AI की दुनिया में भारत का बड़ा धमाका: आ गया 17-अरब पैरामीटर वाला परम-2 मॉडल, जानें यह कैसे बदलेगा देश की तकदीर

MoneySutraHub Team

 BharatGEN, Param-2 AI, Sovereign AI, Indian AI Model: भारत का अपना सॉवरेन AI परम-2 लॉन्च होने को तैयार! जानें 17-अरब पैरामीटर वाला यह भारतीय मॉडल कैसे हमारी भाषा और संस्कृति को समझेगा और विदेशी AI को देगा टक्कर।

BharatGEN: तकनीक के नए युग में भारत का शंखनाद


Make in India AI: भारत टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक छलांग लगाने जा रहा है। सरकार समर्थित कंसोर्टियम भारतजेन अपना अगली पीढ़ी का लार्ज लैंग्वेज मॉडल परम-2 लॉन्च करने वाला है। 17-अरब पैरामीटर की क्षमता वाला यह AI मॉडल भारत की 22 भाषाओं और सांस्कृतिक बारीकियों को समझने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह सिर्फ एक तकनीकी उत्पाद नहीं, बल्कि सॉवरेन AI की दिशा में एक बड़ा कदम है, जो डेटा संप्रभुता और तकनीकी आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करेगा। भारतजेन के सीईओ ऋषि बल के अनुसार, यह मॉडल भारत को तकनीक के उपभोक्ता से निर्माता बनाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। कृषि, स्वास्थ्य, वित्त और कानूनी क्षेत्रों के लिए विशेष रूप से तैयार किए गए ये मॉडल आम भारतीय के जीवन को सरल बनाने की क्षमता रखते हैं।


एक समय था जब भारत को टेक्नोलॉजी का सबसे बड़ा बाज़ार यानी एक उपभोक्ता देश माना जाता था। लेकिन अब तस्वीर तेज़ी से बदल रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की वैश्विक दौड़ मैं भारत ने एक ज़बरदस्त छलांग लगाई है। देश के शीर्ष शैक्षणिक संस्थानों के समूह भारतजेन ने अपने अगली पीढ़ी के लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLM) परम-2 को लॉन्च करने की घोषणा की है। यह कोई साधारण AI मॉडल नहीं है, बल्कि 17-अरब पैरामीटर की विशाल क्षमता वाला भारत का अपना सॉवरेन AI है, जो देश को AI के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने का दम रखता है।


आगामी इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में लॉन्च होने वाला यह मॉडल सिर्फ तकनीकी आंकड़ों में ही बड़ा नहीं है, बल्कि यह भारत की 22 भाषाओं, यहाँ की संस्कृति और स्थानीय ज़रूरतों को समझने की क्षमता रखता है। आइए विस्तार से जानते हैं कि भारतजेन क्या है, परम-2 मॉडल की क्या खासियतें हैं, और यह भारत के भविष्य के लिए इतना महत्त्वपूर्ण क्यों है।


क्या है भारतजेन? - भारत के ज्ञान की शक्ति का प्रतीक


भारतजेन कोई आम स्टार्टअप नहीं है, बल्कि यह भारत के सबसे प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों का एक महासंघ (Consortium) है। यह एक गैर-लाभकारी संस्था है, जिसे पूरी तरह से भारत सरकार से वित्तीय सहायता प्राप्त है। इसमें शामिल हैं:


  • आईआईटी मुंबई (IIT Bombay)
  • आईआईटी मद्रास (IIT Madras)
  • आईआईटी कानपुर (IIT Kanpur)
  • आईआईटी खड़गपुर (IIT Kharagpur)
  • आईआईटी मंडी (IIT Mandi)
  • आईआईटी हैदराबाद (IIT Hyderabad)
  • आईआईआईटी दिल्ली (IIIT Delhi)
  • आईआईआईटी हैदराबाद (IIIT Hyderabad)
  • आईआईएम इंदौर (IIM Indore)


इन लगभग 10 संस्थानों ने मिलकर भारत के लिए अगली पीढ़ी के फाउंडेशनल AI मॉडल बनाने का बीड़ा उठाया है। भारतजेन के सीईओ ऋषि बल के अनुसार, इसका लक्ष्य भारत को AI के क्षेत्र में सिर्फ एक उपयोगकर्ता नहीं, बल्कि एक निर्माता और आविष्कारक के रूप में स्थापित करना है।


सॉवरेन AI का कॉन्सेप्ट: क्यों है यह भारत के लिए ज़रूरी?


आज के दौर में डेटा सबसे कीमती संपत्ति है और AI मॉडल इसी डेटा पर काम करते हैं। जब हम किसी विदेशी कंपनी के AI का उपयोग करते हैं, तो हमारा डेटा और हमारी निर्भरता उन पर बढ़ जाती है। सॉवरेन AI का मतलब है कि देश का अपना AI हो, जिस पर उसका पूरा नियंत्रण हो। ऋषि बल इसके तीन बड़े फायदे बताते हैं:


संप्रभुता (Sovereignty): इसका मतलब है कि तकनीक तक हमारी पहुंच की गारंटी हो। अगर किसी देश के साथ हमारी नीतियां मेल नहीं खातीं, तब भी हमारी टेक्नोलॉजी बंद नहीं होनी चाहिए। अपना AI होने से यह आत्मनिर्भरता मिलती है।


