शेयर बाजार में मची तबाही: FIIsने 15 दिनों में निकाले 53,700 करोड़ रुपये, जानिए विदेशी निवेशकों ने कहां बेचे और कहां खरीदे शेयर

MoneySutraHub Team

 FII Selling in India: भारतीय शेयर बाजार में मार्च का महीना निवेशकों के लिए भारी उथल-पुथल भरा साबित हो रहा है। NSDL के ताजा आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने मार्च के पहले 15 दिनों में कुल 53,700 करोड़ रुपये की नेट बिकवाली की है। सबसे बड़ा झटका फाइनेंशियल और बैंकिंग सेक्टर को लगा है, जहां से 31,000 करोड़ रुपये निकाले गए हैं। इस भारी गिरावट के पीछे ईरान-मध्य पूर्व का भू-राजनीतिक तनाव, बढ़ती बॉन्ड यील्ड, कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतें और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के सख्त नियम मुख्य कारण माने जा रहे हैं। इस लेख में विस्तार से जानिए कि विदेशी निवेशकों ने ऑटो, आईटी और एफएमसीजी जैसे सेक्टरों में कितनी बिकवाली की और गिरावट के इस दौर में उन्होंने अपना पैसा किन सेक्टरों में निवेश किया है।

Share Market Crash


मुंबई, 19 मार्च: भारतीय शेयर बाजार में पिछले कुछ समय से जिस तरह की अस्थिरता (Volatility) देखने को मिल रही है, उसने रिटेल निवेशकों से लेकर बड़े फंड हाउस तक की चिंताएं बढ़ा दी हैं। जब भी बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशक (Foreign Institutional Investors - FIIs) अपना पैसा निकालते हैं, तो सेंसेक्स (Sensex) और निफ्टी (Nifty) दोनों पर भारी दबाव देखने को मिलता है।


मार्च का महीना भारतीय शेयर बाजार के लिए एक 'वेक-अप कॉल' की तरह आया है। नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (NSDL) द्वारा जारी किए गए ताजा और चौंकाने वाले आंकड़ों के अनुसार, FIIs ने मार्च के पहले पखवाड़े (शुरुआती 15 दिनों) में भारतीय इक्विटी बाजार में 53,700 करोड़ रुपये की बंपर बिकवाली की है। यह आंकड़ा सिर्फ एक नंबर नहीं है, बल्कि यह ग्लोबल मार्केट की घबराहट और भारतीय बाजार के ऊंचे वैल्युएशन पर विदेशी निवेशकों के घटते भरोसे का संकेत है। आइए इस पूरे परिदृश्य का गहराई से विश्लेषण करते हैं और समझते हैं कि इस भारी बिकवाली के पीछे के असली कारण क्या हैं।


क्यों अचानक बदला विदेशी निवेशकों का मूड? 


शेयर बाजार हमेशा भविष्य की संभावनाओं और वर्तमान के जोखिमों के बीच झूलता रहता है। फरवरी के महीने तक बाजार में एक अलग ही उत्साह था। लेकिन मार्च की शुरुआत के साथ ही ग्लोबल सेंटीमेंट पूरी तरह बदल गया। विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय बाजार हमेशा से एक आकर्षक विकल्प रहा है, लेकिन जब वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता बढ़ती है, तो विदेशी निवेशक उभरते बाजारों (Emerging Markets) से अपना पैसा निकालकर सुरक्षित जगहों (जैसे अमेरिकी बॉन्ड्स) में निवेश करना पसंद करते हैं। यही ट्रेंड हमें वर्तमान में देखने को मिल रहा है।


वर्तमान अपडेट: 53,700 करोड़ रुपये की ऐतिहासिक बिकवाली 


NSDL के डेटा ने बाजार की असल तस्वीर पेश की है। मार्च के पहले 15 दिनों के भीतर ही FIIs ने भारतीय शेयर बाजार से 53,700 करोड़ रुपये निकाल लिए हैं। इसमें सबसे ज्यादा नुकसान बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं (Financial Services) को उठाना पड़ा है।


फाइनेंशियल शेयरों में मची भगदड़: मार्च के पहले पखवाड़े में FIIs ने अकेले फाइनेंशियल शेयरों से 31,000 करोड़ रुपये से अधिक की बिकवाली की है।


फरवरी से तुलना: यह आंकड़ा इसलिए भी डराने वाला है क्योंकि ठीक एक महीने पहले, यानी फरवरी में FIIs ने इसी फाइनेंशियल सेगमेंट में 8,400 करोड़ रुपये की शुद्ध 


