Health Insurance Alert: क्या सिर्फ कंपनी के भरोसे बैठे हैं आप? मुसीबत आने से पहले जान लें ये कड़वा सच!

MoneySutraHub Team

 Health Insurance Alert: क्या आपको लगता है कि ऑफिस से मिला हेल्थ इंश्योरेंस काफी है? यह गलती भारी पड़ सकती है। जानिए क्यों आपको पर्सनल हेल्थ इंश्योरेंस की तुरंत जरूरत है।

Group Health Insurance v/s Personal Health Insurance

नई दिल्ली: आज के समय में अच्छी नौकरी के साथ-साथ कंपनियां अपने कर्मचारियों को कई सुविधाएं देती हैं, जिनमें से एक है 'हेल्थ इंश्योरेंस' (Health Insurance)। इसे आमतौर पर ग्रुप हेल्थ इंश्योरेंस कहा जाता है। कर्मचारी अक्सर यह सोचकर बेफिक्र हो जाते हैं कि कंपनी ने उनका बीमा करवा दिया है, अब उन्हें अलग से पॉलिसी लेने की क्या जरूरत?


अगर आप भी यही सोच रहे हैं, तो सावधान हो जाएं! कंपनी से मिला इंश्योरेंस फायदेमंद तो है, लेकिन पूरी तरह इस पर निर्भर रहना बड़ी भूल साबित हो सकता है। आइए, आसान भाषा में समझते हैं कि आखिर माजरा क्या है।


नौकरी गई तो इंश्योरेंस भी गया


सबसे बड़ी समस्या यह है कि कंपनी द्वारा दिया गया हेल्थ इंश्योरेंस आपकी नौकरी से जुड़ा होता है। इसका सीधा मतलब है— "जब तक नौकरी है, तब तक सुरक्षा है।" जिस दिन आप नौकरी छोड़ते हैं, रिटायर होते हैं या कंपनी बदलते हैं, आपका इंश्योरेंस कवर उसी दिन खत्म हो जाता है। नौकरी बदलने के बीच के समय में अगर कोई मेडिकल इमरजेंसी आ गई, तो सारा खर्च आपकी अपनी जेब से जाएगा।


कवरेज की सीमा (Limited Coverage)


कॉर्पोरेट प्लान में कवरेज की एक सीमा होती है। अक्सर यह राशि 2 से 5 लाख तक होती है। आज की मेडिकल महंगाई को देखते हुए, अगर कोई बड़ी बीमारी हो जाए या लंबा अस्पताल का बिल बन जाए, तो कंपनी का इंश्योरेंस कम पड़ जाता है। ऐसे में एक 'पर्सनल हेल्थ इंश्योरेंस' (Individual Health Insurance) ही काम आता है, जिसे आप अपनी जरूरत के हिसाब से चुन सकते हैं।


सस्ता प्रीमियम और छिपी शर्तें


बीमा कंपनियों के बीच कॉर्पोरेट ग्राहकों को लुभाने की होड़ लगी रहती है। इसलिए, वे कंपनियों को बहुत कम प्रीमियम पर ग्रुप इंश्योरेंस ऑफर करती हैं। लेकिन कम पैसे में ज्यादा सुविधाएं देना मुश्किल होता है।


जब क्लेम (Claim) ज्यादा आने लगते हैं, तो बीमा कंपनियां अपना नुकसान कम करने के लिए शर्तें सख्त कर देती हैं। जैसे:


  • अस्पतालों की लिस्ट (Network Hospitals) छोटी कर देना।
  • क्लेम की जांच बहुत बारीकी से करना।
  • प्रोसेसिंग में देरी करना।


समझदारी क्या है?


एक्सपर्ट्स का मानना है कि कंपनी का इंश्योरेंस एक 'बोनस' की तरह है, लेकिन इसे अपनी मुख्य सुरक्षा न मानें। समझदारी इसी में है कि आप नौकरी के दौरान ही अपने और अपने परिवार के लिए एक अलग 'व्यक्तिगत हेल्थ इंश्योरेंस' जरूर लें। यह पॉलिसी हमेशा आपके साथ रहेगी, चाहे आप किसी भी कंपनी में काम करें या रिटायर हो जाएं।


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बीमारी कभी पूछकर नहीं आती। कंपनी के भरोसे रहने के बजाय अपनी सुरक्षा की डोर अपने हाथ में रखें। आज ही अपने पोर्टफोलियो को चेक करें और एक अच्छा पर्सनल हेल्थ कवर जरूर लें।

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