FPI selling, Indian stock market: मार्च 2026 में विदेशी निवेशकों (FPI) ने भारतीय शेयर बाजार से 88180 करोड़ रुपये निकाल लिए हैं। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और पश्चिमी एशिया के तनाव ने बाजार में घबराहट पैदा कर दी है।
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| FPI selling, Indian stock market |
नई दिल्ली, 22 मार्चः भारतीय शेयर बाजार इन दिनों भारी उतार चढ़ाव का सामना कर रहा है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) लगातार बाजार से अपना पैसा निकाल रहे हैं। मार्च 2026 में 20 तारीख तक ही इन निवेशकों ने 88180 करोड़ रुपये की बंपर बिकवाली कर दी है। साल 2026 में अब तक 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की पूंजी भारतीय बाजार से बाहर जा चुकी है। इस भारी बिकवाली के पीछे पश्चिमी एशिया में बढ़ता भू राजनीतिक तनाव सबसे बड़ा कारण है। इसके अलावा होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और डॉलर के मुकाबले रुपये का 92 के स्तर तक गिरना भी बाजार के लिए नकारात्मक साबित हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन वैश्विक कारणों से आने वाले दिनों में भी बाजार पर दबाव देखने को मिल सकता है।
भारतीय शेयर बाजार इन दिनों एक बेहद मुश्किल दौर से गुजर रहा है। विदेशी निवेशकों का भारतीय बाजार से तेजी से मोहभंग होता दिख रहा है। लगातार होती बिकवाली ने छोटे से लेकर बड़े निवेशकों तक की नींद उड़ा दी है। मार्च के महीने में फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPI) ने भारतीय शेयरों से 88180 करोड़ रुपये निकाल लिए हैं। अगर हम इसे डॉलर में बदल कर देखें तो यह रकम करीब 9.6 अरब डॉलर के आसपास बैठती है। साल 2026 की शुरुआत से ही बाजार में यह भारी बिकवाली देखी जा रही है और अब तक एक लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम बाजार से पूरी तरह बाहर जा चुकी है।
यह कोई एक दिन की बात नहीं है। 20 मार्च तक हर कारोबारी सत्र में FPI ने केवल शेयर बेचे हैं। बाजार में रोज पैसा डाला नहीं बल्कि निकाला गया है। यह एक ऐसा ट्रेंड है जिसने भारतीय अर्थव्यवस्था और बाजार की स्थिरता पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
हैरानी की बात यह है कि ठीक एक महीने पहले बाजार की तस्वीर बिल्कुल इसके उलट थी। नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (NSDL) के आंकड़ों पर अगर हम नजर डालें तो फरवरी में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों में 22615 करोड़ रुपये का तगड़ा निवेश किया था। वह निवेश 17 महीनों के उच्चतम स्तर पर था। उस समय लग रहा था कि बाजार नई ऊंचाइयों को छुएगा। लेकिन मार्च आते ही हवा का रुख पूरी तरह बदल गया और बाजार में एक तरह का हाहाकार मच गया।
क्यों हो रही है इतनी भारी बिकवाली?
इस बड़ी बिकवाली के पीछे कोई एक कारण नहीं है। दुनिया भर में इस वक्त कई ऐसी चीजें हो रही हैं जिनका सीधा असर भारत जैसे उभरते बाजारों पर पड़ रहा है। सबसे बड़ी और डरावनी वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता हुआ तनाव है। युद्ध और संघर्ष की स्थिति ने वैश्विक व्यापार को डरा दिया है।
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक है जहां से बड़े पैमाने पर तेल की सप्लाई होती है। इसके बंद होने की वजह से कच्चे तेल की कीमतों में मानो आग लग गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के अहम स्तर को पार कर चुका है।
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भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल दूसरे देशों से आयात करता है। ऐसे में तेल का महंगा होना भारत के लिए बहुत बुरी खबर है। तेल महंगा होने से माल ढुलाई महंगी हो जाती है जिससे हर चीज के दाम बढ़ने लगते हैं। विदेशी निवेशक इसी बात से डरे हुए हैं कि कच्चा तेल महंगा होने से भारत की आर्थिक वृद्धि धीमी पड़ सकती है और कंपनियों के मुनाफे में भारी कमी आ सकती है। इसी डर से वे अपना पैसा भारतीय बाजार से निकाल रहे हैं।