खरीदारी (Net Buying) की थी। कुछ ही दिनों में 8,400 करोड़ की खरीदारी का 31,000 करोड़ की बिकवाली में बदल जाना बाजार के लिए एक बड़ा झटका है।


इस भारी बिकवाली के मुख्य कारण 


बाजार के जानकारों और आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार, विदेशी निवेशकों के इस रुख के पीछे कोई एक कारण नहीं है, बल्कि कई घरेलू और वैश्विक कारणों का मिला-जुला असर (Domino Effect) है:


ईरान और मध्य पूर्व में तनाव 


ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच चल रहे कूटनीतिक और सैन्य तनाव ने वैश्विक बाजारों में डर का माहौल पैदा कर दिया है। युद्ध जैसी स्थितियों के कारण सप्लाई चेन प्रभावित होती है और निवेशक जोखिम लेने से बचते हैं।


कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें  


मध्य पूर्व में तनाव का सीधा असर कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों पर पड़ता है। भारत अपनी जरूरत का 80% से ज्यादा तेल आयात करता है। जब तेल महंगा होता है, तो भारत का आयात बिल बढ़ता है, जिससे भारतीय रुपये (INR) पर दबाव पड़ता है। कमजोर रुपया विदेशी निवेशकों के रिटर्न को कम कर देता है, इसलिए वे मुनाफावसूली करने लगते हैं।


अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल 


अमेरिका में बॉन्ड यील्ड लगातार बढ़ रही है। जब सुरक्षित माने जाने वाले अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड्स में अच्छा रिटर्न मिलने लगता है, तो विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार जैसे जोखिम भरे विकल्पों से पैसा निकालकर वहां निवेश कर देते हैं। इससे उनके ट्रेजरी पोर्टफोलियो पर निगेटिव असर पड़ रहा है।


रिजर्व बैंक (RBI) की सख्ती


भारतीय रिजर्व बैंक ने हाल ही में पूंजी बाजार (Capital Market) में कर्ज देने को लेकर नियमों को काफी सख्त कर दिया है। अनसिक्योर्ड लोन और एनबीएफसी (NBFCs) को लेकर आरबीआई के कड़े रुख के कारण बैंकिंग और फाइनेंशियल शेयरों के मुनाफे पर असर पड़ने की आशंका है। यही कारण है कि इस सेक्टर में सबसे ज्यादा बिकवाली हुई है।


महंगा वैल्युएशन और AI कंपनियों की कमी


भारतीय बाजार पिछले कुछ समय से ऐतिहासिक ऊंचाई पर ट्रेड कर रहे थे। वैल्युएशन (Valuation) काफी महंगे हो गए थे। इसके अलावा, ग्लोबल स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का बूम चल रहा है, लेकिन भारतीय शेयर बाजार में लिस्टेड AI से जुड़ी बेहतरीन कंपनियों की कमी है। इस वजह से विदेशी निवेशक ग्लोबल AI स्टॉक्स की ओर रुख कर रहे हैं।


बाजार पर असर: सेंसेक्स और निफ्टी हुए पस्त  


विदेशी निवेशकों द्वारा की गई इस 53,700 करोड़ रुपये की बिकवाली ने शेयर बाजार के लगभग हर इंडेक्स को लाल निशान में धकेल दिया है।


बेंचमार्क इंडेक्स: इस अवधि में सेंसेक्स (BSE Sensex) और निफ्टी (NSE Nifty) में लगभग 8% की भारी गिरावट दर्ज की गई है।


मिडकैप और स्मॉलकैप में हाहाकार: रिटेल निवेशकों के पसंदीदा मिडकैप (Mid Cap) और स्मॉलकैप (Small Cap) इंडेक्स में तो और भी बुरा हाल रहा है। इन दोनों इंडेक्स में लगभग 10% तक की भारी गिरावट देखने को मिली है। बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने भी इन सेगमेंट्स में 'झाग' (Froth) यानी जरूरत से ज्यादा वैल्युएशन की चेतावनी दी थी।


FII Selling in India


सेक्टर-वाइज बिकवाली के आंकड़े  


फाइनेंशियल सेक्टर के अलावा भी कई अन्य सेक्टर विदेशी निवेशकों के रडार पर रहे और वहां जमकर मुनाफावसूली की गई। मार्च के पहले पखवाड़े के आंकड़े कुछ इस प्रकार हैं:


ऑटोमोबाइल सेक्टर (Auto Sector): 4,800 करोड़ रुपये की निकासी (फरवरी में 3,586 करोड़ का निवेश हुआ था)।


