Donald Trump US Supreme Court Ruling: अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के पुराने टैरिफ आदेशों को रद्द कर दिया है, लेकिन ट्रंप ने ट्रेड एक्ट 1974 के तहत नया दांव खेलते हुए हर इंपोर्ट पर 10% का नया टैक्स लगा दिया है। जानिए भारत के साथ हुई ट्रेड डील और रूसी तेल विवाद पर इसका क्या असर होगा।

Donald Trump US Supreme Court Ruling
Trump Tariffs Update: अमेरिका की राजनीति और ग्लोबल इकोनॉमी में इस समय भारी उथल-पुथल मची हुई है। दुनिया के सबसे ताकतवर देश के राष्ट्रपति और वहां की सबसे बड़ी अदालत आमने-सामने आ गए हैं। अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) को एक बड़ा झटका दिया है, लेकिन ट्रंप का अंदाज बता रहा है कि वह किसी भी हाल में पीछे हटने वाले नहीं हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप द्वारा दुनिया भर के देशों पर लगाए गए भारी-भरकम टैरिफ (आयात शुल्क) को गैर-कानूनी करार दिया है। लेकिन, इस फैसले के कुछ ही घंटों बाद ट्रंप ने एक नया रास्ता निकाल लिया। उन्होंने शुक्रवार देर रात एक नए एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर साइन कर दिए, जिससे अमेरिका में सामान बेचने वाले देशों की मुश्किलें फिर से बढ़ने वाली हैं।
आइए आसान भाषा में समझते हैं कि पूरा मामला क्या है, ट्रंप ने कौन सा नया कानून इस्तेमाल किया है और सबसे जरूरी बात इसका भारत की जेब पर क्या असर पड़ने वाला है।
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: ट्रंप के आदेश ‘गैर-कानूनी'
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब राष्ट्रपति ट्रंप ने अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए कई देशों से आने वाले सामानों पर भारी टैक्स लगा दिया था। मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और कोर्ट ने राष्ट्रपति के खिलाफ फैसला सुनाया।
सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से फैसला देते हुए कहा कि ट्रंप ने जो टैरिफ बढ़ाए थे, वे पूरी तरह गलत थे। चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स ने बहुत सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि ट्रंप ने दुनियाभर के देशों पर जो टैरिफ लगाए, वे कानून के दायरे से बाहर थे। कोर्ट का मानना है कि राष्ट्रपति ने 'इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट, 1977' का गलत इस्तेमाल किया और अपनी हद पार की।
ट्रंप का ‘प्लान B': ट्रेड एक्ट 1974 का नया दांव
कोर्ट के फैसले को ट्रंप ने "निराशाजनक" तो कहा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। सुप्रीम कोर्ट ने जैसे ही 1977 के एक्ट के तहत लगाए गए टैरिफ को रद्द किया, ट्रंप ने अपनी फाइलों से एक और पुराना कानून निकाल लिया।
ट्रंप ने शुक्रवार की देर रात एक नए आदेश पर हस्ताक्षर किए। अब वह ट्रेड एक्ट 1974 के सेक्शन 122 का इस्तेमाल कर रहे हैं। ट्रंप ने साफ कर दिया है कि वह अमेरिका में आने वाले इंपोर्ट (आयात) पर मौजूदा रेट के अलावा 10% एक्स्ट्रा टैरिफ लगाएंगे। यह नया नियम आने वाले मंगलवार से ही लागू हो जाएगा।
यह नया आदेश क्यों महत्वपूर्ण है?
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने जिस 1977 के एक्ट को गलत बताया था, उसके तहत 10% से लेकर 50% तक टैरिफ लग रहा था। अब ट्रंप ने उस पुराने एक्ट को छोड़कर, 1974 के एक्ट के तहत नया 10% टैरिफ लगा दिया है। यानी, रास्ता बदल गया है, लेकिन मंजिल वही है—विदेशी सामानों पर टैक्स वसूलना।
क्या है ट्रेड एक्ट 1974 का सेक्शन 122?
