Petrol-Diesel Price: ईरान-अमेरिका में सुलह के बाद भी सस्ता नहीं होगा तेल? एक्सपर्ट्स ने बताईं ये 3 बड़ी वजहें

MoneySutraHub Team

Iran US Tension: वैश्विक तेल बाजार पर मंडरा रहा संकट टलता नहीं दिख रहा। अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में चल रही शांति वार्ता से उम्मीदें तो बंधी हैं, लेकिन विशेषज्ञ इसे फौरी राहत मानने से इनकार कर रहे हैं। उनके अनुसार, अगर होर्मुज जलडमरूमध्य का रास्ता खुल भी जाए, तो भी तेल की कीमतों में तुरंत कमी नहीं आएगी। इसके पीछे ईरान द्वारा नया 'टोल' लगाने की आशंका, ठप पड़ी सप्लाई चेन को दोबारा शुरू करने में लगने वाला समय, और ईरान की ड्रोन क्षमता से पैदा हुआ भविष्य का डर जैसे तीन बड़े कारण हैं। यह लेख इन्हीं वजहों की पड़ताल करता है और बताता है कि क्यों पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर राहत के लिए अभी और इंतजार करना पड़ सकता है।


Crude Oil Price
Global Oil Market



नई दिल्ली, 11 अप्रैलः पूरी दुनिया की निगाहें इस वक्त ईरान और अमेरिका के बीच चल रही शांति वार्ता पर टिकी हैं। उम्मीद की जा रही है कि अगर दोनों देशों में समझौता हो जाता है, तो शायद पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों से कुछ राहत मिले। लेकिन क्या यह इतना आसान है? एक्सपर्ट्स की मानें तो भले ही दोनों देश हाथ मिला लें, तेल की कीमतों का मीटर इतनी जल्दी नीचे नहीं आने वाला।


दरअसल, सारा खेल होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) का है। यह समुद्र का एक ऐसा संकरा रास्ता है, जहां से दुनिया का लगभग एक-तिहाई कच्चा तेल गुजरता है। ईरान और अमेरिका के तनाव के कारण यह रास्ता बंद हो गया है, जिससे तेल की सप्लाई पर सीधा असर पड़ा है। अब सवाल यह है कि अगर समझौता हो भी जाए, तो कीमतें सामान्य क्यों नहीं होंगी? आइए इसके पीछे की 3 बड़ी वजहों को समझते हैं।


क्यों तुरंत राहत की उम्मीद करना जल्दबाजी है?


‘द इकोनॉमिस्ट' के डिप्टी एडिटर एडवर्ड कार के मुताबिक, अगर आज शांति समझौता हो भी जाता है, तो भी तेल बाजार को पटरी पर लौटने में लंबा वक्त लगेगा। उन्होंने इसके तीन मुख्य कारण बताए हैं:


Iran US Tension


ईरान की 'टोल' वाली चाल


होर्मुज को फिर से खोलना किसी बटन को दबाने जैसा आसान काम नहीं है। इस बात का डर है कि ईरान इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों पर कोई नया 'टोल' या टैक्स लगा सकता है। अगर ऐसा हुआ, तो जहाजों का किराया बढ़ेगा और इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ेगा, जो अंत में हमारी जेब पर भारी पड़ेगा।


टूट चुकी सप्लाई चेन


होर्मुज के बंद होने से सैकड़ों जहाज रास्ते में फंसे हुए हैं और कई तेल के कुओं पर उत्पादन रोकना पड़ा है। इन बंद पड़े कुओं को दोबारा চালু करना और सप्लाई को पहले की तरह सामान्य बनाना एक बेहद धीमी और जटिल प्रक्रिया है। तेल को कुओं से निकलकर बाजार तक पहुंचने में ही कई हफ्ते लग सकते हैं।


भविष्य का डर


ईरान ने इस संकट के जरिए दुनिया को यह दिखा दिया है कि वह सिर्फ होर्मुज ही नहीं, बल्कि खाड़ी देशों में मौजूद तेल पाइपलाइनों और पावर प्लांट्स को भी निशाना बना सकता है। यह डर निवेशकों और तेल कंपनियों के मन में बैठ गया है, जो लंबे समय तक बाजार में अनिश्चितता बनाए रखेगा।


Strait of Hormuz


अब खतरा समंदर में नहीं, आसमान में है


JINSA के वाइस प्रेसिडेंट ब्लेस मिस्ज्टल ने एक और दिलचस्प लेकिन खतरनाक पहलू की ओर इशारा किया है। उनका कहना है कि अब ईरान की ताकत सिर्फ समुद्री माइन्स या तेज रफ्तार बोट्स नहीं हैं।


मिस्ज्टल के अनुसार, ईरान अब आसमान से हमला करने वाली ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल कर रहा है। इन ड्रोन्स से जहाजों को निशाना बनाया जा रहा है, जिससे कमर्शियल जहाजों ने इस रास्ते का इस्तेमाल करना ही बंद कर दिया है। यह नई तकनीक ईरान को एक ऐसी बढ़त देती है, जिसे दुनिया की किसी भी बड़ी नेवी के लिए रोकना एक बहुत बड़ी चुनौती है।


भले ही इस्लामाबाद में नेता शांति समझौते पर हस्ताक्षर कर दें, लेकिन होर्मुज की जमीनी हकीकत और ईरान के नए ड्रोन हथियार ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक नया और बड़ा जोखिम बन चुके हैं। जब तक जहाजों के लिए यह रास्ता पूरी तरह सुरक्षित नहीं हो जाता और सप्लाई चेन की बाधाएं दूर नहीं हो जातीं, तब तक पेट्रोल-डीजल की कीमतों में किसी बड़ी राहत की उम्मीद करना थोड़ा मुश्किल है।


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