‘वंदे मातरम्’ पर सरकार का बड़ा फैसला: अब गाने होंगे पूरे 6 छंद, खड़े होना भी जरूरी; जानिए नए नियम

MoneySutraHub Team

 Vande Mataram New Rules: केंद्र सरकार ने ‘वंदे मातरम्’ के लिए नई गाइडलाइन जारी की है। अब सरकारी कार्यक्रमों में इसके पूरे 6 छंद गाना अनिवार्य होगा और राष्ट्रगान की तरह सम्मान में खड़े होना भी जरूरी है। जानिए पूरी डिटेल।


National Song Guidelines: देश के राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा बदलाव किया है। अगर आप भी अक्सर सरकारी कार्यक्रमों या स्कूल के आयोजनों में हिस्सा लेते हैं, तो यह खबर आपके लिए बहुत जरूरी है। सरकार ने राष्ट्रीय गीत के सम्मान और उसे गाने के तरीकों को लेकर तस्वीर बिल्कुल साफ कर दी है।


गृह मंत्रालय ने 28 जनवरी 2026 को एक नया आदेश जारी किया है। इसके मुताबिक, अब से सरकारी और खास मौकों पर 'वंदे मातरम्' को आधा-अधूरा नहीं, बल्कि पूरा गाया जाएगा। साथ ही, इसके सम्मान में खड़े होने को लेकर भी नियम तय कर दिए गए हैं। आइए, आसान भाषा में समझते हैं कि सरकार की नई गाइडलाइन क्या कहती है।


अब गाने होंगे पूरे 6 छंद


सबसे बड़ा बदलाव गीत की लंबाई को लेकर हुआ है। अब तक हम अक्सर देखते थे कि कार्यक्रमों में 'वंदे मातरम्' के शुरू के केवल 2 छंद (Stanzas) ही गाए जाते थे। लेकिन नई गाइडलाइन के अनुसार, अब सरकारी या आधिकारिक कार्यक्रमों में इसके सभी 6 छंदों को गाना या बजाना अनिवार्य होगा।


सरकार ने इसे राष्ट्रीय गान 'जन गण मन' की तरह ही एक स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल के तहत ला दिया है। इसके लिए समय सीमा भी तय की गई है।


तय समय: आधिकारिक तौर पर 6 छंदों को गाने या बजाने में 3 मिनट 10 सेकंड का समय लगेगा।

हालांकि, सरकार ने थोड़ी राहत भी दी है कि मौके और हालात के हिसाब से इसमें थोड़ा बदलाव किया जा सकता है, लेकिन पहली प्राथमिकता पूरे गीत को ही दी जाएगी।


खड़े होकर देना होगा सम्मान


अक्सर लोगों के मन में सवाल रहता था कि क्या 'वंदे मातरम्' बजते समय खड़ा होना जरूरी है? सरकार ने इस कन्फ्यूजन को दूर कर दिया है। नए आदेश में साफ कहा गया है कि जब भी वंदे मातरम् गाया या बजाया जाए, वहां मौजूद सभी लोगों को सम्मानपूर्वक खड़ा होना चाहिए। यह ठीक वैसा ही नियम है, जैसा हम राष्ट्रगान (National Anthem) के लिए फॉलो करते हैं।


पहले कौन सा गीत बजेगा?


कई बार कार्यक्रमों में यह दुविधा होती थी कि पहले राष्ट्रगान बजेगा या राष्ट्रीय गीत। सरकार ने इस क्रम (Sequence) को भी फिक्स कर दिया है:


अगर किसी कार्यक्रम में दोनों गीतों का आयोजन होना है, तो पहले 'वंदे मातरम्' प्रस्तुत किया जाएगा। उसके बाद में राष्ट्रगान 'जन गण मन' होगा। इस नियम से सभी सरकारी कार्यक्रमों में एकरूपता बनी रहेगी।


कहां-कहां लागू होंगे ये नियम?


यह नई गाइडलाइन विशेष रूप से सरकारी और आधिकारिक आयोजनों के लिए बनाई गई है। इनमें शामिल हैं:


राष्ट्रपति और राज्यपाल के आगमन या उनके भाषण से पहले और बाद में। तिरंगा फहराने के दौरान। पद्म पुरस्कार जैसे नागरिक सम्मान समारोहों में। स्कूलों, कॉलेजों और सरकारी संस्थानों के आधिकारिक कार्यक्रमों में।


क्या यह कोई कानून है?


आपको बता दें कि यह गाइडलाइन एक 'प्रशासनिक प्रोटोकॉल' (Administrative Protocol) है। इसका मतलब है कि यह सरकारी कामकाज और कार्यक्रमों को व्यवस्थित और सम्मानजनक बनाने के लिए है। यह कोई दंडात्मक कानून (Penal Law) नहीं है, जिसके उल्लंघन पर जेल हो जाए, लेकिन एक जिम्मेदार नागरिक और सरकारी तंत्र का हिस्सा होने के नाते इसका पालन करना अनिवार्य माना जाएगा।


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इस फैसले का मुख्य उद्देश्य यही है कि 'वंदे मातरम्' को भी वही आधिकारिक दर्जा और सम्मान मिले, जो राष्ट्रगान को मिलता है।

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