Share Market Crash: अमेरिका-ईरान तनाव से दहला दलाल स्ट्रीट, सेंसेक्स 1600 अंक टूटा; निवेशकों के 8 लाख करोड़ डूबे, जानें क्या है पूरी वजह

Stock Market Crash: शेयर बाजार में गिरावट, सेंसेक्स क्रैश, निफ्टी 23600 के नीचे, अमेरिका ईरान युद्ध, डोनाल्ड ट्रंप चीन टैरिफ, कच्चे तेल की कीमतें, निवेशकों का नुकसान, आज का शेयर बाजार।


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Stock Market Crash


मुंबई, 13 अप्रैल: शेयर बाजार में भारी हाहाकार। अमेरिका-ईरान शांति वार्ता विफल होने और ट्रंप की चीन को धमकी से सेंसेक्स 1600 अंक टूटा। निवेशकों के ₹8 लाख करोड़ स्वाहा। पूरी खबर यहाँ पढ़ें।


भारतीय शेयर बाजार के लिए सोमवार, 13 अप्रैल 2026 का दिन किसी बुरे सपने से कम नहीं रहा। पिछले सप्ताह बाजार में देखी गई 6% की शानदार तेजी पर आज पानी फिर गया। अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता के बेनतीजा खत्म होने की खबर ने वैश्विक बाजारों के साथ-साथ भारतीय निवेशकों के भी पसीने छुड़ा दिए।


बाजार खुलते ही चौतरफा बिकवाली (Selling) शुरू हो गई, जिससे सेंसेक्स और निफ्टी ताश के पत्तों की तरह ढह गए। इस गिरावट ने न केवल बड़े निवेशकों को, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप में पैसा लगाने वाले छोटे निवेशकों को भी तगड़ा झटका दिया है।


सेंसेक्स और निफ्टी में ऐतिहासिक गिरावट


आज के कारोबार में बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स (Sensex) करीब 1600 अंकों या 2 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट के साथ 75,937 के इंट्राडे लो लेवल पर आ गया। वहीं, निफ्टी 50 (Nifty 50) इंडेक्स ने भी 500 अंकों से ज्यादा की गोताखोरी की और 23,600 के मनोवैज्ञानिक स्तर को तोड़ते हुए 23,556 के स्तर पर पहुंच गया।


सिर्फ बड़े शेयर ही नहीं, बल्कि बाजार का व्यापक हिस्सा भी इस बिकवाली की चपेट में रहा। निफ्टी मिडकैप 100 और स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में भी 2% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई, जिससे यह साफ हो गया कि बाजार में हर स्तर पर डर का माहौल है।


निवेशकों की गाढ़ी कमाई के ₹8 लाख करोड़ स्वाहा


बाजार में आई इस सुनामी ने निवेशकों की संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचाया है। सोमवार को आई इस गिरावट के कारण बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर लिस्टेड सभी कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन (Market Cap) 451 लाख करोड़ रुपये से घटकर 443 लाख करोड़ रुपये रह गया। यानी महज कुछ घंटों के भीतर निवेशकों के लगभग 8 लाख करोड़ रुपये डूब गए।


बाजार में गिरावट के 4 बड़े कारण


1) अमेरिका-ईरान शांति वार्ता का विफल होना:


बाजार में मची इस अफरा-तफरी की सबसे मुख्य वजह रविवार को अमेरिका और ईरान के बीच हुई शांति वार्ता का बेनतीजा खत्म होना है। इस असफलता ने खाड़ी देशों में युद्ध की आशंका को और गहरा कर दिया है। निवेशकों को डर है कि अगर स्थिति और बिगड़ी तो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Global Supply Chain) ठप हो सकती है।


2) स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) की नाकाबंदी:


अमेरिका ने संकेत दिए हैं कि वह एनर्जी सप्लाई को रोकने के लिए 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' को ब्लॉक करने की योजना बना रहा है। यह समुद्री रास्ता दुनिया के कच्चे तेल के व्यापार के लिए सबसे महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है। इसकी नाकाबंदी का मतलब है पूरी दुनिया में ऊर्जा का संकट खड़ा होना।


3) डोनाल्ड ट्रंप की चीन को ‘भारी’ धमकी:


अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक बयान ने आग में घी डालने का काम किया है। ट्रंप ने कहा है कि अगर चीन ने ईरान को हथियारों की सप्लाई जारी रखी, तो चीन पर 50% तक का भारी टैरिफ (Tariff) लगाया जाएगा। ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा, "अगर हमने उन्हें पकड़ा, तो उन्हें 50% टैरिफ देना होगा।" इस बयान से ट्रेड वॉर (Trade War) की आशंका बढ़ गई है।


4) कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में उबाल:


शांति वार्ता विफल होते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया है। ब्रेंट क्रूड की कीमतें 8% से ज्यादा उछलकर 103 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गईं। वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) भी 105 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को छू गया। भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए यह बेहद चिंताजनक खबर है।


विशेषज्ञों की राय: अब क्या करें निवेशक?


जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटजिस्ट डॉ. वीके विजय कुमार ने बाजार की मौजूदा स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव और हॉर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी की खबरें अनिश्चितता को चरम पर ले गई हैं।


डॉ. विजय कुमार के अनुसार:


इंतजार करें: निवेशकों के लिए फिलहाल सबसे अच्छी रणनीति ‘Wait and Watch’ यानी 'रुको और देखो' की है। जल्दबाजी में कोई भी नया निवेश करने से बचें।


रुपये पर दबाव: कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि से भारतीय रुपया फिर से दबाव में आ सकता है, जिससे बाजार में और अस्थिरता बढ़ेगी।


FII की बिकवाली: पिछले कुछ दिनों में जो विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने खरीदारी शुरू की थी, वह अब फिर से बिकवाली में बदल सकती है।


आगे की राह: क्या मंदी आने वाली है?


बाजार के जानकारों का मानना है कि यदि भू-राजनीतिक (Geopolitical) हालात जल्द नहीं सुधरे, तो दुनिया एक नई मंदी की ओर बढ़ सकती है। ऊर्जा संकट और महंगाई का सीधा असर कंपनियों के मुनाफे और आम जनता की जेब पर पड़ेगा। फिलहाल निवेशकों को अपनी पोजीशन को सुरक्षित रखने और पोर्टफोलियो को बैलेंस करने की सलाह दी जा रही है।


13 अप्रैल 2026 का यह क्रैश यह याद दिलाता है कि शेयर बाजार हमेशा ग्लोबल सेंटिमेंट से प्रभावित होता है। निवेशकों को चाहिए कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल विश्वसनीय वित्तीय सलाहकारों की मदद से ही अपने फैसले लें। फिलहाल के लिए, बाजार की नजरें अमेरिका और ईरान के अगले कदमों पर टिकी हैं।


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डिस्क्लेमर: यहां पर दिए गए विचार और इन्वेस्टमेंट सलाह इन्वेस्टमेंट प्रोफेशनल्स के अपने विचार और सलाह हैं। MoneysutraHub.in यूज़र्स को सलाह देता है कि कोई भी इन्वेस्टमेंट का फैसला लेने से पहले किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह लें।

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