अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध से दुनियाभर में हाहाकार: 14 देशों तक फैली आग, आसमान पर कच्चे तेल के दाम, जानें भारत समेत ग्लोबल इकोनॉमी पर क्या है असर

MoneySutraHub Team

 US Israel Iran War: अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच छिड़ा युद्ध अब 14 देशों तक फैल चुका है। क्रूड ऑयल 120 डॉलर के करीब पहुंच गया है। दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाएं संकट में हैं। भारत, पाकिस्तान से लेकर एविएशन सेक्टर तक इस युद्ध का क्या असर हो रहा है, यहां पूरी डिटेल पढ़ें।

Global Economy Impact


अहमदाबादः दुनिया एक बार फिर से एक बड़े वैश्विक संकट के मुहाने पर खड़ी है। 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमले के बाद, ईरान ने भी जोरदार पलटवार किया है। आज इस युद्ध का 11वां दिन है और हालात दिन-ब-दिन बिगड़ते जा रहे हैं। ईरान अब उन देशों को निशाना बना रहा है जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं। इस वजह से यह लड़ाई सिर्फ दो-तीन देशों तक सीमित न रहकर 14 देशों तक फैल चुकी है। युद्ध की इस आग ने तेल और गैस बाजार में हाहाकार मचा दिया है, जिसका सीधा असर ग्लोबल इकोनॉमी पर पड़ रहा है।


‘युद्ध जल्द खत्म होगा'- डोनाल्ड ट्रंप की भविष्यवाणी


इस महायुद्ध का सबसे बड़ा और सीधा असर कच्चे तेल (Crude Oil) के बाजार पर देखने को मिला है। सोमवार को कच्चे तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई थीं। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान के बाद कीमतों में मामूली गिरावट आई, जिसमें उन्होंने कहा था कि "यह युद्ध जल्द खत्म होगा, लेकिन इस हफ्ते नहीं।" इसका साफ मतलब है कि फिलहाल युद्ध रुकने के आसार नहीं हैं।


कच्चे तेल की कीमतें इस महीने लगभग 35 प्रतिशत तक बढ़ चुकी हैं। मंगलवार दोपहर तक क्रूड ऑयल करीब 87 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया था। तेल महंगा होने से ट्रांसपोर्टेशन, बिजली और निर्माण कार्य महंगे हो गए हैं, जिससे खाने-पीने की चीजों से लेकर आम जरूरत के सामानों के दाम भी बढ़ने लगे हैं।


पश्चिम एशिया से बाहर निकली युद्ध की आग, 14 देश चपेट में


युद्ध शुरू होने के बाद से ही ईरान चुन-चुन कर उन देशों पर हमले कर रहा है, जहां अमेरिकी सेना के बेस कैंप हैं। वहीं, अमेरिका और इजरायल उन इलाकों पर बमबारी कर रहे हैं जहां ईरान समर्थित संगठन सक्रिय हैं। अब तक यह युद्ध ईरान, इजरायल और अमेरिका के अलावा साइप्रस, लेबनान, इराक, कुवैत, जॉर्डन, बहरीन, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), सीरिया, कतर और ओमान तक फैल चुका है।


अब समंदर और अन्य देशों में भी गूंज रहे धमाके:


अजरबैजान: यहां के नाखिचेवन इलाके में ड्रोन हमला हुआ है, जिसमें 2 नागरिक घायल हुए हैं। अजरबैजान ने ईरान पर आरोप लगाया है, हालांकि ईरान ने इससे इनकार किया है।


श्रीलंका के पास समंदर में जंग: 4 मार्च की सुबह करीब 5 बजे श्रीलंका के गाले शहर के पास हिंद महासागर में एक अमेरिकी पनडुब्बी ने टॉरपीडो से हमला कर ईरान के 'देना' नामक युद्धपोत को डुबो दिया। इसमें 80 से ज्यादा ईरानी नौसैनिकों की मौत हो गई। श्रीलंका की नौसेना ने रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर कई सैनिकों की जान बचाई।


साइप्रस: यहां मौजूद ब्रिटिश एयरबेस पर भी ड्रोन से हमला किया गया है। अधिकारियों को शक है कि इसके पीछे लेबनान स्थित हिजबुल्लाह का हाथ है।


मौत का खौफनाक मंजर: कहां कितनी जानें गईं?


अल जजीरा के लाइव ट्रैकर के मुताबिक, इस युद्ध में अब तक सैकड़ों लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। 9 मार्च तक के आंकड़ों के अनुसार:


  • ईरान में 1255 लोगों की मौत।
  • अमेरिका के 8 सैनिक मारे गए।
  • इजरायल में 13 लोगों की जान गई।


इसके अलावा लेबनान में 394, जॉर्डन में 14, कतर में 16, इराक और कुवैत में 6-6, UAE में 4, सऊदी अरब में 2 और बहरीन व ओमान में 1-1 व्यक्ति की मौत हो चुकी है।


