Share Market Crash: 22,000 तक धड़ाम हो सकता है Nifty! शेयर बाजार में भूचाल के 4 बड़े कारण, जानें एक्सपर्ट्स की चेतावनी

MoneySutraHub Team

 Nifty Prediction: शेयर बाजार में भारी गिरावट का दौर जारी है। एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि निफ्टी 22,000 तक गिर सकता है। ग्लोबल टेंशन, कच्चे तेल में उछाल और बिकवाली के कारण मार्केट पस्त है। जानें शेयर बाजार का पूरा हाल।


Nifty Prediction

मुंबई, 27 मार्चः शेयर बाजार में इन दिनों निवेशकों के पसीने छूट रहे हैं। लाल निशान पर बंद होते बाजार अब एक आम बात सी हो गई है। गिरावट का जो सिलसिला शुरू हुआ है, वह फिलहाल थमता हुआ नजर नहीं आ रहा है। लाखों करोड़ रुपये स्वाहा हो चुके हैं और अब मार्केट एक्सपर्ट्स ने एक ऐसी चेतावनी दी है, जिसने रिटेल निवेशकों की नींद उड़ा दी है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले हफ्ते में निफ्टी-50 (Nifty 50) इंडेक्स फिसलकर 22,000 के स्तर तक जा सकता है।


शुक्रवार, 27 मार्च को बाजार में जो भारी बिकवाली देखी गई, उसने यह साफ कर दिया है कि मार्केट का सेंटीमेंट इस वक्त बेहद कमजोर है। पश्चिम एशिया (Middle East) में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की आग उगलती कीमतें और लगातार कमजोर होता रुपया। ये वो फैक्टर्स हैं जो शेयर बाजार की कमर तोड़ रहे हैं। आइए विस्तार से समझते हैं कि आखिर बाजार में यह भूचाल क्यों आया है और आगे के लिए एक्सपर्ट्स की क्या राय है।


शुक्रवार को बाजार का हाल: निवेशकों के डूबे पैसे


शुक्रवार, 27 मार्च का दिन शेयर बाजार के निवेशकों के लिए 'ब्लैक फ्राइडे' से कम नहीं रहा। सुबह से ही बाजार में भारी बिकवाली का दबाव देखा गया।


सेंसेक्स (Sensex): बीएसई (BSE) का प्रमुख इंडेक्स सेंसेक्स 1,690.23 अंक यानी करीब 2.25% की भारी गिरावट के साथ 73,583.22 के स्तर पर जाकर बंद हुआ। इंट्राडे (दिन के कारोबार) के दौरान तो सेंसेक्स एक समय 1,739 अंकों तक गोता लगा चुका था। यह आंकड़ा बताता है कि बाजार में पैनिक सेलिंग किस कदर हावी थी।


निफ्टी (Nifty): दूसरी तरफ, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 486.85 अंक यानी 2.09% टूट गया और 22,819.60 के स्तर पर आ गिरा।

यह भारी भरकम गिरावट अचानक नहीं हुई है, बल्कि यह उस निगेटिव सेंटीमेंट का नतीजा है जो पिछले कई हफ्तों से बाजार में बन रहा था।


लगातार पांचवें हफ्ते नुकसान में शेयर बाजार


अगर आप सोच रहे हैं कि यह सिर्फ एक-दो दिन की गिरावट है, तो आप गलत हैं। यह लगातार 5वां हफ्ता रहा जब सेंसेक्स और निफ्टी, दोनों ही इंडेक्स लाल निशान (नुकसान) के साथ बंद हुए। शेयर बाजार के जानकारों के मुताबिक, पिछले 8 महीनों में यह बाजार के गिरने का सबसे लंबा सिलसिला है। इस पूरे एक हफ्ते की बात करें तो सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में ही लगभग 1.3% की गिरावट दर्ज की गई है।


फरवरी से अब तक 9.5% स्वाहा हुआ बाजार


बाजार में असली खौफ 28 फरवरी के बाद से शुरू हुआ। दरअसल, इस दिन के बाद से अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच तनाव अपने चरम पर पहुंच गया। दुनिया में युद्ध के हालात बनने लगे। इस ग्लोबल टेंशन का सीधा असर भारत के शेयर बाजार पर पड़ा। तब से लेकर अब तक, यानी पिछले कुछ ही समय में शेयर बाजार करीब 9.5% तक गिर चुका है।


आखिर क्यों आ रही है शेयर बाजार में इतनी बड़ी गिरावट?  


बाजार के इस तरह धड़ाम होने के पीछे कोई एक वजह नहीं है, बल्कि कई निगेटिव फैक्टर्स एक साथ काम कर रहे हैं। आइए इन्हें आसान भाषा में समझते हैं:


Why is the stock market falling so much?


1) अमेरिका-ईरान और इजराइल का तनाव: शेयर बाजार को सबसे ज्यादा डर अनिश्चितता से लगता है। पश्चिम एशिया में इस वक्त युद्ध जैसे हालात हैं। ग्लोबल मार्केट डरा हुआ है कि अगर यह संघर्ष और बढ़ा, तो पूरी दुनिया की सप्लाई चेन ठप हो जाएगी। इसी डर के कारण विदेशी निवेशक पैसा निकाल रहे हैं।


2) कच्चे तेल (Crude Oil) की आग उगलती कीमतें: युद्ध के डर से कच्चे तेल के दाम आसमान छू रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के पार बना हुआ है। भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल आयात करता है। महंगा तेल मतलब भारत का इंपोर्ट बिल बढ़ना। इससे देश में महंगाई बढ़ने और चालू खाता घाटा (Current Account Deficit) बढ़ने की चिंता पैदा हो गई है, जो सीधे तौर पर कंपनियों के मुनाफे को कम करता है।


