Defence Stocks: ईरान-अमेरिका तनाव के बीच क्यों सुस्त पड़े हैं डिफेंस शेयर? एक्सपर्ट्स से जानें 3 बड़े कारण

MoneySutraHub Team

 Defence Exports India: अमेरिका-ईरान तनाव के बावजूद भारतीय डिफेंस शेयरों (Defence Stocks) में गिरावट क्यों है? जानिए शेयर बाजार के एक्सपर्ट्स की राय और 3 सबसे प्रमुख कारण।

Defence Exports India

नई दिल्ली, 12 मार्चः शेयर बाजार में आम तौर पर जब भी दो देशों के बीच युद्ध या तनाव बढ़ता है, तो डिफेंस सेक्टर के शेयरों (Defence Stocks) में रॉकेट जैसी तेजी देखने को मिलती है। रूस-यूक्रेन युद्ध के समय हमने ऐसा देखा भी था। लेकिन इस बार अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बावजूद भारत के डिफेंस शेयर एकदम ठंडे पड़े हैं।


हालात यह हैं कि पिछले 2 दिनों में ही 'निफ्टी इंडिया डिफेंस इंडेक्स' 2 प्रतिशत से ज्यादा टूट गया है। गुरुवार के कारोबारी सत्र में इस इंडेक्स के 18 में से सिर्फ 5 शेयर ही हरे निशान में (मुनाफे में) रहे। डायनामेटिक टेक्नोलॉजीज (Dynamatic Technologies) और पारस डिफेंस (Paras Defence) जैसे शेयरों में भारी गिरावट देखी गई।


निर्यात रिकॉर्ड स्तर पर, फिर भी शेयर क्यों गिरे?


यह गिरावट शेयर बाजार के निवेशकों को हैरान कर रही है, क्योंकि भारत का रक्षा निर्यात लगातार बढ़ रहा है। वित्त वर्ष 2025 में भारत का डिफेंस एक्सपोर्ट 23600 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। सरकार ने साल 2029 तक इसे 50000 करोड़ रुपये तक पहुंचाने का बड़ा लक्ष्य रखा है। खाड़ी देशों में तनाव से रक्षा बजट बढ़ता है, जिसका सीधा फायदा भारतीय कंपनियों को मिलना तय है। फिर भी शेयरों में उछाल नहीं आ रहा है।


शेयर बाजार के जानकारों ने इसके 3 प्रमुख कारण बताए हैं:


1. युद्ध की तकनीक में बड़ा बदलाव


अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहे मौजूदा तनाव में युद्ध का तरीका पूरी तरह बदल गया है। अब महंगे एयरक्राफ्ट की जगह कम कीमत वाले सस्ते ड्रोन का इस्तेमाल हो रहा है। मात्र 20000 डॉलर वाले ड्रोन को रोकने के लिए कई बार लाखों डॉलर का एयर डिफेंस सिस्टम खर्च करना पड़ रहा है। इसलिए अब बाजार में किफायती 'एंटी-ड्रोन सिस्टम' और 'इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर' की मांग बढ़ रही है।


2. सिर्फ ऑर्डर नहीं, अब डिलीवरी पर है नजर


फिसडम (Fisdom) के हेड ऑफ रिसर्च निरव आर करकेरा के अनुसार, भारतीय डिफेंस कंपनियों के पास ऑर्डर्स की कोई कमी नहीं है। पहले निवेशक सिर्फ ऑर्डर मिलने की खबर से शेयर खरीद लेते थे। लेकिन अब निवेशकों का नजरिया बदल गया है। अब वे देखना चाहते हैं कि कंपनियां कितनी जल्दी और कितनी सफाई से इन ऑर्डर्स की डिलीवरी (एक्जीक्यूशन) कर पा रही हैं और उससे कितना मुनाफा कमा रही हैं।


3. सप्लाई चेन में आ रही रुकावटें


ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल (Motilal Oswal) का मानना है कि हथियारों को बनाने के लिए कई छोटे-बड़े पार्ट्स विदेशों से मंगाने पड़ते हैं। दुनिया भर में चल रहे तनाव के कारण ग्लोबल सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। पार्ट्स समय पर न मिलने से प्रोजेक्ट्स पूरे होने में देरी हो रही है, जिसका सीधा असर कंपनियों की कमाई और उनके शेयरों पर पड़ रहा है।


लंबी अवधि के लिए क्या करें निवेशक?


अगर आप डिफेंस शेयरों में निवेश करते हैं, तो घबराने की कोई बात नहीं है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि लंबे समय (लॉन्ग टर्म) के लिए डिफेंस सेक्टर की तस्वीर अभी भी बहुत मजबूत है।


रेलिगेयर ब्रोकिंग के अजीत मिश्रा के मुताबिक, मौजूदा गिरावट और सुस्ती एक मौका हो सकती है। जो कंपनियां समय पर ऑर्डर पूरे कर रही हैं और जिनका वैल्यूएशन सही है, उन मजबूत डिफेंस शेयरों को निवेशक धीरे-धीरे अपने पोर्टफोलियो में शामिल कर सकते हैं। अगली बड़ी तेजी की नींव इसी सुस्ती के बीच तैयार हो रही है।


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डिस्क्लेमर: यहां पर दिए गए विचार और इन्वेस्टमेंट सलाह इन्वेस्टमेंट प्रोफेशनल्स के अपने विचार और सलाह हैं। MoneysutraHub.in यूज़र्स को सलाह देता है कि कोई भी इन्वेस्टमेंट का फैसला लेने से पहले किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह लें।

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