कच्चे तेल की सप्लाई चेन बुरी तरह टूटी


दुनिया के कुल तेल व्यापार का 20 प्रतिशत हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होकर गुजरता है। ईरान ने अमेरिका और यूरोप के लिए इस रास्ते को पूरी तरह बंद कर दिया है। इसके चलते कच्चे तेल की कीमतों में 10 प्रतिशत से ज्यादा का उछाल आया है। भारत के लिए यह बहुत बड़ी चिंता की बात है क्योंकि भारत का करीब 27 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल इसी रास्ते से आता है (जिसमें इराक, सऊदी अरब, UAE और कुवैत का तेल शामिल है)।


दुनियाभर के देशों में मचा हड़कंप, कड़े कदम उठाने की मजबूरी


G-7 देशों का बड़ा फैसला: तेल के गहराते संकट को देखते हुए इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) के निर्देश पर G-7 देश अपने स्ट्रैटेजिक ऑयल रिजर्व से करीब 400 मिलियन बैरल तेल बाजार में उतारने की तैयारी कर रहे हैं।


भारत में रसोई गैस की राशनिंग: भारत सरकार ने तेल और गैस कंपनियों को निर्देश दिया है कि घरेलू ग्राहकों को गैस सप्लाई में प्राथमिकता दी जाए। हाल ही में घरेलू LPG सिलेंडर के दाम 60 रुपये और कमर्शियल सिलेंडर के दाम 115 रुपये बढ़ाए गए हैं। सिलेंडर बुकिंग की लिमिट भी 14 दिन से बढ़ाकर 21 दिन कर दी गई है।


पाकिस्तान में ऐतिहासिक महंगाई: पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में पेट्रोल-डीजल के दाम एक झटके में 55 रुपये प्रति लीटर बढ़ा दिए गए हैं। सरकारी कर्मचारियों की ऑफिस हाजिरी 50 प्रतिशत कर दी गई है और हफ्ते में केवल 4 दिन ही दफ्तर खोलने के आदेश दिए गए हैं। सरकारी खर्चों में 20 प्रतिशत की कटौती की गई है।


बांग्लादेश में यूनिवर्सिटीज बंद: तेल और बिजली बचाने के लिए बांग्लादेश ने सभी सरकारी और प्राइवेट यूनिवर्सिटीज को बंद कर दिया है। ईद की छुट्टियां समय से पहले घोषित कर दी गई हैं ताकि गाड़ियों का इस्तेमाल कम हो और ईंधन बचे।


साउथ कोरिया का सख्त कदम: एशिया की बड़ी अर्थव्यवस्था साउथ कोरिया ने 30 साल में पहली बार घरेलू ईंधन की कीमतों पर 'प्राइस कैप' (अधिकतम कीमत की सीमा) लगा दी है। एविएशन सेक्टर पर सबसे तगड़ी मार, आसमान में उड़ना हुआ मुश्किल 



युद्ध के चलते भारत समेत पूरी दुनिया का एविएशन (विमानन) सेक्टर भारी संकट में आ गया है। 28 फरवरी से 9 मार्च के बीच मिडिल ईस्ट से गुजरने वाली 40 हजार से ज्यादा उड़ानें रद्द कर दी गई हैं।


ईरान, इराक, UAE, सऊदी अरब, कतर जैसे देशों ने अपना एयरस्पेस बंद कर दिया है। इसका सीधा असर भारत की इंटरनेशनल उड़ानों पर पड़ा है, क्योंकि भारत की 50 प्रतिशत उड़ानें इसी रूट से जाती हैं। सिर्फ रविवार को ही भारतीय कंपनियों ने 279 इंटरनेशनल उड़ानें रद्द कीं। स्पाइसजेट, एयर इंडिया एक्सप्रेस और अकासा एयर की कई उड़ानें प्रभावित हुई हैं।


हवाई रास्ता लंबा होने से एयरलाइंस को ज्यादा ईंधन खर्च करना पड़ रहा है। मार्च में एटीएफ (Aviation Turbine Fuel) की कीमत 6 प्रतिशत बढ़कर 96638 रुपये प्रति किलो लीटर तक पहुंच गई है। एयरलाइंस का 40 प्रतिशत खर्च केवल ईंधन पर होता है। इसका सीधा असर यात्रियों की जेब पर पड़ रहा है।


उदाहरण के लिए: भारत से न्यूयॉर्क-दिल्ली रूट का जो किराया आम दिनों में 45 हजार से 1 लाख रुपये के बीच होता था, वह अब उछलकर 1.35 लाख से 2.25 लाख रुपये तक पहुंच गया है। एयरलाइन कंपनियों के शेयर भी धड़ाम से गिरे हैं। कोरियन एयर लाइंस के शेयर 8.6 प्रतिशत, एयर न्यूजीलैंड के 7.8 प्रतिशत और कैथे पैसिफिक के 5 प्रतिशत तक टूट गए हैं।


कुल मिलाकर, अमेरिका, इजरायल और ईरान का यह युद्ध अब केवल हथियारों की लड़ाई नहीं रह गया है। यह एक वैश्विक आर्थिक युद्ध बन चुका है। अगर जल्द ही कोई शांति समझौता नहीं होता है, तो दुनियाभर में महंगाई अपने चरम पर होगी और आम आदमी का जीना मुहाल हो जाएगा।


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