आप सोच रहे होंगे कि आखिर यह सेक्शन 122 क्या बला है, जो ट्रंप को इतनी ताकत देता है? आसान शब्दों में कहें तो यह कानून अमेरिकी राष्ट्रपति को देश की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए स्पेशल पावर देता है।
ट्रेड एक्ट 1974 का सेक्शन 122 राष्ट्रपति को अधिकार देता है कि अगर अमेरिका का "बैलेंस-ऑफ-पेमेंट" (भुगतान संतुलन) बहुत ज्यादा घाटे में चल रहा है, तो वह इंपोर्ट पर 15% तक का सरचार्ज (अतिरिक्त टैक्स) लगा सकते हैं या कोटा फिक्स कर सकते हैं। ट्रंप का कहना है कि अमेरिका व्यापार में घाटा सह रहा है, इसलिए वह इस कानून का इस्तेमाल करके बैलेंस शीट ठीक करेंगे।
भारत के लिए क्या बदला? ट्रंप का दो-टूक जवाब
इस पूरी उठापटक के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि भारत पर इसका क्या असर होगा? क्या भारत से अमेरिका जाने वाले कपड़े, दवाइयां और अन्य सामान सस्ते होंगे या महंगे?
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद जब ट्रंप से भारत के साथ ट्रेड डील के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने बहुत स्पष्ट जवाब दिया। ट्रंप ने कहा, "सुप्रीम कोर्ट के फैसले से भारत के साथ हमारी डील में कुछ भी नहीं बदला है।"
ट्रंप ने अपने चिर-परिचित अंदाज में कहा, "वे (भारत) टैरिफ देंगे, और हम टैरिफ नहीं देंगे। भारत के साथ सीधा सौदा यह है कि उन्हें टैक्स देना होगा। यह पहले जैसा नहीं है।" उन्होंने यह भी जोड़ा कि भारत के साथ डील पूरी हो चुकी है, बस अब उसे लागू करने का तरीका थोड़ा बदल गया है क्योंकि अब वह दूसरे कानून (सेक्शन 122) का इस्तेमाल कर रहे हैं।
भारत-अमेरिका ट्रेड डील: क्या है पूरा गणित?
भारत और अमेरिका के बीच जो अंतरिम व्यापार समझौता (Interim Trade Deal) साइन होने की कगार पर है, उसके कुछ अहम बिंदु सामने आए हैं। इसे समझना बहुत जरूरी है:
रेसिप्रोकल टैरिफ (Reciprocal Tariff): समझौते के तहत, अमेरिका भारतीय सामानों पर लगने वाले 'रेसिप्रोकल टैरिफ' को घटाकर 18% कर देगा। यह भारत के निर्यातकों के लिए थोड़ी राहत की खबर हो सकती है।
भारत की जिम्मेदारी: बदले में, भारत ने भी वादा किया है कि वह अमेरिकी सामानों के लिए अपने बाजार खोलेगा, उन पर लगने वाला टैक्स कम करेगा और रेगुलेटरी नियमों (कागजी कार्रवाई) को आसान बनाएगा।
रूसी तेल का विवाद और 50% टैक्स का सच: यह सबसे पेचीदा मामला था। आपको याद होगा कि अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने पर भारत को सजा देने के लिए अगस्त 2025 में भारतीय सामानों पर 25% का एक्स्ट्रा टैरिफ लगा दिया था।
उस समय गणित यह था: 25% (रेसिप्रोकल टैरिफ) + 25% (सजा वाला टैरिफ) = कुल 50% टैक्स।
अब नई डील के तहत, अमेरिका ने मान लिया है कि वह रूस वाले मुद्दे पर लगाया गया यह अतिरिक्त 25% टैरिफ हटा लेगा। हालांकि, यह राहत 7 फरवरी 2026 से मिलेगी।
आगे की राह
कुल मिलाकर तस्वीर यह है कि डोनाल्ड ट्रंप अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट से मिले झटके के बाद भी अपने "अमेरिका फर्स्ट" और "टैरिफ किंग" वाले रवैये पर कायम हैं। उन्होंने कोर्ट का रास्ता बंद होने पर ट्रेड एक्ट 1974 का नया दरवाजा खोल लिया है।
भारत के लिए स्थिति मिली-जुली है। एक तरफ ट्रंप कह रहे हैं कि "टैक्स तो देना पड़ेगा", वहीं दूसरी तरफ ट्रेड डील के जरिए टैरिफ को 18% तक लाने और रूसी तेल वाले दंड को 2026 में खत्म करने की बात भी हो रही है। मंगलवार से लागू होने वाले नए 10% टैरिफ का असर भारतीय बाज़ार पर कैसे पड़ता है, यह देखना दिलचस्प होगा। फिलहाल, ट्रंप ने यह साबित कर दिया है कि वह अपनी नीतियों को लागू करने के लिए हर कानूनी दांव-पेच आजमाने को तैयार हैं।