3) लगातार कमजोर होता रुपया: अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया लगातार कमजोर हो रहा है। जब भी रुपया कमजोर होता है, विदेशी निवेशकों (FIIs) के लिए भारतीय बाजार में निवेश करना घाटे का सौदा लगने लगता है। इसके कारण बाजार में पैनिक और बढ़ता है।


4) विदेशी निवेशकों (FIIs) की ताबड़तोड़ बिकवाली: विदेशी संस्थागत निवेशक भारतीय बाजार से अपना पैसा तेजी से निकाल रहे हैं और सेफ एसेट (जैसे सोना या अमेरिकी बॉन्ड) में लगा रहे हैं। जब मार्केट से एक साथ इतना बड़ा पैसा बाहर जाता है, तो लिक्विडिटी का संकट पैदा होता है और बाजार धड़ाम हो जाता है।


अहम सपोर्ट लेवल पर खड़ा है निफ्टी: टूटते ही मचेगा हाहाकार


टेक्निकल तौर पर बात करें तो इस समय निफ्टी बिल्कुल किनारे पर खड़ा है। मार्केट एक्सपर्ट्स का साफ कहना है कि निफ्टी अपने बहुत ही अहम 'सपोर्ट लेवल' के आसपास ट्रेड कर रहा है। सपोर्ट लेवल वह बिंदु होता है जहां से आमतौर पर बाजार वापस ऊपर बाउंस करता है, लेकिन अगर यह टूट जाए, तो गिरावट बहुत तेज हो जाती है।


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रेलिगेयर ब्रोकिंग (Religare Broking) के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट (रिसर्च), अजीत मिश्रा ने बाजार की नब्ज पकड़ते हुए बताया कि निफ्टी का तत्काल सपोर्ट 22,500 के आसपास है। अगर आने वाले दिनों में यह लेवल निर्णायक रूप से टूट जाता है, तो इंडेक्स सीधा 22,000 के स्तर तक नीचे गिर सकता है। वहीं, अगर बाजार ऊपर जाने की कोशिश करता है, तो 23,000 पहला रेजिस्टेंस (रुकावट) होगा और 23,500 का स्तर एक बेहद मजबूत दीवार की तरह काम करेगा।


तकनीकी चार्ट दे रहे हैं बड़ी कमजोरी का इशारा


चॉइस ब्रोकिंग (Choice Broking) के एनालिस्ट्स ने चार्ट को देखकर बताया है कि निफ्टी ने एक बड़ा 'बेयरिश कैंडल' (Bearish Candle) बनाया है। इस कैंडल में 'लोअर हाई' और ‘लोअर लो' पैटर्न दिख रहा है। इसका सीधा सा मतलब यह है कि बाजार ने बीच में जो थोड़ी बहुत रिकवरी दिखाई थी, वह अब खत्म हो चुकी है और गिरावट का ट्रेंड फिर से हावी हो गया है।


एनालिस्ट्स के अनुसार, आने वाले हफ्तों में निफ्टी 22,450 से 23,850 के दायरे में ऊपर-नीचे हो सकता है। लेकिन खतरे की घंटी तब बजेगी जब 22,471 का पिछला निचला स्तर टूटेगा। अगर ऐसा हुआ तो गिरावट और गहरी हो जाएगी। इसके बाद इंडेक्स 22,100 और यहां तक कि 21,800 तक भी गोता लगा सकता है।


वहीं, एचडीएफसी सिक्योरिटीज (HDFC Securities) के टेक्निकल रिसर्च एनालिस्ट नागराज शेट्टी का भी यही मानना है। उनका कहना है कि हालिया पुलबैक (हल्की तेजी) के बाद बाजार का ट्रेंड फिर से पूरी तरह कमजोर हो चुका है। अगले हफ्ते निफ्टी आराम से 22,450 या उससे भी नीचे फिसल सकता है। निवेशकों को ध्यान रखना चाहिए कि पोजिशनल सपोर्ट 22,000 पर है, जबकि ऊपर की तरफ 23,200 के आसपास बाजार को कड़ा रेजिस्टेंस देखने को मिलेगा।


निवेशकों को क्या करना चाहिए?


शेयर बाजार के इस मौजूदा हालात को देखकर यह साफ है कि आने वाला समय बहुत उतार-चढ़ाव (Volatility) भरा रहने वाला है। जब तक ग्लोबल टेंशन कम नहीं होती और कच्चे तेल के दाम 100 डॉलर के नीचे नहीं आते, बाजार में कोई बड़ी और स्थायी तेजी की उम्मीद करना जल्दबाजी होगी।


रिटेल निवेशकों (आम निवेशकों) के लिए यह समय बहुत सावधानी से कदम बढ़ाने का है। ऐसे समय में एक साथ बड़ा पैसा लगाने (Lump sum investment) से बचना चाहिए। जो लोग लंबी अवधि के निवेशक हैं, उन्हें अच्छी और मजबूत कंपनियों (Blue-chip stocks) पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि गिरावट में अच्छे शेयर सस्ते दाम पर मिलने का मौका भी मिलता है। निफ्टी के 22,500 और 22,000 के लेवल्स पर हर ट्रेडर और निवेशक की पैनी नजर होनी चाहिए। बाजार के ट्रेंड को फॉलो करें और इस समय लालच में आकर कोई भी रिस्की ट्रेड लेने से बचें।


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डिस्क्लेमर: यहां पर दिए गए विचार और इन्वेस्टमेंट सलाह इन्वेस्टमेंट प्रोफेशनल्स के अपने विचार और सलाह हैं। MoneysutraHub.in यूज़र्स को सलाह देता है कि कोई भी इन्वेस्टमेंट का फैसला लेने से पहले किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह लें।




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