US-Bangladesh Trade Deal: 12 फरवरी के चुनाव से ठीक पहले अमेरिका ने बांग्लादेश के साथ बड़ी ट्रेड डील की है। जानिए कैसे ‘जीरो टैरिफ' की शर्त और 1% की कटौती यूनुस सरकार के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती है।
US-Bangladesh Trade Deal: बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने वाले आम चुनाव से महज 48 घंटे पहले एक ऐसी खबर आई है, जिसने ढाका की राजनीति में गर्मी बढ़ा दी है। अमेरिका और बांग्लादेश के बीच एक बड़ा व्यापारिक समझौता (Trade Deal) हुआ है। सोमवार को हुए इस समझौते के तहत ट्रंप प्रशासन ने बांग्लादेशी सामानों पर लगने वाले टैरिफ (आयात शुल्क) को 20% से घटाकर 19% कर दिया है।
भले ही आंकड़ों में यह कटौती सिर्फ 1% की लग रही हो, लेकिन इसके पीछे की शर्तें और मौके बांग्लादेश की डूबती अर्थव्यवस्था के लिए किसी 'लाइफलाइन' से कम नहीं हैं। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि इस डील के क्या मायने हैं और इसका चुनाव पर क्या असर पड़ सकता है।
टेक्सटाइल सेक्टर के लिए 'छुपा हुआ खजाना'
बांग्लादेश की पूरी अर्थव्यवस्था वहां के कपड़ा उद्योग (Textile Sector) पर टिकी है। देश के कुल निर्यात में इसकी हिस्सेदारी करीब 80% है। इस नए समझौते में अमेरिका ने एक बहुत बड़ी शर्त रखी है, जो बांग्लादेश के लिए फायदेमंद है।
शर्त यह है कि अगर बांग्लादेशी गारमेंट कंपनियां कपड़े बनाने के लिए 'अमेरिकी कॉटन' (US Cotton) का इस्तेमाल करती हैं, तो उन्हें अमेरिका में अपना सामान बेचने पर 'जीरो ड्यूटी' (शून्य टैक्स) की सुविधा मिलेगी। इसका सीधा मतलब है कि बांग्लादेशी कपड़े अमेरिकी बाजार में सस्ते दाम पर बिक सकेंगे, जिससे वहां की फैक्ट्रियों में काम बढ़ेगा और लाखों नौकरियां सुरक्षित रहेंगी।
यूनुस सरकार की बड़ी कूटनीतिक जीत?
बांग्लादेश में 2024 की छात्र क्रांति और तख्तापलट के बाद से ही आर्थिक हालात काफी नाजुक बने हुए थे। अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस पिछले 9 महीनों से लगातार वाशिंगटन के संपर्क में थे ताकि अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाया जा सके।
यूनुस ने इस समझौते को एक 'ऐतिहासिक कदम' बताया है। उनका मानना है कि इससे न केवल देश में आर्थिक स्थिरता आएगी, बल्कि लाखों लोगों का रोजगार भी बचेगा। चुनाव से ठीक पहले ऐसी डील होना, यूनुस सरकार के लिए एक बड़ी कूटनीतिक जीत मानी जा रही है, जो जनता के बीच स्थिरता का संदेश देती है।
बांग्लादेश ने बदले में अमेरिका को क्या दिया?
व्यापार में ताली दोनों हाथों से बजती है। अमेरिका से राहत पाने के बदले बांग्लादेश ने भी अपने बाजार के दरवाजे खोल दिए हैं। इस समझौते के तहत
* ढाका अब अमेरिकी केमिकल्स, मेडिकल डिवाइस, गाड़ियों के पार्ट्स और खेती से जुड़े उत्पादों को प्राथमिकता देगा।
* बांग्लादेश ने वादा किया है कि वह अगले 15 सालों में अमेरिका से $15 अरब की ऊर्जा (Energy) और $3.5 अरब के कृषि उत्पाद खरीदेगा।
* विमानन क्षेत्र में भी बड़ी डील हुई है। 'बिमान बांग्लादेश' अमेरिका से 14 बोइंग (Boeing) विमान खरीदने की तैयारी कर रहा है।
भारत और वियतनाम से मुकाबले में कहां खड़ा है बांग्लादेश?
यह समझौता इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि यह भारत-अमेरिका ट्रेड डील के ठीक बाद हुआ है। तुलना करें तो भारत ने अमेरिका से 18% का टैरिफ हासिल किया है, जबकि बांग्लादेश अभी 19% पर है।
हालांकि, जानकारों का कहना है कि बांग्लादेश के पास जो 'अमेरिकी कॉटन पर जीरो टैरिफ' वाला कार्ड है, वह उसे वियतनाम और पाकिस्तान जैसे कड़े प्रतिस्पर्धियों से आगे निकाल सकता है। वियतनाम टेक्सटाइल मार्केट में बांग्लादेश का सबसे बड़ा विरोधी है, लेकिन इस शर्त के साथ बांग्लादेशी कपड़े अमेरिकी बाजार में ज्यादा प्रतिस्पर्धी हो जाएंगे।
क्या चुनाव में मिलेगा फायदा?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस आर्थिक राहत का असर 12 फरवरी को पड़ने वाले वोटों पर दिखेगा? यूनुस सरकार इसे अपनी सफलता के तौर पर पेश कर रही है। यह डील अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बांग्लादेश की साख सुधारने की दिशा में एक बड़ा कदम है। हालांकि, यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या वोटर इस कूटनीतिक जीत से प्रभावित होते हैं या फिर चुनाव के नतीजे कोई और ही कहानी बयां करेंगे।

