शेयर बाजार में ताइवान का बड़ा धमाका: MSCI इंडेक्स में TSMC का दबदबा बढ़ा, भारत का वेटेज 6 साल के निचले स्तर पर; जानें क्या है इसकी बड़ी वजह

Keyur Raval

MSCI Emerging Market Index: MSCI EM इंडेक्स में ताइवान सेमीकंडक्टर (TSMC) का वेटेज बढ़कर 14.2% हो गया है, जबकि भारत का हिस्सा गिरकर 11.94% पर आ गया है। जानें 30 साल बाद आए इस बड़े बदलाव का कारण।


MSCI Emerging Market Index
Taiwan Semiconductor weightage



नई दिल्ली, 8 मई: MSCI इमर्जिंग मार्केट इंडेक्स की ताज़ा रिपोर्ट ने भारतीय निवेशकों को चौंका दिया है। दुनिया की अग्रणी चिप निर्माता, ताइवान सेमीकंडक्टर (TSMC) का वेटेज बढ़कर 14.2% के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है, जो पिछले 30 सालों में किसी एक कंपनी के लिए सबसे ज्यादा है। वहीं, भारतीय बाजार का वेटेज गिरकर 11.94% रह गया है, जो 6 साल का सबसे निचला स्तर है। इस बड़े बदलाव का मुख्य कारण AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) और टेक्नोलॉजी सेक्टर में बढ़ता वैश्विक रुझान है। विदेशी निवेशक अब भारतीय शेयरों के महंगे मूल्यांकन को छोड़कर ताइवान और दक्षिण कोरिया के सस्ते और टेक-आधारित शेयरों में पैसा लगा रहे हैं। इंडेक्स में भारत के रिलायंस और एचडीएफसी जैसे दिग्गजों का वेटेज मात्र 0.8% ही रह गया है, जो वैश्विक स्तर पर बदलती प्राथमिकताओं को दर्शाता है।


ग्लोबल शेयर बाजारों में इन दिनों एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। दुनिया की सबसे बड़ी चिप बनाने वाली कंपनी, ताइवान सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कंपनी (TSMC) ने 'MSCI मॉर्गन स्टेनली कैपिटल इंटरनेशनल इमर्जिंग मार्केट (EM) इंडेक्स' में अपनी बादशाहत कायम कर ली है। ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, TSMC ने भारत के मुकाबले अपनी बढ़त को काफी मजबूत कर लिया है। यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब पूरी दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक टेक्नोलॉजी का क्रेज बढ़ रहा है। विदेशी निवेशकों के लिए अब भारत से ज्यादा ताइवान की यह दिग्गज कंपनी पहली पसंद बनती जा रही है।


30 साल का रिकॉर्ड टूटा: TSMC की ऐतिहासिक छलांग


MSMC की नई फैक्टशीट के अनुसार, इस इंडेक्स में ताइवान सेमीकंडक्टर का वेटेज (Weightage) अब बढ़कर 14.2% के स्तर पर पहुंच गया है। ताज्जुब की बात यह है कि पिछले 30 सालों में पहली बार ऐसा हुआ है कि किसी एक अकेले शेयर का वेटेज MSCI EM इंडेक्स में इतना ज्यादा हुआ हो। यह न केवल कंपनी के लिए बल्कि पूरे ताइवान के बाजार के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।


दूसरी तरफ, अगर भारत की बात करें तो भारत का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा है। इंडेक्स में भारत का हिस्सा घटकर 11.94% रह गया है। जानकारों का कहना है कि यह पिछले 6 सालों का सबसे निचला स्तर है। फरवरी 2024 में पहली बार TSMC ने वेटेज के मामले में पूरे भारत को पीछे छोड़ दिया था, और अब यह फासला और ज्यादा बढ़ गया है।


आखिर भारत क्यों पिछड़ा?


भारत का वेटेज कम होने के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण बताए जा रहे हैं:


बड़ी बिकवाली: कोरोना काल के बाद भारतीय बाजार ने जबरदस्त तेजी दिखाई थी, लेकिन हाल के महीनों में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने भारतीय शेयरों में जमकर बिकवाली की है।


AI का बढ़ता क्रेज: आज पूरी दुनिया में AI (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) की चर्चा है। AI चलाने के लिए जिन एडवांस्ड चिप्स की जरूरत होती है, उन्हें बनाने में ताइवान सेमीकंडक्टर का कोई मुकाबला नहीं है। यही कारण है कि निवेशक भारत के सर्विस सेक्टर से हटकर ताइवान के टेक हार्डवेयर में पैसा लगा रहे हैं।


महंगा मूल्यांकन (Valuation): भारतीय शेयर बाजार फिलहाल दुनिया के अन्य बाजारों की तुलना में काफी महंगे माने जा रहे हैं। इसके विपरीत दक्षिण कोरिया और ताइवान के शेयर अभी भी सस्ते और आकर्षक वैल्यूएशन पर उपलब्ध हैं, जिससे विदेशी ब्रोकरेज वहां निवेश करना अधिक पसंद कर रहे हैं।


MSCI इंडेक्स का महत्व: क्यों यह खबर मायने रखती है?


