Share Market Update: भारतीय शेयर बाजार में FIIs की तूफानी वापसी! पिछले 9 दिनों में विदेशी निवेशकों ने 2 अरब डॉलर डाले हैं। जानें बाजार में आई इस तेजी के असली कारण और एक्सपर्ट्स की राय।
FII Buying: भारतीय शेयर बाजार (Indian Share Market) में एक बार फिर रौनक लौट आई है। पिछले कुछ समय से सुस्त पड़े बाजार में अब विदेशी निवेशकों यानी Foreign Institutional Investors (FIIs) ने जोरदार वापसी की है। निवेशकों के लिए यह खबर किसी बड़ी राहत से कम नहीं है। आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले 9 कारोबारी दिनों में विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार में 2 अरब डॉलर (2 Billion Dollars) से ज्यादा की खरीदारी की है।
विदेशी निवेशकों के इस बदले हुए रुख ने शेयर बाजार में नई जान फूंक दी है। सेंसेक्स और निफ्टी में लगातार तेजी देखने को मिल रही है। हालांकि, बाजार के जानकार अभी भी पूरी तरह से निश्चिंत नहीं हैं और यह देख रहे हैं कि यह तेजी कितने लंबे समय तक टिकेगी।
9 दिनों में बदल गया बाजार का मूड
बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, 28 जनवरी से लेकर 6 फरवरी के बीच कुल 9 कारोबारी दिन थे। इनमें से 6 दिन विदेशी निवेशकों ने जमकर खरीदारी की, जबकि सिर्फ 3 दिन उन्होंने मामूली बिकवाली की।
हाल ही में 9 फरवरी के प्रोविजनल डेटा से पता चला है कि FIIs ने शुद्ध रूप से 2,223 करोड़ रुपये का निवेश किया है। यह खरीदारी ऐसे वक्त में आई है जब भारतीय बाजार पहले काफी गिर चुके थे। गिरावट के कारण भारतीय शेयरों के भाव (Valuation) दूसरे एशियाई बाजारों के मुकाबले काफी आकर्षक हो गए थे, जिसने विदेशी निवेशकों को वापस आने का मौका दिया।
क्यों हो रही है इतनी खरीदारी? (Valuation का खेल)
बाजार में पैसा लगाने से पहले बड़े निवेशक 'वैल्यूएशन' देखते हैं। आसान भाषा में कहें तो वो देखते हैं कि शेयर महंगा है या सस्ता।
PE रेश्यो: फिलहाल सेंसेक्स और निफ्टी का एक साल आगे का प्राइस-टू-अर्निंग (PE) मल्टीपल क्रमश: 20.5 गुना और 20.1 गुना है। यह इनके पिछले 10 साल के औसत के आसपास ही है, यानी बाजार न बहुत महंगा है, न बहुत सस्ता।
प्रीमियम हुआ कम: एममार कैपिटल पार्टनर्स के सीईओ मनीषी रायचौधरी का कहना है कि जापान को छोड़कर एशिया के बाकी बाजारों की तुलना में भारत का 'प्रीमियम' अब अपने लॉन्ग-टर्म औसत पर आ गया है।
चीन और कोरिया का असर: पिछले कुछ समय में चीन और कोरिया के बाजारों में तेजी आई है और भारत में उतार-चढ़ाव रहा। इस वजह से भारत का प्रीमियम घटकर 40.1% रह गया है, जो इसके 15 साल के औसत (39.2%) के काफी करीब है। इसका मतलब है कि अब विदेशी निवेशकों को भारतीय बाजार में पैसा लगाना ज्यादा सही लग रहा है।
क्या आगे भी जारी रहेगी तेजी?
हर निवेशक के मन में यही सवाल है कि क्या यह खरीदारी आगे भी चलेगी? एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर ग्लोबल मार्केट में चीजें ठीक रहीं, तो भारत में पैसा आता रहेगा।
PL कैपिटल के एडवाइजरी प्रमुख विक्रम कसाट बताते हैं कि पिछले 2 सालों की लगातार बिकवाली के बाद अब विदेशी निवेशकों का मूड बदला है। अकेले 2025 में ही FIIs ने करीब 18.88 अरब डॉलर के शेयर बेच दिए थे। लेकिन अब हालात बदल रहे हैं।
बाजार के लिए 3 बड़े पॉजिटिव संकेत:
भारत-अमेरिका ट्रेड डील: हाल ही में हुए व्यापार समझौते ने अनिश्चितता को कम किया है।
स्थिर बॉन्ड यील्ड्स: बॉन्ड मार्केट में स्थिरता आने से रिस्क लेने की क्षमता बढ़ी है।
RBI और इकोनॉमी: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) का थोड़ा नरम रुख और देश की जीडीपी (GDP) व कंपनियों की कमाई में सुधार की उम्मीद ने निवेशकों का भरोसा जीता है।
घरेलू निवेशकों (DIIs) ने भी संभाला मोर्चा
सिर्फ विदेशी ही नहीं, बल्कि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने भी बाजार को मजबूती दी है। इस दौरान DIIs ने 8,973 करोड़ रुपये से ज्यादा की खरीदारी की है। विदेशी और घरेलू निवेशकों के इस डबल इंजन ने बाजार को ऊपर उठा दिया। इसका नतीजा यह हुआ कि सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में 3% से ज्यादा की तेजी आई। मिडकैप और स्मॉलकैप छोटे और मझोले शेयरों ने तो और भी शानदार प्रदर्शन किया। बीएसई मिडकैप 150 इंडेक्स 5.66% और स्मॉलकैप 250 इंडेक्स 6.3% चढ़ गया।
कुल मिलाकर, बाजार के संकेत अभी पॉजिटिव नजर आ रहे हैं। कंपनियों की कमाई में सुधार और डॉलर की कमजोरी जैसे कारक अगर साथ देते रहे, तो आने वाले दिनों में भारतीय शेयर बाजार नई ऊंचाइयों को छू सकता है। हालांकि, एक समझदार निवेशक के तौर पर आपको बाजार के उतार-चढ़ाव पर नजर बनाए रखनी चाहिए।
डिस्क्लेमर: यहां पर दिए गए विचार और इन्वेस्टमेंट सलाह इन्वेस्टमेंट प्रोफेशनल्स के अपने विचार और सलाह हैं। MoneysutraHub.in यूज़र्स को सलाह देता है कि कोई भी इन्वेस्टमेंट का फैसला लेने से पहले किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह लें।

