितता का माहौल बना दिया है।


युद्ध के हालात के कारण कच्चे तेल (Crude Oil) की सप्लाई चेन में दिक्कतें आने का डर सता रहा है। इसी डर के चलते तेल की कीमतें रॉकेट की स्पीड से ऊपर भाग रही हैं। अब साधारण सा गणित है जब तेल महंगा होगा, तो ट्रांसपोर्टेशन महंगा होगा, और इससे दुनिया भर में महंगाई (Inflation) एक बार फिर से बढ़ने लगेगी।


महंगाई का यह बढ़ता डर सीधे तौर पर अमेरिका के सेंट्रल बैंक, यानी फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) की नीतियों पर असर डालता है। मार्केट अब यह संकेत दे रहा है कि बढ़ती महंगाई को रोकने के लिए फेडरल रिजर्व अक्टूबर तक ब्याज दरें (Interest Rates) बढ़ा सकता है। इसकी लगभग 50% संभावना जताई जा रही है। जब भी ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो निवेशक फिक्स्ड इनकम (जैसे बॉन्ड्स) की तरफ भागते हैं और बिटकॉइन जैसे रिस्की एसेट्स (Risk Assets) से अपना पैसा निकाल लेते हैं। यही कारण है कि क्रिप्टो पर दबाव काफी ज्यादा बढ़ गया है।


एक्सपर्ट्स की क्या है राय?


इस भारी उठापटक पर मार्केट एनालिस्ट्स कड़ी नजर बनाए हुए हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि निवेशक इस वक्त 'इधर कुआं, उधर खाई' वाली स्थिति में फंसे हुए हैं।


विंटरम्यूट (Wintermute) के ओटीसी ट्रेडिंग हेड जेक ओस्ट्रोव्स्किस (Jake Ostrovskis) ने इस स्थिति को बहुत साफ शब्दों में समझाया है। उनका कहना है कि इस अनिश्चितता के चलते क्रिप्टो मार्केट में वोलैटिलिटी (उतार-चढ़ाव) काफी बढ़ गई है। उनके मुताबिक, अगर तेल की कीमतें बढ़ती हैं और इससे महंगाई बढ़ती है, तो फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में कटौती करने से बचेगा। वहीं दूसरी तरफ, अगर आर्थिक विकास (Economic Growth) सुस्त पड़ता है, तो दरें घटानी पड़ सकती हैं। लेकिन दोनों ही स्थितियों में निवेशक फिलहाल डरे हुए हैं और वह बिटकॉइन जैसे जोखिम वाले निवेश से दूरी बना रहे हैं।


वहीं, टैगस कैपिटल (Tagus Capital) के एनालिस्ट्स का कहना है कि क्रिप्टो मार्केट में सेंटिमेंट एक बार फिर से बिगड़ रहा है। निवेशक अभी 'वेट एंड वॉच' (Wait and Watch) यानी सतर्कता का रुख अपना रहे हैं।


टेक्निकल लेवल: क्या $60000 तक गिरेगा बिटकॉइन?


एनालिस्ट्स के अनुसार, चार्ट्स पर $68000 का लेवल एक बेहद अहम टेक्निकल सपोर्ट है।


गिरावट का खतरा: अगर बिटकॉइन आने वाले दिनों में $68000 के नीचे ही टिका रहता है, तो मार्केट में 60.8 करोड़ डॉलर की जो लॉन्ग पोजिशन बची हैं, वो भी बंद हो सकती हैं। अगर ऐसा हुआ तो सेलिंग प्रेशर और बढ़ेगा और बिटकॉइन के भाव लुढ़क कर $60000 तक जा सकते हैं।


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तेजी की उम्मीद: दूसरी तरफ, अगर मार्केट में कोई पॉजिटिव खबर आती है और बिटकॉइन बाउंस बैक करके $72000 के पार निकल जाता है, तो करीब 85.6 करोड़ डॉलर की शॉर्ट पोजिशन (मंदी का दांव लगाने वाले) कटेंगी। इससे मार्केट में 'शॉर्ट स्क्वीज' आएगा और बिटकॉइन के भाव में तेज उछाल देखने को मिल सकता है।


अभी क्या है स्थिति?


फिलहाल के लिए बिटकॉइन थोड़ी राहत की सांस लेते हुए $69000 से $69500 के बीच स्थिर होने की कोशिश कर रहा है। इस एरिया को मार्केट का एक महत्वपूर्ण सपोर्ट जोन (Support Zone) माना जा रहा है। हालांकि, तकनीकी इंडिकेटर्स (Technical Indicators) अभी भी खतरे की घंटी बजा रहे हैं।


शॉर्ट-टर्म (कम समय) के चार्ट्स दिखा रहे हैं कि बिटकॉइन 'ओवरसोल्ड' (Oversold - यानी जरूरत से ज्यादा बिक चुका) हो गया है, जिससे एक छोटे उछाल की उम्मीद बनती है। लेकिन लॉन्ग-टर्म (लंबे समय) का रुझान अभी भी काफी कमजोर बना हुआ है। ऐसे में रिटेल निवेशकों को बिना स्टॉप-लॉस (Stop-Loss) के ट्रेडिंग करने से बचना चाहिए और ग्लोबल न्यूज़, खासकर अमेरिका और मिडिल-ईस्ट की खबरों पर पैनी नजर रखनी चाहिए।


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(डिस्क्लेमर: क्रिप्टो मार्केट में निवेश जोखिमों के अधीन है। किसी भी तरह का निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार (Financial Advisor) से सलाह जरूर लें।)


(डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी केवल मार्केट अपडेट्स और रिपोर्ट्स पर आधारित है। यह किसी भी प्रकार की वित्तीय सलाह या निवेश की राय नहीं है। क्रिप्टो मार्केट और शेयर बाजार जोखिमों के अधीन हैं। निवेश करने से पहले कृपया अपने वित्तीय सलाहकार से संपर्क जरूर करें।)

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