IDFC First Bank share crash: 590 करोड़ की धोखाधड़ी की खबर से IDFC First Bank के शेयर 20% टूटकर लोअर सर्किट पर पहुंच गए। हरियाणा सरकार ने बैंक के साथ लेनदेन पर रोक लगा दी है। जानें पूरा मामला और निवेशकों के लिए अपडेट।
चंडीगढ़: सोमवार (23 फरवरी) की सुबह शेयर बाजार के निवेशकों के लिए, और खास तौर पर IDFC First Bank के शेयर होल्डर्स के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं रही। बैंक की चंडीगढ़ ब्रांच में एक बहुत बड़े फ्रॉड की खबर सामने आते ही इसके शेयर ताश के पत्तों की तरह बिखर गए।
बाजार खुलते ही IDFC First Bank के शेयरों में भारी बिकवाली शुरू हो गई। देखते ही देखते शेयर 20% टूटकर लोअर सर्किट (Lower Circuit) पर पहुंच गए। गिरावट इतनी तेज थी कि संभलने का कोई मौका ही नहीं मिला। वजह है करीब 590 करोड़ रुपये की संदिग्ध हेराफेरी।
आखिर क्या है पूरा मामला?
इस पूरे मामले की जड़ चंडीगढ़ की एक ब्रांच है। बैंक ने खुद रेगुलेटरी फाइलिंग में बताया कि यह गड़बड़ी तब पकड़ में आई जब हरियाणा सरकार के एक विभाग ने अपना खाता बंद करने की अर्जी दी। विभाग ने अपना पैसा दूसरे बैंक में ट्रांसफर करने को कहा।
जब बैंक ने प्रोसेस शुरू किया, तो पाया कि विभाग जितना पैसा बता रहा है और बैंक के सिस्टम में जो बैलेंस दिख रहा है, उसमें जमीन-आसमान का अंतर है। यानी बैंक के रिकॉर्ड और असली बही-खाते मेल नहीं खा रहे थे।
18 फरवरी के बाद खुला राज
बैंक के मुताबिक, 18 फरवरी 2026 के बाद हरियाणा सरकार की कुछ और यूनिट्स ने भी अपने खातों को लेकर संपर्क किया। जांच करने पर वहां भी वही समस्या मिली—बैलेंस में बड़ा अंतर।
बैंक ने अपनी सफाई में कहा है कि यह मामला सिर्फ चंडीगढ़ ब्रांच के कुछ खास सरकारी खातों तक ही सीमित है। बाकी आम ग्राहकों पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। फिलहाल जिन खातों की जांच (Reconciliation) चल रही है, उनमें करीब 590 करोड़ रुपये की रकम फंसी है।
हैरानी की बात यह है कि यह 590 करोड़ की रकम, बैंक को अक्टूबर-दिसंबर 2025-26 तिमाही में हुए 503 करोड़ रुपये के कुल मुनाफे (Net Profit) से भी ज्यादा है। बैंक ने तुरंत कार्रवाई करते हुए जांच पूरी होने तक 4 अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया है।
हरियाणा सरकार का सख्त एक्शन
इस खुलासे के बाद हरियाणा सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। सरकार ने रविवार को ही एक सर्कुलर जारी कर IDFC First Bank और AU Small Finance Bank को तत्काल प्रभाव से 'ब्लैकलिस्ट' कर दिया है।
वित्त विभाग के आदेश के अनुसार, जब तक अगला आदेश नहीं आता, इन बैंकों में सरकारी पैसे का कोई भी नया जमा, निवेश या लेनदेन नहीं होगा। सरकार ने अपने सभी विभागों को इन बैंकों से कामकाज रोकने को कहा है।
बाजार के जानकारों का कहना है कि इस खबर से बैंक की साख (Goodwill) को झटका लगा है, जिसका सीधा असर आज शेयर प्राइस पर देखने को मिला।
फिलहाल बैंक की इंटरनल ऑडिट जारी है। निवेशकों की नजर अब इस बात पर है कि बैंक इस 590 करोड़ के गड्ढे को कैसे भरता है और हरियाणा सरकार का अगला कदम क्या होगा।
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