टेलीकॉम सेक्टर (Telecom Sector): 3,856 करोड़ रुपये की बिकवाली (फरवरी में भी 1,881 करोड़ रुपये निकाले गए थे)।


कंस्ट्रक्शन (Construction): 2,975 करोड़ रुपये की निकासी (फरवरी में 4,487 करोड़ का भारी निवेश हुआ था)।


तेल और गैस (Oil & Gas): 2,932 करोड़ रुपये की बिकवाली दर्ज की गई।


हेल्थकेयर (Health Care): 2,436 करोड़ रुपये बाजार से निकाले गए।


एफएमसीजी (FMCG): 2,403 करोड़ रुपये की बिकवाली।


रियल एस्टेट (Realty): 2,133 करोड़ रुपये निकाले गए।


कंज्यूमर ड्यूरेबल्स (Consumer Durables): 1,727 करोड़ रुपये की निकासी।


कंस्ट्रक्शन और आईटी (IT Sector): आईटी सेक्टर से 1,263 करोड़ रुपये और कंस्ट्रक्शन संबंधित अन्य प्रोजेक्ट्स से 1,492 करोड़ रुपये की बिकवाली हुई।


बिकवाली के तूफान में भी FIIsने यहां किया निवेश 


शेयर बाजार में इस भारी गिरावट और घबराहट के बीच भी कुछ सेक्टर ऐसे रहे जहां विदेशी निवेशकों ने भरोसा जताया और अपना पैसा लगाया:


कैपिटल गुड्स (Capital Goods): इस सेक्टर में FIIs ने मार्च के पहले 15 दिनों में 3,897 करोड़ रुपये का निवेश किया। (हालांकि फरवरी में यह निवेश 12,135 करोड़ रुपये था)।


मेटल्स (Metals): इंफ्रास्ट्रक्चर की डिमांड को देखते हुए मेटल सेक्टर में 876 करोड़ रुपये का निवेश आया।


पावर सेक्टर (Power Sector): बढ़ती ऊर्जा मांग के चलते पावर सेक्टर में भी 602 करोड़ रुपये का निवेश दर्ज किया गया।


भविष्य की संभावनाएं और एक्सपर्ट्स की राय 


बाजार विश्लेषकों (Market Analysts) और ब्रोकरेज फर्मों ने मौजूदा हालात को लेकर गंभीर चिंताएं व्यक्त की हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर मध्य पूर्व में तनाव कम नहीं होता है और कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें इसी तरह ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो भारतीय कंपनियों के मार्जिन पर भारी दबाव पड़ेगा।


टॉप ब्रोकरेज फर्मों ने चेतावनी जारी की है कि महंगे कच्चे तेल के कारण इनपुट कॉस्ट (लागत) बढ़ेगी। इसके परिणामस्वरूप, वित्तीय वर्ष 2027 (FY 2027) के लिए भारतीय कंपनियों के अर्निंग अनुमानों (Earnings Estimates) में 10 से 15% तक की बड़ी गिरावट का जोखिम पैदा हो सकता है। अगर कंपनियों के मुनाफे गिरते हैं, तो बाजार का वैल्युएशन और भी महंगा लगने लगेगा, जिससे FIIs की बिकवाली आगे भी जारी रह सकती है।


शेयर बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की 53,700 करोड़ रुपये की बिकवाली कोई सामान्य घटना नहीं है। यह ग्लोबल स्तर पर चल रही अनिश्चितता, युद्ध के हालात, महंगाई और केंद्रीय बैंकों की सख्त नीतियों का सीधा परिणाम है। फाइनेंशियल शेयरों से 31,000 करोड़ की निकासी दर्शाती है कि विदेशी निवेशक अब जोखिम लेने से बच रहे हैं।


हालांकि, रिटेल निवेशकों को इस गिरावट से घबराने की बजाय इसे एक बाजार चक्र (Market Cycle) के रूप में देखना चाहिए। कैपिटल गुड्स और पावर सेक्टर में आ रहा निवेश बताता है कि भारत की बुनियादी विकास गाथा (Growth Story) में अभी भी दम है। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने पोर्टफोलियो को डायवर्सिफाई रखें, अच्छी फंडामेंटल वाली कंपनियों में निवेशित रहें और किसी भी तरह के पैनिक सेलिंग से बचें। बाजार में गिरावट लंबी अवधि के निवेशकों के लिए हमेशा एक बेहतरीन खरीदारी का अवसर भी लेकर आती है।


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