India FDI rules relaxed: मोदी सरकार ने चीन और पाकिस्तान समेत पड़ोसी देशों के लिए FDI नियमों में बड़ी छूट दी है। अब विदेशी कंपनियों को निवेश के लिए पूर्व मंजूरी की जरूरत नहीं होगी।
नई दिल्ली: भारत सरकार ने विदेशी निवेश (FDI) को लेकर एक बहुत बड़ा और अहम फैसला लिया है। 10 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में एक नया नियम पास किया गया। इस नए नियम के तहत चीन समेत भारत के सभी पड़ोसी देशों के लिए डायरेक्ट फॉरेन इन्वेस्टमेंट (FDI) के नियमों में बड़ी ढील दी गई है। इस फैसले से देश में विदेशी निवेश के नए रास्ते खुलने की पूरी उम्मीद है।
किन देशों को मिलेगा इस छूट का फायदा?
सरकार की नई गाइडलाइन का सीधा असर भारत की सीमा से लगे देशों पर पड़ेगा। इन देशों में चीन, बांग्लादेश, पाकिस्तान, भूटान, नेपाल, म्यांमार और अफगानिस्तान शामिल हैं।
FDI नियमों में क्या बदलाव हुआ है?
पहले इन पड़ोसी देशों की कंपनियों को भारत में किसी भी सेक्टर में पैसा लगाने से पहले सरकार से खास परमिशन (पूर्व मंजूरी) लेनी पड़ती थी। लेकिन अब अपडेटेड गाइडलाइन के मुताबिक, यह पाबंदी हटा दी गई है। अब इन देशों के शेयरधारकों वाली विदेशी कंपनियों को भारत में निवेश करने के लिए सरकार की अनिवार्य मंजूरी की जरूरत नहीं होगी। इससे बिजनेस करना आसान होगा और विदेशी निवेश तेजी से आ सकेगा।
गलवान विवाद और चीनी ऐप्स पर बैन की यादें
आपको याद होगा कि जून 2020 में गलवान घाटी में हुए हिंसक विवाद के बाद भारत और चीन के रिश्तों में काफी तनाव आ गया था। इसके बाद ही भारत सरकार ने चीन से आने वाले निवेश पर सख्त पाबंदियां लगा दी थीं। साथ ही सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए टिकटॉक और वीचैट जैसे कई पॉपुलर चीनी ऐप्स को भी भारत में बैन कर दिया गया था।
भारत में चीन का निवेश अभी कितना है?
भले ही नियमों में अब छूट मिल गई हो, लेकिन भारत के कुल FDI में चीन का हिस्सा अभी भी बहुत कम है। आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल 2000 से लेकर अब तक चीन से सिर्फ 2.51 अरब अमेरिकी डॉलर का डायरेक्ट निवेश आया है। दिसंबर 2025 तक के आंकड़ों के अनुसार, कुल विदेशी निवेश में चीन की हिस्सेदारी मात्र 0.32 प्रतिशत ही है।
व्यापार में चीन का दबदबा अब भी बरकरार
निवेश कम होने के बावजूद, भारत और चीन के बीच व्यापार लगातार बढ़ रहा है। तमाम भू-राजनीतिक तनावों के बाद भी चीन भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार बना हुआ है। आइए व्यापार के आंकड़ों पर एक नजर डालते हैं:
साल 2024-25 के आंकड़े: इस दौरान भारत से चीन को होने वाला निर्यात 14.5% गिरकर 14.25 अरब डॉलर रह गया (जो पिछले साल 16.66 अरब डॉलर था)। वहीं, चीन से आयात 11.52% बढ़कर 113.45 अरब डॉलर हो गया। इसके नतीजे में व्यापार घाटा (Trade Deficit) बढ़कर 99.2 अरब डॉलर पर पहुंच गया।
साल 2025-26 के आंकड़े: इस अवधि में भारत का चीन को निर्यात 38.37% की शानदार छलांग लगाकर 15.88 अरब डॉलर तक पहुंच गया। हालांकि, आयात भी 13.82% बढ़कर 108.18 अरब डॉलर हो गया। इस वजह से व्यापार घाटा 92.3 अरब डॉलर के उच्च स्तर पर बना रहा।
सरकार का यह कदम साफ दिखाता है कि भारत अपनी अर्थव्यवस्था को और ज्यादा खोल रहा है। पड़ोसी देशों के लिए FDI नियमों को आसान बनाने से न सिर्फ व्यापारिक प्रक्रियाएं तेज होंगी, बल्कि देश के अलग-अलग सेक्टर्स में विदेशी पैसा भी आएगा। यह भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार बढ़ाने के लिए एक मास्टरस्ट्रोक साबित हो सकता है।
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