डॉलर के आगे पस्त हुआ रुपया: कच्चे तेल में हलचल और विदेशी निवेशकों की 4 बिलियन डॉलर की बिकवाली का असर

MoneySutraHub Team

 Indian Rupee: कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और विदेशी निवेशकों द्वारा 4 बिलियन डॉलर निकालने से भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 91.94 पर खुला। जानिए पूरी खबर।

Indian Rupee


नई दिल्लीः बुधवार, 11 मार्च को भारतीय रुपये की शुरुआत निराशाजनक रही। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होकर खुला। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में हो रही उथल-पुथल ने भारतीय करेंसी पर भारी दबाव बना दिया है।


मार्केट के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, रुपया अमेरिकी डॉलर के सामने 91.94 के स्तर पर खुला। यह अपने पिछले बंद भाव 91.81 से 0.14% कम है।


रुपये में गिरावट की मुख्य वजहें


करेंसी ट्रेडर्स और एक्सपर्ट्स का मानना है कि रुपये की इस कमज़ोरी के पीछे दो सबसे बड़े कारण हैं:


विदेशी निवेशकों की भारी निकासी: इस महीने अब तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने भारतीय शेयर बाजार से लगभग 4 बिलियन डॉलर निकाल लिए हैं। इससे लोकल करेंसी पर दबाव काफी बढ़ गया है।


ईरान संकट और कच्चा तेल: ईरान विवाद और सप्लाई रुकने की चिंताओं के कारण ब्रेंट क्रूड ऑयल कुछ समय के लिए 120 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया था। हालांकि, अब यह गिरकर लगभग 88 डॉलर पर आ गया है।


भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए तेल इम्पोर्ट पर बहुत ज्यादा निर्भर है। ऐसे में तेल की कीमतों में आई इस हालिया गिरावट से रुपये को थोड़ी राहत जरूर मिली है, लेकिन विदेशी बिकवाली ने इस फायदे को कम कर दिया है।


कच्चा तेल क्यों सस्ता हुआ?


कच्चे तेल की कीमतों में यह गिरावट कुछ खास वजहों से आई है। इनमें युद्ध शांत होने की उम्मीद, G7 देशों द्वारा रणनीतिक तेल भंडार (Strategic Oil Reserve) जारी करने की संभावना और होर्मुज जलडमरूमध्य में बदल रहे हालात शामिल हैं। इसके अलावा, ग्लोबल रिस्क सेंटीमेंट में तब सुधार दिखा जब इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) ने तेल की कीमतों को कंट्रोल करने के लिए अपने इतिहास का सबसे बड़ा ऑयल रिजर्व जारी करने का प्रस्ताव रखा।


एक्सपर्ट्स की चेतावनी: अभी भी मंडरा रहा है खतरा


दिग्गज ब्रोकरेज फर्म मॉर्गन स्टेनली (Morgan Stanley) ने निवेशकों को सावधान किया है। अपने एक डेली नोट में उन्होंने कहा कि भविष्य का आउटलुक अभी भी पूरी तरह अनिश्चित है। तेल सप्लाई में राहत की कोई पक्की गारंटी नहीं है, क्योंकि अमेरिका और ईरान की तरफ से तनाव कम होने को लेकर अभी भी मिले-जुले संकेत ही मिल रहे हैं।


आगे क्या होगा?


मार्केट से जुड़े लोगों का कहना है कि शॉर्ट टर्म में रुपया काफी अस्थिर (Volatile) रह सकता है। आगे रुपये की चाल पूरी तरह से कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी निवेशकों के पैसे के फ्लो और सेंट्रल बैंक (RBI) के अगले कदमों पर निर्भर करेगी।


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