30 साल की शानदार सेवा के बाद अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) 2030में अपना मिशन पूरा करेगा। जानें NASA और SpaceX इसे प्रशांत महासागर में कैसे सुरक्षित गिराएंगे।
नई दिल्ली: अंतरिक्ष में इंसान की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक, अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS), अब अपने सफर के अंतिम पड़ाव पर है। लगभग 30 वर्षों तक पृथ्वी की परिक्रमा करने और अनगिनत वैज्ञानिक प्रयोगों का घर बनने के बाद साल 2030 में इसे 'रिटायर' कर दिया जाएगा। यह सिर्फ एक मशीन का अंत नहीं, बल्कि अंतरिक्ष अन्वेषण के एक सुनहरे अध्याय का समापन होगा, जिसने दुनिया को सहयोग की ताकत दिखाई।
क्यों और कैसे खत्म होगा ISS का मिशन?
समय के साथ, ISS के कई महत्वपूर्ण हिस्से पुराने हो चुके हैं और उनकी मरम्मत करना मुश्किल होता जा रहा है। इसी को देखते हुए अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASAने इसे सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर वापस लाने का फैसला किया है।
इस विशाल मिशन की जिम्मेदारी एलन मस्क की कंपनी SpaceX को सौंपी गई है। SpaceX एक विशेष वाहन का निर्माण करेगा जो ISS को पृथ्वी के वायुमंडल में वापस लाने की प्रक्रिया को नियंत्रित करेगा। योजना के अनुसार, स्टेशन की गति को धीरे-धीरे कम किया जाएगा और इसे प्रशांत महासागर के एक बेहद सुनसान और निर्जन इलाके में गिराया जाएगा। इस जगह को 'पॉइंट नीमो' (Point Nemo) के नाम से जाना जाता है, जिसे 'अंतरिक्ष यानों का कब्रिस्तान' भी कहते हैं। इससे पहले रूस के मीर (Mir) स्पेस स्टेशन समेत कई पुराने सैटेलाइट्स को यहीं गिराया गया है।
ISS का गौरवशाली इतिहास और उपलब्धियां
अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन सिर्फ एक वैज्ञानिक प्रयोगशाला नहीं, बल्कि वैश्विक सहयोग का एक जीता-जागता प्रतीक रहा है।
सफर की शुरुआत: ISS ने 2 नवंबर, 2000 को पहली बार अंतरिक्ष यात्रियों की मेजबानी की थी।
लागत: इसे बनाने और संचालित करने में लगभग 150 बिलियन डॉलर का भारी खर्च आया। NASA आज भी इसके रखरखाव पर हर साल करीब 3 बिलियन डॉलर खर्च करता है।
विशाल आकार: यह स्टेशन किसी फुटबॉल के मैदान जितना बड़ा है और लगभग 8 किलोमीटर प्रति सेकंड की तूफानी रफ्तार से पृथ्वी का चक्कर लगाता है।
विज्ञान और सहयोग का केंद्र
पिछले 25 सालों में ISS पर 4,000 से भी ज्यादा वैज्ञानिक प्रयोग किए गए हैं, जिनसे करीब 4,400 रिसर्च पेपर प्रकाशित हुए। हालांकि, इन प्रयोगों से कैंसर के इलाज या डार्क मैटर के रहस्य जैसे कोई चमत्कारी परिणाम तो नहीं मिले, लेकिन इन्होंने विज्ञान की समझ को धीरे-धीरे आगे बढ़ाया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ISS की सबसे बड़ी सफलता वैज्ञानिक खोजों से ज्यादा विभिन्न देशों के बीच सहयोग की भावना को बढ़ावा देना रहा है। एक्सेटर यूनिवर्सिटी की समाजशास्त्री पाओला कास्टानो-रोड्रिग्ज के अनुसार, यह एक ऐसा मंच बना जहां दुनिया भर के देश और वैज्ञानिक एक साथ मिलकर मानवता की भलाई के लिए काम कर सके।
ISS के बाद अंतरिक्ष में क्या होगा?
ISS के रिटायर होने से अंतरिक्ष सूना नहीं होगा। भविष्य की योजनाओं पर तेजी से काम चल रहा है:
चीन का तियांगोंग स्पेस स्टेशन: चीन का तियांगोंग स्पेस स्टेशन पहले से ही लो-अर्थ ऑर्बिट में काम कर रहा है और यह अकेला सरकारी स्पेस स्टेशन होगा।
निजी कंपनियों की होड़: जेफ बेजोस की Blue Origin और Axiom Space जैसी कंपनियां अपने खुद के कमर्शियल स्पेस स्टेशन बनाने की तैयारी में हैं।
भारत की भी है तैयारी: भारत भी भविष्य में अपना खुद का अंतरिक्ष स्टेशन लॉन्च करने की महत्वाकांक्षी योजना पर काम कर रहा है।
अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन का 2030 में अंत एक युग का समापन जरूर है, लेकिन यह अंतरिक्ष अन्वेषण का अंत नहीं है। ISS ने आने वाली पीढ़ियों के लिए जो रास्ते खोले हैं, वे भविष्य में इंसान को अंतरिक्ष की गहराइयों में और आगे ले जाएंगे। इसका सफर हमेशा इस बात की याद दिलाएगा कि जब इंसान मिलकर काम करता है, तो कुछ भी असंभव नहीं होता।

