HDFC Bank Share Fall: मार्च तिमाही में FIIs ने HDFC बैंक से ₹35,000 करोड़ निकाले, जिससे शेयर 26.2% गिर गया। जानिए इस गिरावट के कारण और घरेलू निवेशकों का क्या रहा रुख।
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| HDFC Bank Crisis |
नई दिल्ली, 6 अप्रैल: शेयर बाजार के दिग्गजों में गिने जाने वाले HDFC बैंक को मार्च तिमाही में तगड़ा झटका लगा है। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने बैंक के शेयरों में जमकर बिकवाली की है। आंकड़ों पर नजर डालें तो विदेशी निवेशकों ने महज एक तिमाही के भीतर HDFC बैंक के करीब ₹35,000 करोड़ के शेयर बेच डाले हैं। इस भारी बिकवाली का सीधा असर बैंक के शेयरों पर दिखा और यह शेयर ताश के पत्तों की तरह बिखर गया।
मार्च तिमाही में बैंक का शेयर करीब 26.2% तक टूट गया। आपको बता दें कि मार्च 2020 में आए कोविड संकट (तब शेयर 33% गिरा था) के बाद से यह इस शेयर की सबसे बड़ी तिमाही गिरावट है।
लगातार कम हो रहा है विदेशी निवेशकों का भरोसा
HDFC बैंक से विदेशी निवेशकों का मोहभंग होता दिख रहा है। यह लगातार तीसरी तिमाही है जब FIIs ने बैंक से अपना पैसा निकाला है। मार्च तिमाही में विदेशी निवेशकों ने अपनी हिस्सेदारी 3.6% तक कम कर ली है (लगभग 47.95 करोड़ शेयर)। दिसंबर तिमाही में बैंक में विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी 47.67% थी, जो मार्च 2024 के अंत तक घटकर 44.05% रह गई है। सिर्फ हिस्सेदारी ही नहीं, बल्कि विदेशी निवेशकों की संख्या भी 2,757 से घटकर 2,528 हो गई है।
घरेलू निवेशकों (DIIs) ने उठाया मौके का फायदा
जहां विदेशी निवेशक शेयर बेचकर भाग रहे हैं, वहीं हमारे घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने इस गिरते बाजार में खरीदारी का बड़ा मौका देखा। म्यूचुअल फंड्स ने लगातार 5वीं तिमाही अपनी हिस्सेदारी बढ़ाते हुए इसे 26.66% से 29.54% कर दिया। इन्होंने करीब ₹28,293 करोड़ के शेयर खरीदे। प्रोविडेंट फंड्स ने ₹2,239 करोड़ और बीमा कंपनियों ने ₹256 करोड़ का निवेश किया। हालांकि, इसी दौरान LIC ने थोड़ी मुनाफावसूली करते हुए करीब ₹969 करोड़ के शेयर बेचे।
आखिर क्यों आ रही है HDFC बैंक के शेयरों में गिरावट?
बाजार के जानकारों के मुताबिक इस बड़ी गिरावट के पीछे कई अहम कारण हैं:
चेयरमैन का अचानक इस्तीफा: बैंक के पार्ट-टाइम चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती ने अचानक इस्तीफा दे दिया। उन्होंने 'मूल्यों और प्रक्रियाओं' पर सवाल उठाए थे। इस घटना ने निवेशकों के मन में कॉर्पोरेट गवर्नेंस को लेकर डर पैदा कर दिया। फिलहाल SEBI इस मामले की जांच कर रहा है।
मैनेजमेंट में बदलाव और मर्जर: अक्टूबर 2020 के बाद से टॉप मैनेजमेंट में हुए बदलाव और HDFC Ltd के साथ हुए मर्जर ने बैंक की ग्रोथ और प्रॉफिट मार्जिन पर बुरा असर डाला है।
नियामकीय चुनौतियां: RBI द्वारा क्रेडिट कार्ड बिजनेस पर लगाई गई पुरानी पाबंदियों का असर भी दिखा।
लोन और बॉन्ड विवाद: बैंक का हाई लोन-टू-डिपॉजिट रेश्यो और AT1 बॉन्ड की गलत बिक्री (मिस-सेलिंग) के आरोपों ने भी बैंक की छवि को नुकसान पहुंचाया है। इस मामले में कुछ सीनियर अधिकारियों पर एक्शन भी हुआ है।
जेफरीज (Jefferies) ने भी घटाया वेटेज
इन सभी निगेटिव खबरों के बीच ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म 'जेफरीज' ने भी बड़ा कदम उठाया है। जेफरीज ने अपने एशिया और ग्लोबल पोर्टफोलियो से HDFC बैंक के शेयरों की हिस्सेदारी कम कर दी है और इसे अपनी खास निवेश सूची से बाहर कर दिया है।
कुल मिलाकर, HDFC बैंक इस समय मैनेजमेंट से लेकर ग्रोथ मार्जिन तक कई मोर्चों पर संघर्ष कर रहा है। विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने दबाव और बढ़ा दिया है। हालांकि, घरेलू निवेशकों की लगातार खरीदारी इस बात का संकेत है कि लंबी अवधि के निवेशकों को अभी भी इस दिग्गज बैंक के बाउंस बैक करने की पूरी उम्मीद है।
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