RBI Repo Rate: RBI ने रेपो रेट 5.25% पर बरकरार रखा। होम लोन EMI में फिलहाल कोई कमी नहीं। जानें आरबीआई के फैसले का आपकी जेब पर क्या असर पड़ेगा और एक्सपर्ट्स की राय।
![]() |
| Repo Rate Unchanged |
नई दिल्ली, 8 अप्रैलः आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की बैठक के बाद 8 अप्रैल को रेपो रेट को 5.25% पर अपरिवर्तित रखने का फैसला सुनाया गया है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने स्पष्ट किया कि मौजूदा वैश्विक हालात, खासकर मध्यपूर्व में जारी संघर्ष और क्रूड ऑयल की ऊंची कीमतों के कारण महंगाई का खतरा बना हुआ है। ऐसे में ब्याज दरों में कमी करना जोखिम भरा हो सकता है। इस फैसले से होम लोन और अन्य लोन की ईएमआई में तत्काल राहत की उम्मीद कर रहे ग्राहकों को अभी और इंतजार करना पड़ेगा। हालांकि, राहत की बात यह है कि पिछले साल फरवरी से अब तक आरबीआई रेपो रेट में 1.25% की कमी कर चुका है, जिससे मौजूदा ग्राहकों की ईएमआई में काफी कमी आई है। उदाहरण के लिए, 50 लाख रुपये के लोन पर ईएमआई में 3,057 रुपये तक की बचत हुई है। एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि यदि महंगाई नियंत्रण में रहती है और भू-राजनीतिक तनाव कम होता है, तो आरबीआई इस वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में रेपो रेट में 0.25% की कटौती कर सकता है। नए लोन लेने वाले ग्राहकों को फ्लोटिंग रेट पर लोन लेने की सलाह दी जा रही है, ताकि भविष्य में रेट कम होने पर उन्हें सीधा फायदा मिल सके। आरबीआई ने अपनी मॉनेटरी पॉलिसी में न्यूट्रल रुख भी बरकरार रखा है।
अगर आप होम लोन, कार लोन या किसी दूसरे लोन की ईएमआई भर रहे हैं और उम्मीद लगाए बैठे थे कि आरबीआई ब्याज दरों में कमी करेगा, तो यह खबर आपके लिए है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 8 अप्रैल को अपनी मॉनेटरी पॉलिसी का ऐलान कर दिया है। केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट में किसी भी तरह की कटौती नहीं की है। रेपो रेट को जस का तस 5.25% पर बरकरार रखा गया है। इसका सीधा मतलब यह है कि लोन लेने वाले ग्राहकों की ईएमआई में फिलहाल कोई कमी नहीं आएगी। आपको राहत के लिए अभी थोड़ा और इंतजार करना पड़ेगा।
बाजार के जानकारों और एक्सपर्ट्स ने पहले ही अनुमान लगा लिया था कि अप्रैल की पॉलिसी में आरबीआई रेपो रेट में छेड़छाड़ नहीं करेगा। सोमवार को आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने जब पॉलिसी के नतीजों का ऐलान किया, तो वह बिल्कुल उम्मीदों के मुताबिक ही रहा। आइए, इस फैसले की हर छोटी-बड़ी बात को आसान भाषा में समझते हैं और जानते हैं कि इसका आपकी जेब पर क्या असर पड़ने वाला है।
आरबीआई का फैसला: क्या कहा गवर्नर ने?
आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक 6 अप्रैल से शुरू हुई थी। दो दिन तक चली मैराथन चर्चा के बाद 8 अप्रैल को सुबह 10 बजे आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने फैसला सुनाया। उन्होंने साफ कर दिया कि रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया है और यह 5.25% पर ही टिका रहेगा। साथ ही, आरबीआई ने अपनी मॉनेटरी पॉलिसी में 'न्यूट्रल' रुख को भी बरकरार रखा है। न्यूट्रल रुख का मतलब है कि आरबीआई जरूरत पड़ने पर भविष्य में ब्याज दरें बढ़ा भी सकता है और घटा भी सकता है। वह फिलहाल किसी एक दिशा में बंधा नहीं है।
गौरतलब है कि आरबीआई ने आखिरी बार दिसंबर 2025 में रेपो रेट में कमी की थी। उसके बाद फरवरी में आई पॉलिसी में भी रेट को स्थिर रखा गया था और अब अप्रैल में भी यही फैसला दोहराया गया है। इससे साफ है कि आरबीआई फिलहाल 'वेट एंड वॉच' के मूड में है।
EMI पर क्या पड़ेगा असर? ग्राहकों को अभी करना होगा इंतजार
रेपो रेट वह दर है जिस पर आरबीआई बैंकों को कर्ज देता है। जब रेपो रेट घटता है, तो बैंकों के लिए पैसा सस्ता हो जाता है और वे आगे ग्राहकों को कम ब्याज पर लोन देते हैं। इसके उलट, जब रेपो रेट बढ़ता है या स्थिर रहता है, तो लोन की ब्याज दरें भी वैसी ही बनी रहती हैं।
चूंकि इस बार रेपो रेट में कोई कमी नहीं आई है, इसलिए होम लोन, कार लोन, पर्सनल लोन और दूसरे कर्ज लेने वाले ग्राहकों की ईएमआई में कोई बदलाव नहीं होगा। जिन लोगों ने फ्लोटिंग रेट पर लोन लिया है, उनकी ईएमआई अभी जितनी चल रही है, उतनी ही रहेगी। अगर आप उम्मीद कर रहे थे कि इस महीने से आपकी किस्त कम हो जाएगी, तो वह सपना फिलहाल अधूरा ही रहेगा। बैंक अपने मौजूदा ब्याज दरों पर ही लोन देना जारी रखेंगे।
पिछले कटौती का फायदा: ग्राहकों को मिली है बड़ी राहत
हालांकि, मौजूदा फैसले से निराश होने की जरूरत नहीं है। अगर हम पिछले एक साल के आंकड़ों पर नजर डालें, तो आरबीआई ग्राहकों के हित में लगातार कदम उठाता रहा है। पिछले साल फरवरी से अब तक केंद्रीय बैंक रेपो रेट में कुल 1.25% की कमी कर चुका है। इस कटौती का सीधा फायदा लोन लेने वाले लोगों को मिला है।
इसका अंदाजा आप इस उदाहरण से लगा सकते हैं। मान लीजिए किसी ग्राहक ने 50 लाख रुपये का होम लोन 8.50% की ब्याज दर पर लिया था। रेपो रेट में आई 1.25% की कमी के बाद उसकी ईएमआई में हर महीने 3,057 रुपये की कमी आई है। यह किसी भी आम आदमी के लिए काफी बड़ी राहत है। जिन ग्राहकों ने ईएमआई कम नहीं करवाई, उनके लोन की अवधि (Tenure) घट गई है, जिससे वे जल्दी कर्ज से मुक्त हो सकेंगे। यानी, पिछले कटौती का असर अभी भी ग्राहकों की जेब पर पॉजिटिव दिख रहा है।
आरबीआई ने रेट क्यों नहीं घटाया? जानें बड़ी वजह
सवाल यह उठता है कि जब महंगाई कुछ हद तक काबू में है, तो आरबीआई ने रेपो रेट में कमी क्यों नहीं की? इसके पीछे की वजहें काफी गंभीर हैं। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने अपने बयान में साफ इशारा किया कि वैश्विक हालात अभी चिंताजनक हैं।
सबसे बड़ा खतरा मध्यपूर्व (Middle East) में चल रही लड़ाई का है। इस संघर्ष की वजह से दुनिया भर में कच्चे तेल यानी क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल आ सकता है। अगर क्रूड ऑयल महंगा होता है, तो भारत जैसे देश के लिए यह बड़ी समस्या खड़ी कर सकता है। महंगे क्रूड की वजह से सिर्फ पेट्रोल-डीजल ही महंगा नहीं होता, बल्कि ट्रांसपोर्टेशन की लागत बढ़ने से राशन से लेकर रोजमर्रा की हर चीज की कीमतें बढ़ने का खतरा रहता है।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर आरबीआई जल्दबाजी में रेपो रेट घटा देता है और बाद में क्रूड ऑयल की वजह से महंगाई भड़क जाती है, तो स्थिति को संभालना मुश्किल हो जाएगा। इसलिए केंद्रीय बैंक ने फिलहाल सतर्कता बरतते हुए रेट को स्थिर रखने का फैसला किया है। आरबीआई का फोकस अभी महंगाई को पूरी तरह काबू में रखने पर है।
भविष्य की उम्मीद: कब घट सकती है ब्याज दर?
