FPI Selling: विदेशी निवेशकों ने शेयर बाजार में मचाई तबाही, 15 दिन में निकाले 52704 करोड़, जानें क्यों भाग रहे हैं FPI

MoneySutraHub Team

 FPI Selling in India: मार्च के शुरुआती 15 दिनों में FPI ने भारतीय शेयर बाजार से 52704 करोड़ रुपये निकाले। पश्चिम एशिया का तनाव और महंगा कच्चा तेल बनी बड़ी वजह। जानिए बाजार का पूरा हाल।

FPI Selling in India

नई दिल्ली, 15 मार्चः भारतीय शेयर बाजार में इन दिनों भारी बिकवाली का माहौल है और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक लगातार अपना पैसा निकाल रहे हैं। मार्च के शुरुआती 15 दिनों में ही विदेशी निवेशकों ने बाजार से 52704 करोड़ रुपये की भारी-भरकम रकम निकाल ली है। यह आंकड़ा बाजार में छाई घबराहट को साफ दिखाता है।


  • इससे पहले फरवरी का महीना बाजार के लिए काफी राहत भरा रहा था। फरवरी में FPI ने 22615 करोड़ रुपये का निवेश किया था जो पिछले 17 महीनों का सबसे ऊंचा स्तर था। लेकिन अब स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। अगर हम पिछले कुछ महीनों के आंकड़ों पर नजर डालें तो गिरावट का यह ट्रेंड ज्यादा साफ हो जाता है। डिपॉजिटरी के आंकड़ों के मुताबिक विदेशी निवेशकों ने जनवरी में 35962 करोड़ रुपये निकाले थे। दिसंबर 2025 में 22611 करोड़ और नवंबर 2025 में 3765 करोड़ रुपये की निकासी हुई थी। मार्च में 13 तारीख तक यह आंकड़ा 52704 करोड़ को पार कर चुका है।


  • आखिर विदेशी निवेशक अचानक इतनी तेजी से पैसा क्यों निकाल रहे हैं। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव है। होर्मुज स्ट्रेट जैसे अहम समुद्री मार्ग पर लंबे समय तक विवाद चलने की आशंका ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। इसका सीधा असर कच्चे तेल की सप्लाई चेन पर पड़ा है। ब्रेंट क्रूड की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जा चुकी हैं। इसके साथ ही डॉलर के मुकाबले रुपया भी कमजोर होकर 92 के स्तर के आसपास मंडरा रहा है।


  • जियोजीत इनवेस्टमेंट्स के चीफ इनवेस्टमेंट स्ट्रेटेजिस्ट वी के विजयकुमार का कहना है कि महंगे कच्चे तेल और गिरते रुपये से भारत की आर्थिक ग्रोथ और कंपनियों की कमाई पर बुरा असर पड़ने का डर है। इसी वजह से FPI का भरोसा डगमगाया है। पिछले 18 महीनों में विकसित और उभरते बाजारों के मुकाबले भारत से रिटर्न कम मिला है। यही कारण है कि फिलहाल विदेशी निवेशकों को ताइवान, दक्षिण कोरिया और चीन के बाजार ज्यादा सुरक्षित और आकर्षक लग रहे हैं।


  • एंजल वन के सीनियर फंडामेंटल एनालिस्ट वकारजावेद खान के अनुसार बॉन्ड यील्ड बढ़ने से भी बिकवाली तेज हुई है। हालांकि एक्सपर्ट्स का यह भी मानना है कि भारत में FPI की यह बिकवाली हमेशा के लिए नहीं है और यह शॉर्ट टर्म आउटलुक हो सकता है।


  • इस भारी बिकवाली का एक सकारात्मक पहलू भी है। फाइनेंशियल शेयरों के दाम गिरने से घरेलू निवेशकों के लिए वैल्युएशन काफी आकर्षक हो गए हैं। मार्च के बाकी दिनों के लिए बाजार का रुख सतर्क रहने वाला है। अगर पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव थोड़ा कम होता है और बैंकिंग या कंजम्पशन सेक्टर की तिमाही (Q4) कमाई उम्मीद से बेहतर रहती है तो बाजार में फिर से पैसा लौट सकता है। वरना कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और वैश्विक अनिश्चितता इस बिकवाली के दबाव को आगे भी बढ़ा सकती है।


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(डिस्क्लेमर: यह जानकारी सिर्फ न्यूज़ और एजुकेशन के उद्देश्य से दी गई है। शेयर बाजार में निवेश बाजार के जोखिमों के अधीन है। MoneysutraHub.in यूज़र्स को सलाह देता है कि कोई भी इन्वेस्टमेंट का फैसला लेने से पहले किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह लें।)


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