Share Market Crash: शेयर बाजार में भारी गिरावट। सेंसेक्स 1200 अंक टूटा और निफ्टी 24,900 के नीचे फिसला। ईरान-इजराइल युद्ध और कच्चे तेल में उछाल सहित 4 बड़े कारण जानें।
नई दिल्ली: भारतीय शेयर बाजार में 2 मार्च का दिन निवेशकों के लिए भारी निराशा लेकर आया। सुबह से ही बाजार में ऐसा भूचाल आया कि हर तरफ बिकवाली मच गई। कारोबार के दौरान सेंसेक्स करीब 1200 अंक क्रैश हो गया। वहीं, निफ्टी ने भी 350 अंकों से ज्यादा का गोता लगाया और 24,900 के अहम स्तर के नीचे जा लुढ़का।
मेटल सेक्टर को छोड़ दें, तो बाजार का कोई भी सेक्टर लाल निशान (नुकसान) से बच नहीं पाया। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी 0.8% तक की तगड़ी गिरावट देखी गई। सुबह 10:45 बजे के आसपास बीएसई सेंसेक्स 1.44% गिरकर 80,116.38 पर और निफ्टी 1.41% टूटकर 24,824.30 पर कारोबार कर रहा था।
शेयर बाजार के इस तरह क्रैश होने के पीछे ये 4 बड़े कारण हैं:
1. ईरान-इजराइल युद्ध और कच्चे तेल में आग
बाजार गिरने का सबसे बड़ा कारण पश्चिम एशिया (Middle East) में भड़की जंग है। इजराइल और अमेरिका के हवाई हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद हालात बेकाबू हो गए हैं। ईरान ने इसके जवाब में मिसाइलें दागी हैं।
इस तनाव का सीधा असर कच्चे तेल (Crude Oil) पर पड़ा है। ब्रेंट क्रूड 7% से ज्यादा उछलकर 14 महीनों के टॉप 82.40 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है। ईरान ने 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) को बंद करने का ऐलान किया है, जहां से भारत का 40% तेल आता है। तेल महंगा होने से पेंट, टायर, एविएशन और केमिकल कंपनियों के शेयर धड़ाम हो गए।
2. कमजोर रुपया और बढ़ता बॉन्ड यील्ड
युद्ध के डर से विदेशी मुद्रा बाजार में भी हड़कंप है। अमेरिकी डॉलर के सामने भारतीय रुपया काफी कमजोर हो गया है। डॉलर इंडेक्स 97.9 पर पहुंच गया है। रॉयटर्स के मुताबिक, रुपया 91.9875 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक जा सकता है, जिसे रोकने के लिए RBI को बीच में आना पड़ सकता है। इसके अलावा सरकारी बॉन्ड यील्ड बढ़ने से भी शेयर बाजार से पैसा निकल रहा है।
3. विदेशी निवेशकों (FIIs) की ताबड़तोड़ बिकवाली
विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) डर के मारे भारतीय बाजार से अपना पैसा तेजी से निकाल रहे हैं। 27 फरवरी को ही विदेशी निवेशकों ने 7536.4 करोड़ रुपये के शेयर बेच डाले। हालांकि, राहत की बात ये रही कि हमारे घरेलू निवेशकों (DII) ने 12292.8 करोड़ रुपये की खरीदारी कर बाजार को पूरी तरह डूबने से बचा लिया।
4. VIX इंडेक्स में तेज उछाल
बाजार में डर और घबराहट को मापने वाला 'India VIX' इंडेक्स 15% से ज्यादा उछलकर 15.78 पर पहुंच गया है। जब भी यह इंडेक्स तेजी से बढ़ता है, तो इसका मतलब है कि निवेशक डरे हुए हैं और बाजार में भारी उतार-चढ़ाव आ सकता है।
अब निवेशकों को क्या करना चाहिए?
जियोजित इनवेस्टमेंट्स के वीके विजयकुमार के मुताबिक, युद्ध के कारण बाजार में घबराहट जरूर है, लेकिन ऐसे समय में डरकर अपने शेयर बेचना सबसे बड़ी गलती होगी। इतिहास गवाह है कि कोविड, रूस-यूक्रेन युद्ध या गाजा संकट जैसी घटनाओं का असर बाजार पर 6 महीने से ज्यादा नहीं रहता। अगर बाजार और गिरता है, तो इसे एक मौके की तरह देखें। बैंकिंग, ऑटो और डिफेंस जैसी मजबूत कंपनियों के शेयर धीरे-धीरे खरीदे जा सकते हैं।
वहीं ब्रिकवर्क रेटिंग्स के राजीव शरण का कहना है कि भारत अपना 90% तेल बाहर से खरीदता है। अगर क्रूड ऑयल लंबे समय तक महंगा रहा, तो देश में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ेंगे और महंगाई भी आसमान छू सकती है।
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