पारदर्शिता (Transparency): हमें यह पता होना चाहिए कि हमारे AI मॉडल के अंदर क्या है। यह कैसे काम करता है और किस डेटा पर प्रशिक्षित है। इससे हम संवेदनशील क्षेत्रों जैसे रक्षा, वित्त और स्वास्थ्य में इसके व्यवहार को लेकर आश्वस्त रह सकते हैं।


सेवा क्षमता (Serviceability): अगर मॉडल हमने खुद बनाया है, तो कुछ भी गलत होने पर हम उसे ठीक कर सकते हैं और अपनी ज़रूरतों के हिसाब से बदल सकते हैं। विदेशी मॉडल पर यह नियंत्रण हमें कभी नहीं मिल सकता।


विदेशी AI से कैसे अलग है परम-2? दिल से देसी, दिमाग से ग्लोबल


अक्सर ग्लोबल AI मॉडल्स को पश्चिमी दुनिया, खासकर अमेरिका के लिहाज़ से बनाया जाता है। उनका व्यवहार, भाषा और सुझाव भी वहीं की संस्कृति से प्रभावित होते हैं। ऋषि बल एक बहुत ही सरल उदाहरण देते हैं: "यदि आप सिरदर्द के बारे में पूछते हैं, तो वे टाइलेनॉल लेने के लिए कह सकते हैं। भारत में लोग क्रोसिन जैसे पैरासिटामॉल ब्रांड के बारे मुझे लगता है। ये छोटी-छोटी बातें बहुत मायने रखती हैं।"


परम-2 को इसी कमी को दूर करने के लिए बनाया गया है। यह मॉडल भारत की 22 अनुसूचित भाषाओं और यहाँ की सांस्कृतिक बारीकियों को समझने में सक्षम होगा। यह सिर्फ अनुवाद नहीं करेगा, बल्कि संदर्भ को समझेगा, जिससे यह सही और सटीक परिणाम देगा।


डेटा की चुनौती और भारत का अनूठा समाधान


AI मॉडल की सबसे बड़ी ज़रूरत है - डेटा। दुनिया भर में ज़्यादातर डिजिटल डेटा अंग्रेजी में है। चीन और जापान जैसे कुछ ही देशों के पास अपनी भाषाओं में भारी मात्रा में डेटा है। भारत के लिए यह एक बड़ी चुनौती थी। इस समस्या से निपटने के लिए भारतजेन ने जमीनी स्तर पर काम किया। भारतीय डेटा जुटाने के लिए टीम ने प्रकाशकों, पुरानी और दुर्लभ किताबें रखने वाले लोगों, और यहां तक कि सामुदायिक रेडियो स्टेशनों से संपर्क साधा। यह प्रयास सुनिश्चित करता है कि परम मॉडल का ज्ञान सिर्फ इंटरनेट तक सीमित न रहे, बल्कि उसमें भारत की असली आवाज़ और ज्ञान शामिल हो।


परम से परम-2 तक का सफ़र: एक नज़र


भारतजेन ने पिछले साल 2 जून को अपना पहला बेस मॉडल परम लॉन्च किया था, जो 2.9-अरब-पैरामीटर का था। इसे ओपन-सोर्स रखा गया, ताकि भारत का कोई भी डेवलपर इसका इस्तेमाल कर सके। इसके बाद, विशेष क्षेत्रों के लिए मॉडल जारी किए गए:


  • एग्री-परम (Agri-Param): कृषि क्षेत्र के लिए।
  • अयुर-परम (Ayur-Param): आयुर्वेद और स्वास्थ्य के लिए।
  • वित्त-परम (Vitta-Param): वित्तीय सलाह और सेवाओं के लिए।
  • विधि-परम (Vidhi-Param): कानूनी क्षेत्र के लिए।


अब, परम-2 के लॉन्च के साथ भारतजेन ने एक बड़ी छलांग लगाई है। यह 17-अरब-पैरामीटर का मॉडल है, जो पहले की तुलना में कई गुना ज़्यादा शक्तिशाली और सक्षम है। समिट में दिखाए जाने वाले सभी डेमो परम-2 द्वारा ही संचालित होंगे।


सरकारी समर्थन: AI क्रांति को मिली रफ़्तार


इस महत्त्वाकांक्षी परियोजना को सरकार का पूरा समर्थन मिल रहा है। भारतजेन को विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग से 235 करोड़ रुपये की शुरुआती सीड फंडिंग मिली है। इसके अलावा, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने इसे GPU (ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट) के रूप में समर्थन दिया है, जो AI मॉडल बनाने के लिए सबसे ज़रूरी और महंगी कंप्यूटिंग शक्ति होती है।


आत्मनिर्भर भारत की ओर एक निर्णायक कदम


परम-2 का लॉन्च सिर्फ एक टेकनिकलर उपलब्धि नहीं है, यह आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है। यह भारत को AI की दुनिया में एक मज़बूत खिलाड़ी के रूप में स्थापित करेगा, जो न केवल अपनी ज़रूरतों को पूरा करेगा बल्कि दुनिया के उन देशों के लिए भी एक मिसाल कायम करेगा जो भाषाई और सांस्कृतिक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य और वित्त जैसे क्षेत्रों में इसके आवेदन आम आदमी के जीवन में क्रांतिकारी बदलाव लाने की क्षमता रखते हैं। यह कहना गलत नहीं होगा कि भारतजेन और परम-2 के साथ, भारत AI के भविष्य की कहानी लिखने के लिए पूरी तरह तैयार है।



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