Lifestyle: वर्क-लाइफ बैलेंस बिगड़ने से हो रही है सेहत खराब? जानें स्ट्रेस फ्री रहने के आसान और कारगर तरीके

MoneySutraHub Team

घर और ऑफिस की जिम्मेदारियों के बीच पिस रहे हैं? तनाव (Stress) आपकी सेहत को चुपके से नुकसान पहुंचा रहा है। जानें स्ट्रेस के लक्षण, कारण और इससे राहत पाने के पक्के उपाय।


गांधीनगर, शुक्रवार

आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में सुकून तलाशना मुश्किल हो गया है। सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक, हम किसी न किसी काम में उलझे रहते हैं। काम का दबाव (Work Pressure) और घर की जिम्मेदारियां, जब दोनों एक साथ कंधों पर आती हैं, तो इंसान का वर्क-लाइफ बैलेंस बिगड़ जाता है। इसका सीधा असर हमारी सेहत पर पड़ रहा है।


तनाव यानी स्ट्रेस (Stress) आज एक आम शब्द बन गया है, लेकिन इसे हल्के में लेना एक बड़ी भूल हो सकती है। मेडिकल रिसर्च बताती हैं कि लगातार रहने वाला तनाव आपको सिरदर्द, पेट खराब होना, हाई ब्लड प्रेशर और सीने में दर्द जैसी बीमारियों का शिकार बना सकता है। रातों की नींद उड़ जाना अब आम बात हो गई है। लेकिन सवाल यह है कि इस चक्रव्यूह से बाहर कैसे निकलें? आइए, विस्तार से समझते हैं।


क्या हर तनाव बुरा होता है?


सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि क्या हर तरह का स्ट्रेस खराब है? जवाब है- नहीं। थोड़ा बहुत तनाव हमारे लिए अच्छा होता है। यह हमें जिम्मेदार बनाता है और आने वाले खतरों या चुनौतियों के लिए तैयार करता है। उदाहरण के लिए, परीक्षा का तनाव एक छात्र को पढ़ाई के लिए प्रेरित करता है।


लेकिन, समस्या तब शुरू होती है जब यह तनाव हमारी नींद खराब कर दे, हम अपने रोजमर्रा के काम न कर पाएं और अपनी ही सेहत को नजरअंदाज करने लगें। यह इस बात का संकेत है कि अब पानी सिर से ऊपर जा रहा है।


तनाव आखिर होता क्यों है?


जीवन में बदलाव ही तनाव की सबसे बड़ी वजह है। चाहे वह जॉब में बदलाव हो, परिवार में कोई नया मोड़ हो, या सेहत से जुड़ी कोई समस्या। इसके अलावा, एक बहुत बड़ा कारण है 'तुलना करना'।


मान लीजिए, कोई व्यक्ति एक महंगा घर खरीदना चाहता है जो उसके बजट में नहीं है। वह अपने सारे रिसोर्स (Resource) लगा देता है, फिर भी सफल नहीं हो पाता। ऐसे में स्वाभाविक रूप से तनाव बढ़ेगा। जब हम अपनी हकीकत और चाहत के बीच सामंजस्य नहीं बिठा पाते, तो स्ट्रेस पैदा होता है।


तनाव के प्रकार और उससे निपटने के उपाय


एक्सपर्ट्स के मुताबिक, तनाव को हम मुख्य रूप से तीन हिस्सों में बांट सकते हैं:


1. तात्कालिक तनाव (Short Term Stress) यह कुछ समय के लिए होता है, जैसे एग्जाम की टेंशन या कहीं जाने की जल्दबाजी। यह कुछ घंटों या दिनों में खत्म हो जाता है।


लक्षण: नींद डिस्टर्ब होना, बहुत ज्यादा प्यास लगना, भूख न लगना या बहुत ज्यादा लगना।


उपाय: सबसे पहले रिलैक्स करें। आंखें बंद करके 10 मिनट के लिए लेट जाएं। अपना पसंदीदा संगीत सुनें या अपने शौक पूरे करें। अगर घर में पेट्स (Pets) हैं, तो उनके साथ खेलें। इसके लिए किसी दवा की जरूरत नहीं होती, बस थोड़ा सुकून काफी है।


