युद्ध से भारत में फूटेगा महंगाई का बम? ADB का बड़ा अलर्ट, GDP ग्रोथ घटी, जानें आपकी जेब और रसोई पर क्या होगा असर

Keyur Raval

India GDP forecast cut: मिडिल ईस्ट युद्ध का असर अब भारत पर! ADB ने भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान घटाकर 6.3% कर दिया है। क्रूड ऑयल महंगा होने से महंगाई दर 6.9% तक जा सकती है। जानें आपकी जेब पर इसका क्या असर होगा। 


Middle East tension impact on India
India GDP forecast cut



नई दिल्ली, 10 मई: दुनिया के एक हिस्से में चल रहा युद्ध अब सिर्फ टीवी की खबरों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बहुत जल्द आपके घर की रसोई और आपकी जेब तक पहुंचने वाला है। पश्चिम एशिया (Middle East) में लगातर बढ़ता तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच का संघर्ष अब सीधे तौर पर भारतीय अर्थव्यवस्था (Indian Economy) को अपनी चपेट में ले रहा है।


विदेशी बाजारों से भारत के लिए एक बहुत ही बुरी खबर आई है। एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) ने भारत की आर्थिक वृद्धि दर यानी जीडीपी (GDP) ग्रोथ के अनुमान में एक बड़ी कटौती कर दी है। आसान भाषा में समझें तो, युद्ध के कारण दुनिया भर में कच्चे तेल (Crude Oil) के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं, और यही बढ़ता हुआ दाम भारत के लिए सबसे बड़ी मुसीबत बनने जा रहा है। आइए विस्तार से समझते हैं कि इस वैश्विक संकट का भारत की अर्थव्यवस्था, किसानों और आम आदमी की जिंदगी पर क्या असर होने वाला है।


ADB ने दिया बड़ा झटका: GDP ग्रोथ के अनुमान में 0.6% की गिरावट


किसी भी देश की तरक्की उसकी GDP से तय होती है। लेकिन एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) के चीफ इकोनॉमिस्ट 'अल्बर्ट पार्क' ने जो ताजा रिपोर्ट पेश की है, वह भारत के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने बताया है कि मिडिल ईस्ट में चल रहे भारी संकट के कारण पूरी दुनिया की 'सप्लाई चेन' (सामानों की आवाजाही) बुरी तरह प्रभावित हुई है।


इस रुकावट का सीधा असर भारत पर पड़ेगा। ADB के अनुसार भारत की GDP ग्रोथ रेट जो पहले 6.9% रहने की उम्मीद थी, वह अब गिरकर 6.3% पर आ सकती है। अगले वित्तीय वर्ष के लिए पहले यह अनुमान लगाया गया था कि भारत 7.3% की शानदार दर से विकास करेगा। लेकिन मौजूदा हालातों को देखते हुए इसमें सीधे तौर पर 0.6% की भारी कटौती कर दी गई है। विकास दर में यह गिरावट इस बात का संकेत है कि देश में नए रोजगार के अवसर और व्यापार की रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ सकती है।


क्या देश में फूटेगा महंगाई का बम?


जब भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चा तेल महंगा होता है, तो उसका सबसे पहला और सीधा असर आम जनता की जेब पर पड़ता है। पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ते ही ट्रांसपोर्टेशन महंगा हो जाता है, जिससे सुई से लेकर हवाई जहाज तक, हर चीज की कीमत बढ़ जाती है।


ADB की रिपोर्ट के आंकड़े डराने वाले हैं:


महंगाई में भारी उछाल: पहले यह अनुमान था कि भारत में महंगाई दर 4.5% के आसपास रहेगी। लेकिन अब कच्चे तेल के संकट के कारण यह बढ़कर 6.9% तक पहुंच सकती है।


सीधा 2.4% का जंप: इसका मतलब है कि महंगाई में सीधे 2.4% का भयानक उछाल देखने को मिल सकता है। यह आम आदमी के घरेलू बजट को पूरी तरह से बिगाड़ कर रख देगा।


कच्चे तेल के दाम आसमान पर: रिपोर्ट में यह भी संभावना जताई गई है कि साल 2026 तक कच्चे तेल की औसत कीमत 96 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है। यह आंकड़ा पिछले सभी अनुमानों से बहुत ज्यादा है।


खेती, किसान और आपकी थाली पर मंडराता संकट


भारत अपनी जरूरत का सबसे ज्यादा तेल और गैस विदेशों से खरीदता (Import) है। ऐसे में अल्बर्ट पार्क ने एक बहुत ही गंभीर चेतावनी दी है, जिसका सीधा असर देश के किसानों और आपकी रसोई पर पड़ेगा।


इसे इस तरह समझिए:


महंगा गैस और तेल: अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस और तेल के दाम बढ़ेंगे।


महंगा खाद (Fertilizer): गैस के दाम बढ़ने से खेती में इस्तेमाल होने वाले फर्टिलाइजर (खाद) को बनाने की लागत बढ़ जाएगी, जिससे खाद बहुत महंगी हो जाएगी।


उत्पादन में कमी: जब खाद महंगी होगी, तो मजबूरन देश का किसान इसका इस्तेमाल कम कर देगा। खाद का कम उपयोग होने से फसलों की पैदावार (Crop Production) घट जाएगी।


खाद्य पदार्थों की महंगाई: जब बाजार में अनाज और सब्जियों की सप्लाई कम होगी और मांग ज्यादा होगी, तो साल के अंत तक खाने-पीने की चीजों (Food Prices) के दाम आसमान छूने लगेंगे।


यह पूरी चेन रिएक्शन सीधे तौर पर आम आदमी की रसोई का बजट बिगाड़ देगी। रोजमर्रा की खाने-पीने की चीजें महंगी होने से मध्यम वर्ग और गरीब तबके पर सबसे ज्यादा आर्थिक बोझ पड़ेगा।


क्या है आगे का रास्ता? कब मिलेगी राहत?


हालांकि, इस चिंताजनक माहौल के बीच एक छोटी सी राहत की किरण भी है। एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) ने अपनी रिपोर्ट के अंत में यह उम्मीद जताई है कि यह संकट हमेशा नहीं रहेगा।


जैसे ही पश्चिम एशिया में युद्ध के हालात थोड़े शांत होंगे और तनाव कम होगा, सप्लाई चेन फिर से ठीक हो जाएगी। ADB का मानना है कि इस संकट के टलने के बाद, अगले साल से भारत के विकास की गाड़ी एक बार फिर से अपनी पूरी रफ्तार के साथ पटरी पर लौट आएगी।


फिलहाल के लिए यह स्पष्ट है कि विदेशी युद्ध की तपिश से भारत अछूता नहीं रहने वाला है। क्रूड ऑयल के बढ़ते दाम, 0.6% घटती GDP और 6.9% तक पहुंचती महंगाई दर आम आदमी के लिए आने वाले कुछ महीनों को चुनौतीपूर्ण बना सकती है। ऐसे में समझदारी इसी में है कि लोग अपने खर्चों को लेकर सतर्क रहें और भविष्य के इस 'महंगाई बम' के लिए आर्थिक रूप से खुद को तैयार रखें।


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