अगर आप लोन की ईएमआई कम होने का इंतजार कर रहे हैं, तो निराश न हों। एक्सपर्ट्स का कहना है कि उम्मीद की किरण अभी बाकी है। जानकारों का अनुमान है कि अगर आने वाले महीनों में मध्यपूर्व का संकट टल जाता है और क्रूड ऑयल की कीमतें स्थिर रहती हैं, तो महंगाई पर दबाव कम हो जाएगा।
ऐसे में आरबीआई इस वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में रेपो रेट में कमी कर सकता है। एक्सपर्ट्स ने अनुमान जताया है कि हालात सामान्य रहने पर आरबीआई 0.25% की कटौती कर सकता है। लेकिन यह सब इस बात पर निर्भर करेगा कि महंगाई का आंकड़ा आरबीआई के लक्षित दायरे में रहता है या नहीं। जब तक महंगाई बढ़ने का खतरा पूरी तरह टल नहीं जाता, आरबीआई इंटरेस्ट रेट घटाने का जोखिम नहीं उठाएगा।
नए लोन लेने वालों के लिए एक्सपर्ट की सलाह
बाजार में कई लोग ऐसे हैं जो होम लोन या कार लोन लेने की प्लानिंग कर रहे हैं, लेकिन ब्याज दरें कम होने का इंतजार कर रहे हैं। एक्सपर्ट्स ऐसे ग्राहकों को सलाह दे रहे हैं कि अब और इंतजार करने का मतलब नहीं है। फिलहाल रेट घटने के आसार नहीं हैं, इसलिए आप अपनी जरूरत के हिसाब से लोन ले सकते हैं।
खास बात यह है कि नए ग्राहकों को हमेशा 'फ्लोटिंग रेट' पर लोन लेना चाहिए। फ्लोटिंग रेट वाले लोन का सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि जब भी आरबीआई रेपो रेट में कमी करता है, तो आपके लोन की ब्याज दर अपने आप कम हो जाती है। इससे आपकी ईएमआई घट जाती है या लोन की अवधि कम हो जाती है। वहीं, अगर आप 'फिक्स्ड रेट' पर लोन लेते हैं, तो भविष्य में रेट घटने पर भी आपको उसका कोई फायदा नहीं मिलता। इसलिए मौजूदा समय में फ्लोटिंग रेट ही सबसे समझदारी भरा विकल्प है।
सतर्कता ही आरबीआई की प्राथमिकता
कुल मिलाकर, आरबीआई का यह फैसला देश की इकोनॉमी की मजबूती को देखते हुए लिया गया है। रेपो रेट को 5.25% पर बनाए रखकर केंद्रीय बैंक ने साफ संकेत दे दिया है कि वह महंगाई के खिलाफ अपनी लड़ाई में कोई ढिलाई नहीं बरतेगा। लोन ग्राहकों के लिए फिलहाल ईएमआई में राहत नहीं है, लेकिन पिछली कटौती का लाभ उन्हें मिल रहा है। आने वाले समय में अगर वैश्विक हालात सुधरते हैं, तो ब्याज दरों में कमी की उम्मीद जरूर की जा सकती है। तब तक ग्राहकों को धैर्य रखना होगा और अपनी वित्तीय योजना को मौजूदा दरों के हिसाब से ही बनाना चाहिए।
.jpg)