2. लंबे समय का तनाव (Long Term Stress) यह वह तनाव है जो हमारी लाइफ की बड़ी समस्याओं से जुड़ा होता है। जैसे जॉब छूट जाना, बिजनेस में घाटा या कोई लंबी बीमारी।


लक्षण: चिड़चिड़ापन, बात-बात पर गुस्सा आना, और कई बार नशा करने का मन करना।


उपाय: अपनी समस्याओं को खुद तक सीमित न रखें। अगर जॉब गई है, तो दोस्तों और रिश्तेदारों को बताएं। अगर मनपसंद जॉब नहीं मिल रही, तो फिलहाल एक स्टेप नीचे की जॉब जॉइन कर लें। अगर समस्या लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारी (जैसे शुगर, बीपी) है, तो खुद को कोसने के बजाय डॉक्टर की सलाह लें और रुटीन सुधारें। "मेरे साथ ही ऐसा क्यों हुआ?" सोचने से तनाव और बढ़ेगा।


3. असामान्य तनाव (Chronic/Abnormal Stress) यह गंभीर बीमारियों (जैसे लिवर या किडनी की समस्या) के कारण होता है। इसमें इंसान घंटों किसी एक ही बात या घटना के बारे में सोचता रहता है।


उपाय: इसका एकमात्र उपाय सही मेडिकल ट्रीटमेंट है। इसके साथ ही, योग और ध्यान बहुत मदद करते हैं।


हेल्थ टिप: रोजाना 10 से 15 मिनट मेडिटेशन और 15 से 20 मिनट योग (खासकर अनुलोम-विलोम) करें। साथ ही, 30 से 35 मिनट की वॉक जरूर करें।


बच्चों में बढ़ता तनाव: माता-पिता दें ध्यान


सिर्फ बड़े ही नहीं, आजकल बच्चे भी भारी तनाव का सामना कर रहे हैं। स्कूल में डांट पड़ना, होमवर्क पूरा न होना, या घर में माता-पिता का झगड़ा—ये सब बच्चों के कोमल मन पर गहरा असर डालते हैं। कई बार बच्चे यह सोचकर भी डर जाते हैं कि मम्मी-पापा भाई-बहन को ज्यादा प्यार करते हैं।


लक्षण:


* बच्चा स्कूल जाने से कतराए या रोने लगे।


चुप-चुप रहे या बहुत ज्यादा आज्ञाकारी बन जाए।


पढ़ाई में मन न लगे और एकाग्रता कम हो जाए।


गुस्सा निकालने के लिए दोस्तों या भाई-बहनों से लड़ाई करे।


पेरेंट्स क्या करें? 


बच्चों से बात करें। उन्हें विश्वास दिलाएं कि आप उनके साथ हैं। घर का माहौल खुशमिजाज रखें। उन्हें समझाएं कि यह उम्र खेलने-कूदने की है, परेशान होने की नहीं। अगर फिर भी स्थिति न सुधरे, तो किसी चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट की मदद लेने में संकोच न करें।


स्ट्रेस फ्री रहने का मंत्र


तनाव को हराने के लिए लाइफस्टाइल में छोटे बदलाव बड़े नतीजे दे सकते हैं:


संगीत और डांस: तनाव भगाने का यह सबसे अच्छा तरीका है। इससे मूड फ्रेश होता है।


गार्डनिंग और पेट्स: अगर आपको बागवानी का शौक है या घर में जानवर हैं, तो उनके साथ वक्त बिताएं। इससे आपका ध्यान परेशानी से हटता है।


योग और वॉक: सुबह की ताजी हवा, 15 मिनट का योग और 30 मिनट की वॉक जादुई असर करती है।


याद रखें, जान है तो जहान है। काम जरूरी है, लेकिन आपकी सेहत से ज्यादा नहीं। आज ही अपने लिए थोड़ा वक्त निकालना शुरू करें।


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