FD-RD Tax Rules: क्या FD और RD के ब्याज पर अब ज्यादा TDS कटेगा? आयकर विभाग के नए नियमों और सेक्शन 393(1) के बदलावों को विस्तार से समझें। सीनियर सिटीजन और आम निवेशकों के लिए TDS की लिमिट और कैलकुलेशन की पूरी जानकारी यहाँ पढ़ें।
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| FD-RD Tax Rules |
सोशल मीडिया और खबरों में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या अब FD पर ज्यादा टैक्स देना पड़ेगा? क्या नए इनकम टैक्स कानून से आम लोगों पर अतिरिक्त बोझ बढ़ेगा? अगर आपके मन में भी यही सवाल हैं, तो आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं।
TDS का मूल नियम: कब कटता है टैक्स?
सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि बैंक आपके ब्याज पर तभी TDS काटता है, जब आपकी ब्याज आय तय सीमा से ऊपर चली जाती है।
सामान्य नागरिक (60 वर्ष से कम): अगर आपकी सालाना ब्याज आय 40,000 रुपये से अधिक है, तो बैंक TDS काट सकता है। कुछ मामलों में यह सीमा 50,000 रुपये तक मानी जाती है।
वरिष्ठ नागरिक (60 वर्ष या उससे अधिक): 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोगों के लिए राहत ज्यादा है। उनके लिए ब्याज आय की सीमा 50,000 रुपये तय है, जबकि नए प्रावधानों में 1,00,000 रुपये तक की चर्चा भी की गई है।
पुराना बनाम नया कानून: भ्रम की असली वजह
अब उस बदलाव की बात करते हैं, जिसकी वजह से भ्रम पैदा हुआ। अभी तक बैंक ब्याज पर TDS के नियम Income Tax Act, 1961 की धारा 194A के तहत चलते थे। इसमें स्पष्ट प्रावधान था कि एक तय सीमा तक ब्याज पर टैक्स नहीं काटा जाएगा।
अब सरकार नए आयकर अधिनियम 2025 की तैयारी कर रही है। इसमें TDS के प्रावधानों को धारा 393(1) में रखा गया है और बैंकिंग कंपनी की परिभाषा धारा 402 में दी गई है।
इसी बदलाव को देखकर लोगों में यह आशंका फैल गई कि शायद अब छूट की सीमा बदल जाएगी या बैंकों की परिभाषा सीमित हो जाएगी। लेकिन आयकर विभाग ने साफ किया है कि ऐसा कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है। यानी जिन बैंकों पर पहले नियम लागू होते थे, वही व्यवस्था आगे भी बनी रहेगी।
FD-RD पर TDS का पूरा कैलकुलेशन
मान लीजिए आपकी उम्र 35 साल है और आपने किसी बैंक में 6,00,000 रुपये की FD कराई है। उस पर आपको सालाना 8% ब्याज मिल रहा है, यानी कुल ब्याज 48,000 रुपये होगा।
PAN कार्ड जमा है: अगर आपने बैंक को अपना PAN दिया है, तो बैंक इस ब्याज पर 10% TDS काटेगा।
इस हिसाब से कटौती होगी 4,800 रुपये की।
PAN कार्ड जमा नहीं है: अगर आपने PAN जमा नहीं किया है, तो बैंक 20% TDS काट सकता है।
इस स्थिति में कटौती होगी 9,600 रुपये की।
इसलिए यह बेहद जरूरी है कि आप बैंक में अपना PAN अपडेट रखें।
RD (रिकरिंग डिपॉजिट) पर भी वही नियम
कई लोगों को लगता है कि RD पर टैक्स नहीं कटता, लेकिन यह धारणा गलत है। 2015 के बाद से RD पर मिलने वाला ब्याज भी FD की तरह ही माना जाता है। अगर आपकी RD से मिलने वाली ब्याज आय तय सीमा से ऊपर जाती है, तो उस पर भी TDS कट सकता है।
सीनियर सिटीजन के लिए बड़ी राहत
वरिष्ठ नागरिकों को सरकार हमेशा से कुछ राहत देती रही है। रिटायरमेंट के बाद कई लोग अपनी जरूरतों के लिए ब्याज आय पर निर्भर रहते हैं। इसी वजह से उनके लिए ब्याज पर TDS की सीमा अपेक्षाकृत अधिक रखी गई है।
अगर किसी वरिष्ठ नागरिक की सालाना ब्याज आय 1,00,000 रुपये तक रहती है, तो उन्हें नए प्रावधानों के तहत राहत मिल सकती है।
TDS कटने से कैसे बचाएं? (Form 15G और 15H)
अगर आपकी कुल सालाना आय, ब्याज सहित, टैक्स छूट की सीमा से कम है, लेकिन फिर भी बैंक TDS काट रहा है, तो आप इसे रोक सकते हैं।
Form 15G: 60 वर्ष से कम उम्र के व्यक्ति इसे भरकर बैंक में जमा कर सकते हैं।Form 15H: वरिष्ठ नागरिक इस फॉर्म का उपयोग करते हैं।
इन फॉर्म्स के जरिए आप बैंक को यह घोषणा देते हैं कि आपकी आय पर टैक्स देनदारी नहीं बनती, इसलिए ब्याज पर TDS न काटा जाए।
आयकर विभाग के इस स्पष्टीकरण का मकसद नियमों को और साफ़ करना है, न कि निवेशकों पर अतिरिक्त बोझ डालना। नए कानून में शब्दों और धाराओं का स्वरूप जरूर बदला है, लेकिन FD और RD पर TDS का मूल ढांचा लगभग वही है। अगर आपने समय पर अपना PAN अपडेट रखा है और जरूरत पड़ने पर Form 15G/15H जमा किया है, तो घबराने की कोई बात नहीं है। टैक्स के नियमों को समझकर आप अपने निवेश को बेहतर तरीके से संभाल सकते हैं।
