Crude Oil Price: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आज नरमी देखने को मिली है। ओमान में अमेरिका और ईरान के बीच हुई पॉजिटिव बातचीत से सप्लाई रुकने का डर कम हुआ है। जानिए क्या है क्रूड ऑयल का नया भाव।
नई दिल्ली: हफ्ते के पहले कारोबारी दिन यानी सोमवार को कच्चे तेल (Crude Oil) के बाजार में थोड़ी शांति देखने को मिली है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। इस नरमी के पीछे सबसे बड़ा कारण मिडिल ईस्ट से आ रही एक राहत भरी खबर है। दरअसल, अमेरिका और ईरान के बीच ओमान में हुई बातचीत से बाजार का तनाव कुछ कम हुआ है, जिससे इन्वेस्टर्स ने राहत की सांस ली है।
US-ईरान बातचीत से बाजार का मूड सुधरा
मिडिल ईस्ट में चल रही तनातनी के बीच अमेरिका और ईरान ने अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम को लेकर बातचीत जारी रखने का वादा किया है। ओमान में दोनों देशों के बीच 'कंस्ट्रक्टिव' यानी सकारात्मक चर्चा हुई है। इस खबर ने बाजार में चल रहे इस डर को काफी हद तक कम कर दिया है कि कहीं मिडिल ईस्ट में सप्लाई पूरी तरह से न रुक जाए।
IG मार्केट के एनालिस्ट टोनी साइकामोर का कहना है, "इस हफ्ते की शुरुआती ट्रेडिंग में क्रूड ऑयल में जो नरमी दिख रही है, वो ओमान में हुई US-ईरान की बातचीत का नतीजा है। आगे और बातचीत होने की उम्मीद से सप्लाई में रुकावट का जो तुरंत का डर था, वह अब काफी कम हो गया है।"
ताज़ा कीमतों पर एक नज़र
सोमवार को तेल की कीमतों में स्पष्ट गिरावट देखी गई:
Brent Crude Futures: शुक्रवार को इसमें 50 सेंट की तेजी थी, लेकिन आज यह 49 सेंट या 0.72% गिरकर $67.56 प्रति बैरल पर आ गया।
US West Texas Intermediate (WTI): इसमें भी 42 सेंट या 0.66% की गिरावट आई और यह $63.13 प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा था।
पिछले हफ्ते भी तनाव थोड़ा कम होने के कारण दोनों बेंचमार्क में 2% से ज्यादा की गिरावट आई थी, जो पिछले 7 हफ्तों में पहली गिरावट थी।
सप्लाई को लेकर अब भी क्यों है चिंता?
भले ही बातचीत चल रही हो, लेकिन खतरा पूरी तरह टला नहीं है। इन्वेस्टर्स की नज़र 'होर्मुज स्ट्रेट' (Strait of Hormuz) पर बनी हुई है। यह वो समुद्री रास्ता है जहां से दुनिया की कुल तेल खपत का लगभग पांचवां (1/5th) हिस्सा एक्सपोर्ट होता है। अगर यहां कोई गड़बड़ी होती है, तो पूरी दुनिया में तेल का संकट खड़ा हो सकता है।
वहीं, ईरान के विदेश मंत्री ने शनिवार को एक कड़ा बयान दिया था। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिकी सेना ने कोई गलती की, तो तेहरान मिडिल ईस्ट में अमेरिकी ठिकानों पर हमला करने से पीछे नहीं हटेगा। इससे पता चलता है कि रिस्क अभी भी बना हुआ है।
रूस और भारत के तेल व्यापार पर असर
बाजार में सिर्फ मिडिल ईस्ट ही नहीं, बल्कि रूस-यूक्रेन युद्ध का भी असर दिख रहा है।
यूरोप का कदम: यूरोपियन कमीशन ने रूस के समुद्री कच्चे तेल के एक्सपोर्ट को मदद करने वाली किसी भी सर्विस पर पूरी तरह बैन लगाने का प्रस्ताव रखा है।
भारत का रुख: भारत के रिफाइनर्स, जो रूस के तेल के बड़े खरीदार रहे हैं, अब थोड़ी सावधानी बरत रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, भारतीय रिफाइनर्स अप्रैल डिलीवरी के लिए रूसी तेल की खरीदारी से बच रहे हैं। ऐसा माना जा रहा है कि इससे भारत को अमेरिका के साथ ट्रेड समझौते करने में मदद मिल सकती है।
प्रोडक्शन बढ़ने के संकेत
इस बीच, बढ़ती एनर्जी की कीमतों को देखते हुए उत्पादन बढ़ाने की कोशिशें भी तेज हो गई हैं। Baker Hughes की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी एनर्जी कंपनियों ने पिछले हफ्ते तेल और नेचुरल गैस के रिग्स (Rigs) की संख्या बढ़ाई है। यह नवंबर के बाद पहली बार है जब लगातार तीसरे हफ्ते रिग्स की संख्या में बढ़ोतरी हुई है, जो आने वाले समय में सप्लाई बढ़ने का संकेत है।
कुल मिलाकर, ओमान में हुई बातचीत ने कच्चे तेल की आग को थोड़ा ठंडा जरूर किया है, लेकिन बाजार अभी भी पूरी तरह से निश्चिंत नहीं है। मिडिल ईस्ट की पल-पल बदलती स्थितियों और रूस पर लग रहे प्रतिबंधों का असर आने वाले दिनों में तेल की कीमतों पर साफ दिखाई देगा।