आम निवेशकों के मन में यह सवाल हो सकता है कि MSCI इंडेक्स से क्या फर्क पड़ता है? दरअसल, MSCI इमर्जिंग मार्केट इंडेक्स को उभरते देशों के बाजारों का सबसे बड़ा पैमाना माना जाता है। दुनिया भर के बड़े 'पैसिव फंड' (Passive Funds) इसी इंडेक्स को फॉलो करते हैं। करीब 750 बिलियन डॉलर (लगभग 62 लाख करोड़ रुपये) से ज्यादा की संपत्ति इस इंडेक्स के आधार पर निवेश की जाती है।


जब भी किसी देश या कंपनी का वेटेज इस इंडेक्स में बढ़ता है, तो दुनिया भर के विदेशी निवेशक खुद-ब-खुद उस कंपनी या देश के शेयरों में पैसा लगाने लगते हैं। इसके विपरीत, वेटेज घटने का मतलब है कि भारत से विदेशी निवेश (FDI/FPI) का प्रवाह कम हो सकता है।


ताइवान ने चीन को भी छोड़ा पीछे


TSMC के शेयरों में आई तूफानी तेजी का असर यह हुआ है कि ताइवान ने अब MSCI EM इंडेक्स में चीन जैसे दिग्गज को भी पीछे छोड़ दिया है। ताइवान की इस बढ़त ने साबित कर दिया है कि भविष्य की इकोनॉमी अब पूरी तरह से सेमीकंडक्टर और AI सप्लाई चेन पर टिकी होगी।


भारतीय दिग्गजों की क्या है स्थिति?


MSCI इंडेक्स की टॉप 10 कंपनियों की बात करें, तो इनका कुल वेटेज 34.64% है। इस लिस्ट में भारत की दो सबसे बड़ी कंपनियां—एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) और रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance Industries) भी शामिल हैं। हालांकि, इनकी स्थिति TSMC के मुकाबले काफी कमजोर है। जहां अकेले TSMC का वेटेज 14.2% है, वहीं रिलायंस और एचडीएफसी बैंक दोनों का वेटेज केवल 0.8-0.8% ही है। यह दिखाता है कि ग्लोबल लेवल पर एक चिप बनाने वाली कंपनी के सामने हमारे दिग्गज कितने पीछे रह गए हैं।


बाजार के जानकारों की चिंता


बाजार के विशेषज्ञों का मानना है कि इंडेक्स में एक ही कंपनी (TSMC) का इतना ज्यादा प्रभुत्व बढ़ना थोड़ा चिंताजनक भी है। इसे 'कंसंट्रेशन रिस्क' कहा जाता है। अगर भविष्य में सेमीकंडक्टर सेक्टर में कोई गिरावट आती है, तो पूरे इमर्जिंग मार्केट इंडेक्स पर इसका बुरा असर पड़ सकता है। फिलहाल, विदेशी ब्रोकरेज हाउस भारत की तुलना में ताइवान और दक्षिण कोरिया को प्राथमिकता दे रहे हैं क्योंकि वहां की कंपनियां AI सप्लाई चेन का अभिन्न हिस्सा हैं।


इसमें कोई शक नहीं कि भारत एक मजबूत अर्थव्यवस्था के रूप में उभर रहा है, लेकिन ग्लोबल इंडेक्स के गणित में फिलहाल ताइवान का पलड़ा भारी है। AI क्रांति ने निवेशकों का नजरिया बदल दिया है। भारत को अपना वेटेज दोबारा हासिल करने के लिए न केवल अपनी घरेलू विकास दर को बनाए रखना होगा, बल्कि तकनीकी क्षेत्र में भी बड़े खिलाड़ियों को तैयार करना होगा। फिलहाल के लिए, ताइवान सेमीकंडक्टर की यह बढ़त भारतीय बाजार के लिए एक सतर्क रहने वाली खबर है।


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