रुपये की कमजोरी और अमेरिकी बॉन्ड का असर
रुपये की लगातार गिरती कीमत ने भी बाजार की स्थिति को और खराब कर दिया है। डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 92 के स्तर के आसपास पहुंच गया है। जब रुपया कमजोर होता है तो विदेशी निवेशकों को नुकसान होता है। ऐसा इसलिए क्योंकि जब वे अपना पैसा वापस अपने देश ले जाते हैं तो उन्हें कम डॉलर मिलते हैं। इसलिए वे और ज्यादा नुकसान से बचने के लिए जल्दी जल्दी शेयर बेच रहे हैं।
इसके साथ ही अमेरिका में बॉन्ड पर मिलने वाला रिटर्न यानी यील्ड भी लगातार बढ़ रहा है। अमेरिकी बॉन्ड को दुनिया में निवेश का सबसे सुरक्षित तरीका माना जाता है। जब इन पर मिलने वाला ब्याज बढ़ने लगता है तो बड़े विदेशी निवेशक भारत या अन्य एशियाई बाजारों में रिस्क लेने के बजाय अमेरिका में पैसा लगाना सुरक्षित और बेहतर समझते हैं।
बाजार के जानकारों की क्या है राय
शेयर बाजार के विशेषज्ञ भी इस स्थिति को लेकर चिंतित हैं। न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक एंजल वन के सीनियर फंडामेंटल एनालिस्ट वकारजावेद खान का साफ कहना है कि इस निकासी की मुख्य वजह पश्चिम एशिया का तनाव है। महंगा कच्चा तेल और 92 पर पहुंचा रुपया निवेशकों को जोखिम लेने से रोक रहा है।
मॉर्निंगस्टार इनवेस्टमेंट रिसर्च इंडिया के प्रिसिंपल मैनेजर रिसर्च हिमांशु श्रीवास्तव ने इस स्थिति को दूसरे नजरिए से समझाया है। उन्होंने अमेरिकी बॉन्ड यील्ड को इस भारी बिकवाली का मुख्य कारण बताया है। उनके मुताबिक ज्यादा यील्ड के कारण डॉलर वाली संपत्तियों का आकर्षण काफी बढ़ गया है और यही वजह है कि पैसा भारत जैसे बाजारों से निकलकर अमेरिका जा रहा है।
जियोजीत इनवेस्टमेंट्स के चीफ इनवेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वी के विजयकुमार भी इसी तरह की चिंता जताते हैं। उनका मानना है कि पश्चिम एशिया के संघर्ष ने इस बिकवाली को काफी तेज कर दिया है। वैश्विक बाजारों की कमजोरी और कंपनियों की कमाई पर कच्चे तेल के असर की आशंका ने निवेशकों के भरोसे को बुरी तरह तोड़ दिया है।
पहले भी हो चुकी है भारी बिकवाली
अगर हम पिछले कुछ महीनों के आंकड़ों के पन्ने पलटें तो स्थिति और भी साफ हो जाती है। यह बिकवाली अचानक शुरू नहीं हुई है बल्कि इसका सिलसिला पहले से बन रहा था।
जनवरी 2026 में FPI ने 35962 करोड़ रुपये निकाले थे। साल 2025 के अंत में भी हालात बहुत अच्छे नहीं थे। दिसंबर 2025 में 22611 करोड़ रुपये और नवंबर 2025 में 3765 करोड़ रुपये की निकासी बाजार से हुई थी।
हालांकि बाजार के लिए एक छोटी सी राहत की बात सिर्फ इतनी है कि मार्च की यह निकासी अभी तक के सबसे बड़े रिकॉर्ड से थोड़ी कम है। याद दिला दें कि अक्टूबर 2024 में विदेशी निवेशकों ने रिकॉर्ड 94017 करोड़ रुपये की निकासी की थी जिसने बाजार को हिला कर रख दिया था।
शेयर बाजार में इस वक्त घबराहट का माहौल है। जब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हालात पूरी तरह सामान्य नहीं होते और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी नहीं आती बाजार पर यह दबाव बना रह सकता है। आम निवेशकों को इस समय बाजार की हर खबर पर नजर रखनी चाहिए और बाजार के शांत होने का इंतजार करना चाहिए।
डिस्क्लेमर: यहां पर दिए गए विचार और इन्वेस्टमेंट सलाह इन्वेस्टमेंट प्रोफेशनल्स के अपने विचार और सलाह हैं। MoneysutraHub.in यूज़र्स को सलाह देता है कि कोई भी इन्वेस्टमेंट का फैसला लेने से पहले किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह लें।


